झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली 60 साल की कशिश ने अपने जीवन के साठवें पड़ाव पर एक बिल्कुल नई और साहसिक शुरुआत की है। पिछले वर्ष तक वह एक स्कूल में शिक्षिका थीं, जहाँ उन्होंने लगातार 18 वर्षों तक छात्र-छात्राओं को भौतिक विज्ञान पढ़ाया। इस लंबी शैक्षणिक सेवा के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया। उनका कहना था कि उन्हें परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियाँ संभालने के साथ-साथ खुद का कुछ स्वतंत्र काम शुरू करना था। आभूषणों के प्रति उनका लगाव बचपन से था, इसलिए उन्होंने अपनी रुचि को ही अपना नया पेशा बनाने का निर्णय लिया।
दुबई शैली से लेकर पारंपरिक भारतीय आभूषणों का संगम
कशिश मुख्य रूप से दुबई की प्रसिद्ध सोने की आभूषण शैलियों से प्रेरित होकर नए पैटर्न तैयार करती हैं और फिर कुशल कारीगरों की सहायता से उन्हें अंतिम रूप दिलवाती हैं। इसके अतिरिक्त, वह भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कलाओं को भी अपने संग्रह में शामिल करती हैं। दक्षिण भारत की मशहूर मंदिर शैली वाले आभूषण और मणकों से सजी बीड स्पेशल ज्वेलरी के डिजाइन वह स्वयं तैयार करती हैं। इनमें से कई आभूषण वह अपने हाथों से तैयार करती हैं, जबकि कुछ जटिल और बारीक नक्काशी वाले काम के लिए कारीगरों की मदद ली जाती है। व्यवसाय शुरू होने के चंद महीनों के भीतर ही ग्राहकों से बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने लगी है।
देशभर की दुर्लभ शैलियों का चयन और मौलिक प्रयोग
अपने संग्रह को विशिष्ट बनाए रखने के लिए कशिश देश के अलग-अलग कोनों की यात्रा करती हैं। विभिन्न क्षेत्रों में जाकर वह वहां की पारंपरिक और स्थानीय आभूषण शैलियों को बारीकी से देखती और चुनती हैं। यदि उन्हें लगता है कि किसी पारंपरिक पैटर्न में कुछ नयापन जोड़ा जा सकता है, तो वह उसमें अपनी मौलिक सोच मिलाकर अनूठे आभूषण तैयार करवाती हैं। उनके संग्रह में दक्षिण भारत की मंदिर डिजाइन वाली ज्वेलरी को खरीदार सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
हर महिला की पसंद को एक छत के नीचे लाने का प्रयास
कशिश का मानना है कि आभूषणों के प्रति महिलाओं का आकर्षण स्वाभाविक और गहरा होता है। किसी के पास पहले से चाहे पचास आभूषण ही क्यों न मौजूद हों, जब भी कोई बाहर निकलती हैं तो सुंदर डिजाइनों की ओर खिंची चली जाती हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने तय किया कि देश और विदेश के चुनिंदा आभूषणों को एक ही मंच पर उपलब्ध कराया जाए। दुबई की पारंपरिक सोने की ज्वेलरी में जाली डिजाइन, झालर डिजाइन और मास्क गोल्ड ज्वेलरी जैसी विविधताएं शामिल हैं, जिन्हें आम तौर पर लोग केवल वीडियो रील्स में ही देख पाते हैं। कशिश ने इन सभी डिजाइनों को ग्राहकों के लिए वास्तविक रूप में उपलब्ध कराया है।
कक्षा के ब्लैकबोर्ड से पैन इंडिया डिलीवरी तक का सफर
अध्यापन कार्य से अलग होने के बाद जीवन की इस दूसरी पारी का कशिश पूरा आनंद ले रही हैं। उनका कहना है कि उन्होंने स्कूल में कई वर्षों तक बच्चों को भौतिक विज्ञान पूरी लगन से सिखाया, लेकिन अब अपने उस पुराने शौक को जीने का वक्त था जिसे वह बरसों से दिल में संजोए बैठी थीं। इंटरनेट के जरिए उनका काम तेजी से लोगों तक पहुंच रहा है और रोजाना औसतन 10 आभूषणों के ऑनलाइन ऑर्डर मिल रहे हैं। रांची में बैठकर वह पूरे भारत में अपने इन आभूषणों की डिलीवरी कर रही हैं।



















