सुहागिन महिलाओं के लिए हरतालिका तीज का पर्व गहरी आस्था और उत्साह का प्रतीक माना जाता है। वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए यह कठिन निर्जला व्रत रखा जाता है। सनातन परंपरा में इस उपवास को सबसे कठिन व्रतों में गिना जाता है, जहां महिलाएं करीब चौबीस घंटे तक बिना जल और अन्न के रहकर भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना करती हैं। यह पावन पर्व हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, जिस दौरान चारों तरफ उत्सव का माहौल रहता है और महिलाएं सोलह श्रृंगार कर शिव परिवार की विधि-विधान से पूजा करती हैं।
बालू और मिट्टी से होती है शिवलिंग की स्थापना
पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने वर के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी। इस दौरान उन्होंने शुद्ध मिट्टी और बालू से शिवलिंग का निर्माण कर भोलेनाथ की आराधना की थी। उनकी इस अटूट निष्ठा और कठिन साधना से संतुष्ट होकर शिवजी ने उन्हें अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था। यही वजह है कि सुहागिनों के बीच इस व्रत का विशेष स्थान है। ऐसी मान्यता है कि पूरी श्रद्धा और नियम के साथ यह उपवास करने वाली महिलाओं को पारिवारिक सुख, दांपत्य में मधुरता और सदा सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
देवघर के ज्योतिषियों की खास राय
इस बार साल 2026 में हरतालिका तीज पर एक बहुत ही खास और दुर्लभ संयोग का निर्माण हो रहा है। देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुदगल ज्योतिष केंद्र के जाने-माने ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि इस वर्ष यह व्रत 14 अगस्त को मनाया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि इसी तारीख को गणेश चतुर्थी का पर्व भी आ रहा है। एक ही दिन इन दोनों बड़े पर्वों के आने से इस बार की तीज का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है, क्योंकि इस दिन भक्त शिव-पार्वती के साथ प्रथम पूज्य भगवान गणेश का भी आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।
पूजा के लिए तय किए गए शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल के बताए अनुसार, हरतालिका तीज के दिन भक्तों के लिए कई बेहद शुभ मुहूर्त रहेंगे। सुबह की बेला में पूजा के लिए सबसे अच्छा समय सुबह 6 बजकर 05 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 06 मिनट तक निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, सुबह का ब्रह्म मुहूर्त 4 बजकर 32 मिनट से आरंभ होकर 5 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। दिन के समय में आने वाला अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक मान्य रहेगा। इन तय समय के दौरान श्रद्धालु अपने घरों और मंदिरों में विधिवत पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
व्रत के दौरान निभाई जाने वाली परंपराएं
इस पूरे अनुष्ठान में महिलाएं बिना पानी पिए उपवास रखती हैं और पूरे समर्पण के साथ भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करती हैं। इस पावन अवसर पर हाथों से बालू या शुद्ध मिट्टी की मदद से शिव-पार्वती की मूर्तियां या शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है। इस बार 14 अगस्त को तीज और गणेश चतुर्थी का एक ही दिन पड़ना इस त्योहार को और भी ज्यादा खास बना रहा है, जिससे सुहागिनों के लिए यह दिन पूजा-पाठ और आराधना का एक अनूठा अवसर साबित होगा।



















