घर की छत या बालकनी में कमल का पौधा उगाना अब शौकीन लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। नर्सरी एक्सपर्ट अभिषेक के मुताबिक, कमल का पौधा बीज और कंद यानी ट्यूबर दोनों माध्यमों से तैयार किया जा सकता है। हालांकि, जो लोग गार्डनिंग की शुरुआत कर रहे हैं, उनके लिए कंद से पौधा लगाना ज्यादा आसान और असरदार विकल्प साबित होता है। कमल के बीज का बाहरी आवरण बहुत सख्त होता है, जिसकी वजह से इसके अंकुरण में लंबा समय लग जाता है। यदि सही प्रक्रिया की जानकारी न हो, तो पौधे का विकास रुक भी सकता है। इसके विपरीत, एक स्वस्थ कंद का इस्तेमाल करने से सीधे शुरुआती अंकुरण के झंझट से छुटकारा मिल जाता है और पौधे की ग्रोथ तेजी से शुरू होती है।
गमले का चुनाव और धूप की जरूरत
कमल का पौधा लगाने के लिए सामान्य फूलों वाले गमलों के बजाय हमेशा चौड़े और गहरे टब या बड़े साइज के बर्तनों का चयन करना चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बर्तन में पानी ठहरने के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए और उसके निचले हिस्से में पानी निकासी के लिए कोई छेद नहीं होना चाहिए ताकि जड़ों के आसपास नमी और पानी लगातार बना रहे। इसके अलावा, कमल के पौधे को घर की ऐसी जगह पर रखना बेहद जरूरी है जहां दिनभर में कम से कम 6 घंटे की सीधी और तेज धूप मिल सके। पर्याप्त मात्रा में धूप मिलने से पौधे का संपूर्ण विकास बेहतर तरीके से होता है और उस पर सुंदर फूल खिलने में मदद मिलती है.
मिट्टी और खाद तैयार करने का सही तरीका
कमल के पौधे के लिए कीचड़नुमा भारी मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। पौधे के लिए जब आप मिट्टी तैयार कर रहे हों, तब उसमें 50 प्रतिशत सामान्य मिट्टी और 50 प्रतिशत वर्मी कंपोस्ट का संतुलित मिश्रण इस्तेमाल करना चाहिए। पौधे की बेहतर बढ़त और फूलों के विकास के लिए समय-समय पर खाद देना जरूरी होता है, लेकिन इसे बहुत सावधानी के साथ इस्तेमाल करना चाहिए। खाद को सीधे मिट्टी में डालने के बजाय एक सूती कपड़े में अच्छी तरह लपेटकर मिट्टी के एक से दो इंच नीचे गहराई में दबा देना चाहिए। इससे खाद के पोषक तत्व धीरे-धीरे पानी में घुलते हैं और कमल के पौधे को किसी भी तरह का सीधा नुकसान नहीं पहुंचता है.
सर्दियों में रखें खास सावधानी
सर्दियों के मौसम में तापमान कम होने के कारण कमल के पौधे की ग्रोथ या बढ़त की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। ऐसे मौसम में पौधे को जरूरत से ज्यादा खाद देने से पूरी तरह बचना चाहिए। कम तापमान के दौरान जब पौधे की सक्रियता कम हो जाती है, तब अधिक खाद डालने से पानी की गुणवत्ता खराब हो सकती है और नीचे दबे कंद को सड़ने या नुकसान पहुंचने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा मौसम के मिजाज और पौधे की शारीरिक स्थिति को अच्छी तरह परखने के बाद ही खाद का उपयोग करना चाहिए.
रोग से बचाव और साफ-सफाई
कमल के पौधे की पत्तियों पर यदि किसी भी तरह के काले धब्बे, सड़न या फंगस जैसी बीमारियां नजर आएं, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। इसके लिए पौधे की खराब हो चुकी पत्तियों को हाथों-हाथ हटा देना समझदारी होती है। इसके अलावा, पानी के अंदर सड़ने वाले पत्तों या अन्य कचरे को बर्तन में जमा न होने दें। लंबे समय तक पानी को एक ही जगह स्थिर न रहने दें और नियमित अंतराल पर उसे बदलते रहें, क्योंकि बहुत दिनों तक खड़े पानी में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ने लगता है जो सेहत के लिए भी हानिकारक हो सकता है.





















