जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में एक नाबालिग लड़की के यौन शोषण और संदिग्ध हालात में हुई मौत के सनसनीखेज मामले में जांच एजेंसी ने बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। विशेष जांच एजेंसी क्राइम ब्रांच ने इस मामले की गहन पड़ताल पूरी करने के बाद किश्तवाड़ की स्थानीय अदालत में 1000 से अधिक पन्नों का विस्तृत आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। इस जघन्य अपराध में कुल 15 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है, जिनकी भूमिका को अदालत में साबित करने के लिए एजेंसी ने 143 गवाहों की गवाही को चार्जशीट का मुख्य आधार बनाया है।
जांच का दायरा और घटनाक्रम की कड़ियां
क्राइम ब्रांच की टीम ने अपनी विस्तृत जांच में नाबालिग पीड़िता के साथ हुई बर्बरता की पूरी शृंखला को परत दर परत उजागर किया है। आरोप पत्र के दस्तावेजों में इस बात का सिलसिलेवार ब्योरा दिया गया है कि किस तरह नाबालिग का लगातार यौन उत्पीड़न किया गया, जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई। इसके बाद के घटनाक्रम में लड़की की बिगड़ती शारीरिक स्थिति, उसके उपचार में बरती गई आपराधिक स्तर की लापरवाही और आखिरकार उसकी जान चले जाने की परिस्थितियों को वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के जरिए जोड़ा गया है। इतना ही नहीं, चार्जशीट में इस बात के पुख्ता प्रमाण भी पेश किए गए हैं कि वारदात को छिपाने और कानूनी शिकंजे से बचने के लिए आरोपियों की ओर से किन हथकंडों का इस्तेमाल किया गया था।
चतरू थाने से क्राइम ब्रांच तक जांच का सफर
इस पूरे मामले का खुलासा 20 अगस्त 2026 को नाबालिग की मौत के बाद हुआ था। घटना की सूचना मिलते ही शुरुआत में किश्तवाड़ के चतरू पुलिस थाने में पहली प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हालांकि, अपराध की संवेदनशीलता, क्रूरता और जटिलताओं को देखते हुए मामले की फाइल स्थानीय थाने से लेकर क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दी गई। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने नए सिरे से अपनी अलग प्राथमिकी दर्ज की और पेशेवर तरीके से तफ्तीश की शुरुआत की। जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि नाबालिग की जान जाने के असली कारणों तक पहुंचा जाए और उन तमाम परिस्थितियों को स्पष्ट किया जाए, जिनके बीच यह पूरी त्रासदी घटी।
साठ दिनों में साक्ष्य संकलन और कठोर धाराएं
क्राइम ब्रांच ने समयबद्ध तरीके से काम करते हुए महज 60 दिनों के भीतर अपनी जांच को अंतिम मुकाम तक पहुंचाया। इस निर्धारित समयसीमा के भीतर जांच दल ने सभी 15 आरोपियों के खिलाफ डिजिटल, फॉरेंसिक और दस्तावेजी सबूत जुटाए। अदालत में पेश की गई इस चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के अलावा पॉक्सो कानून और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधान भी जोड़े गए हैं। जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किश्तवाड़ अदालत में यह प्राथमिक चार्जशीट दाखिल कर दी गई है, लेकिन मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। यदि जांच के दौरान कोई नया तथ्य या साक्ष्य प्रकाश में आता है, तो तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए एक पूरक चार्जशीट भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।



















