बिलासपुर के कंपनी गार्डन के पास स्थित एक सुलभ शौचालय अपनी अनोखी व्यवस्थाओं के चलते आम जनता के बीच खासी चर्चा बटोर रहा है। आमतौर पर सरकारी या सार्वजनिक शौचालयों का नाम सुनते ही लोगों के मन में गंदगी और खराब रखरखाव की एक नकारात्मक तस्वीर उभरती है, लेकिन यह शौचालय इस धारणा को पूरी तरह से बदल रहा है। यहां आने वाले हर व्यक्ति का स्वागत बेहद अनूठे अंदाज में किया जाता है, जो किसी फाइव स्टार होटल जैसा अनुभव कराता है। इस स्थान की स्वच्छता और प्रबंधकों का समर्पित रवैया आसपास के इलाकों में मिसाल बन गया है, जहां लोग इस सार्वजनिक सुविधा की तारीफ करते नहीं थकते।
कंपनी गार्डन के पास बने इस सुलभ परिसर की सबसे बड़ी खासियत यहां आने वालों का स्वागत करने का तरीका है। शौचालय के काउंटर पर पहुंचते ही लोगों को गुलाब का फूल भेंट किया जाता है, जिससे आगंतुकों के चेहरे पर तुरंत मुस्कान आ जाती है। सार्वजनिक शौचालयों में इस तरह का आतिथ्य सत्कार अमूमन देखने को नहीं मिलता है। प्रवेश द्वार से अंदर कदम रखते ही चमकदार फर्श, आकर्षक लाइटिंग, चारों तरफ सजे हुए गमले और एक कोने में स्थापित भगवान की मूर्तियों वाला छोटा-सा मंदिर किसी का भी ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए काफी है। यह पूरा माहौल पारंपरिक सार्वजनिक सुविधाओं से बिल्कुल हटकर एक शांत और सकारात्मक अहसास कराता है।
इस शौचालय की कमान संभालने वाले महेश जासवानी ने करीब छह महीने पहले यहां का कार्यभार संभाला था। उनके आने से पहले इस परिसर की स्थिति काफी दयनीय और खंडहर जैसी थी, जहां गंदगी का अंबार लगा रहता था। महेश जासवानी ने अपनी व्यक्तिगत मेहनत और लगन से इस पूरी तस्वीर को बदलकर रख दिया। उन्होंने दिन-रात मेहनत करके नियमित रूप से सफाई सुनिश्चित की और परिसर को सुंदर पौधों व रोशनी से सजाया। आज स्थिति यह है कि यहां आने वाले लोग इसकी व्यवस्था की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हैं और इसे देश के सबसे बेहतरीन शौचालयों में से एक करार देते हैं।
परिसर के अंदर बनाया गया छोटा-सा मंदिर इस स्थान के धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक मजबूत करता है। यहां नियमित रूप से पूजा-पाठ का आयोजन किया जाता है और कभी-कभी सुमधुर भजन भी सुनाई देते हैं। संचालक महेश जासवानी का विचार था कि वह जिस जगह पर अधिकांश समय बिताते हैं, वहां ईश्वर का वास भी होना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने मंदिर की स्थापना की और उसकी साफ-सफाई का भी खास ख्याल रखना शुरू किया। मंदिर की मौजूदगी और भक्तिमय संगीत के कारण यहां आने वाले लोगों को मानसिक शांति का अनुभव होता है, जो अन्य किसी सार्वजनिक शौचालय में सुलभ नहीं है।
स्वच्छता के साथ-साथ सुरक्षा और अनुशासित माहौल बनाए रखना भी इस परिसर की प्राथमिकता है। संचालक महेश जासवानी किसी भी प्रकार की नशेबाजी या असामाजिक गतिविधियों को यहां बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते हैं। उनके कड़े रुख और निरंतर प्रयासों के कारण महिलाएं और परिवार के लोग भी बिना किसी झिझक के इस शौचालय का उपयोग कर रहे हैं। वह लगातार लोगों से यह अपील करते हैं कि वे इस स्थान को अपना घर समझकर साफ रखें। उनका मानना है कि स्वच्छता केवल एक कर्मचारी या संचालक की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसका उपयोग करने वाले प्रत्येक नागरिक का यह नैतिक दायित्व है कि वे सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित और स्वच्छ रखें।
उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया जानने के लिए इस परिसर में एक आधुनिक रेटिंग सिस्टम भी लगाया गया है। शौचालय का उपयोग करने के बाद लोग अपनी संतुष्टि या असंतुष्टि दर्ज करा सकते हैं, जिसके लिए एक ग्रीन बटन दबाकर अपनी प्रतिक्रिया देने की व्यवस्था की गई है। इस तरह के फीडबैक मैकेनिज्म से सेवाओं के स्तर को बनाए रखने और उसमें सुधार करने में काफी मदद मिलती हाल ही में एक उपयोगकर्ता ने इसी ग्रीन बटन को दबाकर अपनी संतुष्टि जाहिर की थी। इस पारदर्शी व्यवस्था से यह सुनिश्चित होता है कि आने वाले लोगों को बेहतरीन सेवाएं मिलती रहें।
कंपनी गार्डन के पास ही अपनी दुकान चलाने वाले स्थानीय व्यापारी दीपशंकर गुप्ता ने भी इस व्यवस्था की खुलकर तारीफ की है। उनके अनुसार, यहां मिलने वाली पानी की सुविधा, शानदार लाइटिंग और बेदाग साफ-सफाई वास्तव में सराहनीय है। स्थानीय नागरिकों का भी यह मानना है कि जब से महेश जासवानी ने इस जगह की जिम्मेदारी संभाली है, तब से यहां का पूरा परिदृश्य ही बदल गया है। नियमित रखरखाव और ग्राहकों के प्रति आदरभाव के कारण यह शौचालय शहरवासियों के बीच एक आदर्श सार्वजनिक सुविधा के रूप में स्थापित हो चुका है।
इतनी सारी खूबियों के बावजूद इस सुलभ शौचालय में कुछ बुनियादी कमियां अब भी बनी हुई हैं, जिन्हें दूर करने की सख्त आवश्यकता है। संचालक महेश जासवानी ने बताया कि परिसर में कुछ नल और बेसिन टूट चुके हैं, जिन्हें ठीक कराया जाना बाकी है। इसके अलावा, लाइटिंग की कुछ अधूरी व्यवस्था को दुरुस्त करना, बड़े आकार के डस्टबिन लगवाना, नहाने के लिए नई बाल्टियों का प्रबंध करना और फिनाइल जैसी जरूरी सफाई सामग्री की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने नगर निगम से आग्रह किया है कि वे इन समस्याओं का जल्द से जल्द संज्ञान लें और आवश्यक सहायता प्रदान करें।
यदि नगर निगम द्वारा इन छोटी-मोटी कमियों को दूर कर दिया जाए और जरूरी संसाधन उपलब्ध करा दिए जाएं, तो यह सुलभ शौचालय पूरे राज्य के लिए स्वच्छता का एक बड़ा मॉडल बन सकता है। यह जगह साबित करती है कि थोड़ी सी इच्छाशक्ति, सही प्रबंधन और जनता के सहयोग से किसी भी सार्वजनिक स्थान की सूरत पूरी तरह से बदली जा सकती है। गुलाब के फूलों से स्वागत, मंदिर की घंटियों की गूंज और जगमगाती लाइटिंग के बीच यह शौचालय साबित कर रहा है कि जनसुविधाएं भी गरिमापूर्ण और सुंदर हो सकती हैं।























