दीपावली और ठंड के दिनों में इन शुभ पौधों से सजाएं अपना घर, आसान देखभाल में रहेंगे तरोताजाजवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में दिलजीत दोसांझ का लाइव कॉन्सर्ट, हिट गानों की मांग के बीच विवादित ट्रैक्स पर टिकी नजरेंतिमाही नतीजों में चमकी जियो प्लेटफॉर्म्स, शुद्ध मुनाफे में दर्ज हुई 14 फीसदी की बढ़तग्रेटर नोएडा के पंजाब नेशनल बैंक में 10.24 करोड़ रुपये की वित्तीय हेराफेरी, केंद्रीय जांच ब्यूरो ने संभाली पड़तालकोटा के औद्योगिक नाले में मगरमच्छों की त्वचा पड़ी सफेद, जहरीले कचरे से चंद्रलोई नदी पर गहराया संकटउत्तर प्रदेश में सुरक्षाकर्मियों पर हमले का षड्यंत्र बेनकाब, तीन संदिग्ध पकड़े गएस्पेन में भीषण ट्रेन हादसे के बाद परिवहन मंत्री ऑस्कर पुएंते का इस्तीफा देने से इनकारग्रेनोला ने पेश किया नया डिक्टेशन टूल, विस्पर को मिलेगी सीधी टक्करघर पर तैयार करें पारंपरिक मिथिला शैली का देसी मटन, खड़े मसालों का ताजा पेस्ट देगा खास जायकाबोस के नए ओपन ईयरबड्स क्या दौड़ने और दफ्तर के लिए सही हैं
झारखंड के बूढ़ई बाजार में 20 से 50 रुपये में मिलता है खास देसी नाश्ता, मुड़ी-घुघनी और समोसे का अनोखा मेलझारखंड
30 अक्तू॰ 2026, 8:36 pm (16 मिनट पहले)· 0

झारखंड के बूढ़ई बाजार में 20 से 50 रुपये में मिलता है खास देसी नाश्ता, मुड़ी-घुघनी और समोसे का अनोखा मेल

देवघर-गिरिडीह मार्ग पर स्थित बूढ़ई बाजार का पारंपरिक नाश्ता राहगीरों और श्रद्धालुओं की पहली पसंद बना हुआ है, जहां 20 से 50 रुपये में भरपेट थाली परोसी जाती है।

झारखंड के व्यस्त सड़क मार्गों पर सफर करने वाले मुसाफिरों के लिए बूढ़ई बाजार का पारंपरिक नाश्ता एक प्रमुख पड़ाव बन चुका है। यहां के बाजार में मिलने वाला देसी खानपान अपने अनोखे स्वाद और किफायती दाम के कारण दूर-दराज के यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। रास्ते से होकर निकलने वाले अधिकांश लोग बिना इस खास नाश्ते का स्वाद चखे आगे नहीं बढ़ते, जिससे यह इस पूरे इलाके की खानपान संस्कृति का अहम हिस्सा बन गया है।

स्वाद का अनोखा मेल और थाली की तैयारी

इस नाश्ते को तैयार करने का तरीका बेहद दिलचस्प और पारंपरिक है। दुकानदार एक चौड़ी प्लेट में सबसे पहले हल्की और कुरकुरी मुड़ी डालते हैं, जिसके ऊपर गर्मागर्म घुघनी की रसदार सब्जी परोसी जाती है। इसके बाद स्वाद को कई गुना बढ़ाने के लिए इसमें सूखा चूड़ा, क्रिस्पी चॉप, तली हुई पकौड़ी और एक समोसा मिलाया जाता है। इन सभी नमकीन और कुरकुरी चीजों का मिश्रण हर निवाले में अलग-अलग बनावट और स्वाद का अनुभव कराता है। इस तरह एक ही थाली में मीठे-तीखे और चटपटे मसालों का संतुलित मेल ग्राहकों को भरपूर तृप्ति देता है।

ये भी पढ़ें

महंगाई में भी 20 से 50 रुपये में पेट भरने का विकल्प

वर्तमान समय में जब बाहर का खानपान लगातार महंगा होता जा रहा है, तब भी यह देसी नाश्ता बेहद किफायती दरों पर उपलब्ध है। ग्राहक अपनी भूख और जरूरत के अनुसार 20 से 50 रुपये के बीच भरपेट नाश्ता ले सकते हैं। कम कीमत में भरपूर मात्रा मिलने के कारण न सिर्फ आसपास के निवासी, बल्कि लंबी दूरी का सफर तय करने वाले मुसाफिर भी यहां नियमित रूप से रुकते हैं। बूढ़ई के स्थानीय निवासी संतोष दास का कहना है कि वह पिछले करीब 15 वर्षों से लगातार इस नाश्ते का स्वाद ले रहे हैं। उनका मानना है कि मुड़ी, घुघनी, चूड़ा, चॉप, पकौड़ी और समोसे का यह संयोजन ऐसा लाजवाब स्वाद पैदा करता है कि जो व्यक्ति एक बार इसे चख लेता है, वह बार-बार यहां खिंचा चला आता है। इसी वजह से इन दुकानों पर सुबह से लेकर शाम तक ग्राहकों की कतारें देखने को मिलती हैं।

देवघर, गिरिडीह और रांची मार्ग पर मुसाफिरों का ठिकाना

यह बाजार भौगोलिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है। देवघर, गिरिडीह और रांची को आपस में जोड़ने वाली इस सड़क से प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। लंबी यात्रा पर निकले चालक और यात्री बूढ़ई बाजार में अपनी गाड़ी रोकते हैं और गरम चाय के साथ इस खास नाश्ते का लुत्फ उठाते हैं। इसके अतिरिक्त, देवघर में मंदिर दर्शन के लिए विभिन्न राज्यों से पहुंचने वाले श्रद्धालु भी अपनी यात्रा के दौरान यहां अल्पाहार के लिए ठहरते हैं। किफायती दाम, शुद्ध देसी जायके और पेट भरने वाली मात्रा ने इस साधारण सी दिखने वाली नाश्ते की प्लेट को बूढ़ई कस्बे की सबसे बड़ी पहचान बना दिया है।

सवाल-जवाब

बूढ़ई बाजार का यह देसी नाश्ता कहां मिलता है?
यह नाश्ता झारखंड के बूढ़ई बाजार में मिलता है, जो देवघर, गिरिडीह और रांची को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित है।
इस नाश्ते की एक प्लेट में कौन-कौन सी चीजें मिलाई जाती हैं?
इस प्लेट में मुड़ी, गर्मागर्म घुघनी की सब्जी, चूड़ा, कुरकुरा चॉप, पकौड़ी और एक समोसा मिलाकर परोसा जाता है।
बूढ़ई बाजार में इस नाश्ते की कीमत कितनी है?
यह भरपेट नाश्ता दुकानों पर 20 रुपये से लेकर 50 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध है।
स्थानीय ग्राहक इस नाश्ते को कितने समय से पसंद कर रहे हैं?
स्थानीय निवासी संतोष दास के अनुसार, वह पिछले करीब 15 वर्षों से नियमित रूप से इस खास नाश्ते का स्वाद ले रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp