सर्दियों का मौसम दस्तक देते ही बगीचों और बालकनी में फूलों की रौनक बढ़ाने के लिए गुलदाउदी पहली पसंद बन जाती है। अपनी मनमोहक रंग-बिरंगी पंखुड़ियों और हल्की सुगंध के साथ यह पौधा किसी भी घर के आंगन की सुंदरता में चार चांद लगा देता है। इसके बावजूद कई बागवानों को यह शिकायत रहती है कि उनके पौधे में पर्याप्त कलियां नहीं बन पा रही हैं या फूल सही समय पर नहीं खिल रहे हैं। उचित जानकारी और नियमित देखभाल के साथ इस पौधे से ठंड के पूरे मौसम में भरपूर फूल हासिल किए जा सकते हैं। बोकारो स्थित ठाकुर नर्सरी के विशेषज्ञ अभिषेक ने इस पौधे की बेहतर देखभाल से जुड़े कई व्यावहारिक तरीके साझा किए हैं।
पौधारोपण का उपयुक्त समय और छंटाई का नियम
गुलदाउदी को लगाने के लिए अगस्त का समय सबसे बेहतरीन माना जाता है। इस महीने में यदि पौधे को सही ढंग से रोपा जाए और उसकी नियमित कटाई-छंटाई की जाए, तो आगे चलकर पौधा काफी घना बनता है। अगस्त के दौरान पौधे की प्रूनिंग करने से मुख्य तने से कई नई शाखाएं फूटती हैं। जितनी अधिक शाखाएं निकलेंगी, सर्दियों के दिनों में पौधे पर उतनी ही ज्यादा कलियां विकसित होंगी। सही समय पर की गई प्रूनिंग पौधे के ढांचे को मजबूत बनाती है और उसमें भरपूर कलियां खिलने का आधार तैयार करती है।
गमले का आकार और भुरभुरी मिट्टी की आवश्यकता
पौधे के समुचित विकास में मिट्टी और गमले का चुनाव सबसे अहम भूमिका निभाता है। गुलदाउदी के लिए हमेशा ऐसी भुरभुरी मिट्टी का उपयोग करना चाहिए जिससे पानी आसानी से बाहर निकल सके। इसके रोपण के लिए लगभग आठ से 10 इंच या इससे भी बड़े आकार का गमला सबसे सही रहता है। यदि संभव हो तो मिट्टी के गमले का ही चयन करें। मिट्टी के पारंपरिक गमलों में नीचे पर्याप्त जलनिकासी छेद होते हैं, जिससे जड़ों में पानी ठहरता नहीं है और जड़ सड़न की गंभीर समस्या से बचाव होता है। गमले की मिट्टी में दलदल न बने, इसका विशेष ख्याल रखना आवश्यक है।
धूप की जरूरत और पानी देने का सही तरीका
फूलों के स्वस्थ विकास और नई कलियां बनने के लिए गुलदाउदी को भरपूर प्राकृतिक धूप की आवश्यकता होती है। गमले को हमेशा ऐसे खुले स्थान पर रखना चाहिए जहां पौधे को प्रतिदिन करीब 7 से 8 घंटे की सीधी धूप मिल सके। पर्याप्त धूप मिलने से पौधे का पोषण चक्र सही रहता है और फूल खिलने की रफ्तार तेज हो जाती है। वहीं सिंचाई के मामले में सावधानी बरतना जरूरी है। गमले में बिना सोचे-समझे रोज ज्यादा पानी डालने से बचना चाहिए। हमेशा मिट्टी की ऊपरी सतह की नमी की जांच करें और जब मिट्टी सूखी नजर आए, तभी संतुलित मात्रा में पानी दें।
कीटों से सुरक्षा और लकड़ी के सहारे का प्रबंध
गुलदाउदी के पौधे पर फंगस और ब्लैक एफिड जैसे हानिकारक कीटों का हमला देखने को मिल सकता है। ये कीट नई मुलायम शाखाओं और पत्तियों का रस चूसकर पौधे को कमजोर कर देते हैं। इससे बचने के लिए पत्तियों की नियमित जांच करते रहें और कीटों का लक्षण दिखते ही नीम के तेल के घोल का छिड़काव करें। इसके अलावा कलियों के न खिलने की मुख्य वजह गलत समय पर की गई प्रूनिंग और जरूरत से ज्यादा खाद या पानी देना होता है। जब पौधे पर अधिक मात्रा में कलियां आने लगें, तो उनके भारी वजन से टहनियों के झुकने या टूटने का खतरा रहता है। ऐसे में पौधे के चारों तरफ लकड़ी या पतली डंडियों का सहारा तैयार करना चाहिए। यह सपोर्ट शाखाओं को व्यवस्थित रखता है, पौधे को सघन बनाता है और तेज विकास में सहायता प्रदान करता है।



















