झारखंड के व्यस्त सड़क मार्गों पर सफर करने वाले मुसाफिरों के लिए बूढ़ई बाजार का पारंपरिक नाश्ता एक प्रमुख पड़ाव बन चुका है। यहां के बाजार में मिलने वाला देसी खानपान अपने अनोखे स्वाद और किफायती दाम के कारण दूर-दराज के यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। रास्ते से होकर निकलने वाले अधिकांश लोग बिना इस खास नाश्ते का स्वाद चखे आगे नहीं बढ़ते, जिससे यह इस पूरे इलाके की खानपान संस्कृति का अहम हिस्सा बन गया है।
स्वाद का अनोखा मेल और थाली की तैयारी
इस नाश्ते को तैयार करने का तरीका बेहद दिलचस्प और पारंपरिक है। दुकानदार एक चौड़ी प्लेट में सबसे पहले हल्की और कुरकुरी मुड़ी डालते हैं, जिसके ऊपर गर्मागर्म घुघनी की रसदार सब्जी परोसी जाती है। इसके बाद स्वाद को कई गुना बढ़ाने के लिए इसमें सूखा चूड़ा, क्रिस्पी चॉप, तली हुई पकौड़ी और एक समोसा मिलाया जाता है। इन सभी नमकीन और कुरकुरी चीजों का मिश्रण हर निवाले में अलग-अलग बनावट और स्वाद का अनुभव कराता है। इस तरह एक ही थाली में मीठे-तीखे और चटपटे मसालों का संतुलित मेल ग्राहकों को भरपूर तृप्ति देता है।
महंगाई में भी 20 से 50 रुपये में पेट भरने का विकल्प
वर्तमान समय में जब बाहर का खानपान लगातार महंगा होता जा रहा है, तब भी यह देसी नाश्ता बेहद किफायती दरों पर उपलब्ध है। ग्राहक अपनी भूख और जरूरत के अनुसार 20 से 50 रुपये के बीच भरपेट नाश्ता ले सकते हैं। कम कीमत में भरपूर मात्रा मिलने के कारण न सिर्फ आसपास के निवासी, बल्कि लंबी दूरी का सफर तय करने वाले मुसाफिर भी यहां नियमित रूप से रुकते हैं। बूढ़ई के स्थानीय निवासी संतोष दास का कहना है कि वह पिछले करीब 15 वर्षों से लगातार इस नाश्ते का स्वाद ले रहे हैं। उनका मानना है कि मुड़ी, घुघनी, चूड़ा, चॉप, पकौड़ी और समोसे का यह संयोजन ऐसा लाजवाब स्वाद पैदा करता है कि जो व्यक्ति एक बार इसे चख लेता है, वह बार-बार यहां खिंचा चला आता है। इसी वजह से इन दुकानों पर सुबह से लेकर शाम तक ग्राहकों की कतारें देखने को मिलती हैं।
देवघर, गिरिडीह और रांची मार्ग पर मुसाफिरों का ठिकाना
यह बाजार भौगोलिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है। देवघर, गिरिडीह और रांची को आपस में जोड़ने वाली इस सड़क से प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। लंबी यात्रा पर निकले चालक और यात्री बूढ़ई बाजार में अपनी गाड़ी रोकते हैं और गरम चाय के साथ इस खास नाश्ते का लुत्फ उठाते हैं। इसके अतिरिक्त, देवघर में मंदिर दर्शन के लिए विभिन्न राज्यों से पहुंचने वाले श्रद्धालु भी अपनी यात्रा के दौरान यहां अल्पाहार के लिए ठहरते हैं। किफायती दाम, शुद्ध देसी जायके और पेट भरने वाली मात्रा ने इस साधारण सी दिखने वाली नाश्ते की प्लेट को बूढ़ई कस्बे की सबसे बड़ी पहचान बना दिया है।



















