सर्दियों के महीनों में पशुपालकों के लिए नवजात बछड़ों और बाछियों का रखरखाव एक बेहद संवेदनशील कार्य बन जाता है। इस मौसम में देखभाल की अनदेखी या ठंड से बचाव के सही इंतज़ाम न होने पर बछड़े कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इनमें सबसे ख़तरनाक बीमारी दस्त यानी काफ स्कोर्स है, जो समय पर इलाज न मिलने पर नवजात पशुओं की जान तक ले सकती है। बोकारो स्थित चास पेट क्लिनिक की पशु चिकित्सक डॉ दीप्ति मिंज ने इस बीमारी के कारण, लक्षण और इससे बचाव के आवश्यक उपायों पर विस्तृत जानकारी साझा की है।
जन्म के शुरुआती 30 दिन क्यों होते हैं सबसे नाजुक?
पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के पहले दिन से लेकर 30 दिन तक की उम्र नवजात बछड़ों के लिए सबसे संवेदनशील मानी जाती है। इसी अवधि के दौरान उनमें काफ स्कोर्स होने की संभावना सबसे अधिक रहती है। इसका मुख्य कारण जन्म के तुरंत बाद बछड़े को मां का पहला दूध यानी खीस (कोलोस्ट्रम) पर्याप्त मात्रा में न मिलना है। खीस केवल पोषण का माध्यम नहीं है, बल्कि इसमें भरपूर मात्रा में एंटीबॉडी और आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण करते हैं।
यदि बछड़े को जन्म के तुरंत बाद पर्याप्त खीस नहीं दी जाती है, तो उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर रह जाती है। ऐसी स्थिति में वह ई कोलाई जैसे हानिकारक बैक्टीरिया और रोटावायरस जैसे घातक वायरस के संक्रमण की चपेट में आसानी से आ जाता है। ये सूक्ष्मजीव पाचन तंत्र पर हमला कर तीव्र दस्त पैदा करते हैं, जो सही समय पर नियंत्रित न होने पर स्थिति को गंभीर बना देते हैं।
अत्यधिक दूध पिलाना और खान-पान से जुड़ी गलतियां
संक्रमण के अलावा, नवजात बछड़ों के खान-पान का तरीका भी पाचन संबंधी समस्याओं को जन्म दे सकता है। आवश्यकता से अधिक दूध पिला देना या दूध पिलाने की गलत तकनीक भी दस्त की एक बड़ी वजह बनती है। नवजात बछड़े का पेट बहुत छोटा और कोमल होता है, इसलिए उसे एक सीमित और सही मात्रा में ही दूध की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त, बाड़े की गंदगी, असंतुलित पोषण और अनुचित रखरखाव भी काफ स्कोर्स के संक्रमण को बढ़ावा देते हैं। किसी भी संशय की स्थिति में तुरंत किसी योग्य पशु चिकित्सक की सलाह लेना अत्यंत आवश्यक है।
पहचानें काफ स्कोर्स के प्रमुख लक्षण
पशुपालक अपने बाड़े में मौजूद नवजात बछड़ों की गतिविधियों पर पैनी नज़र रखकर बीमारी को शुरुआती अवस्था में ही पहचान सकते हैं। काफ स्कोर्स की स्थिति में बछड़ों में कई स्पष्ट लक्षण नज़र आने लगते हैं
- पतला या पीला दस्त: बछड़े को अचानक पानी जैसा पतला या पीले रंग का दस्त शुरू हो जाता है।
- शारीरिक कमजोरी: बीमारी के कारण बछड़ा सुस्त पड़ जाता है और उसे उठने-बैठने या चलने में परेशानी होने लगती है।
- आंखों का धंसना: लगातार दस्त होने से शरीर में डिहाइड्रेशन बढ़ता है, जिससे बछड़े की आंखें अंदर की ओर धंसने लगती हैं।
- मल में खून आना: बीमारी की गंभीर अवस्था में मल के साथ खून की पंक्तियां या धब्बे दिखाई देने लगते हैं।
- शरीर में लवण की कमी: अत्यधिक दस्त से शरीर में पानी और आवश्यक लवण तेजी से कम हो जाते हैं, जो तुरंत उपचार न मिलने पर मृत्यु का कारण बन सकते हैं।
काफ स्कोर्स और डिसेंट्री में अंतर समझना जरूरी
अक्सर पशुपालक काफ स्कोर्स और डिसेंट्री (पेचिश) को एक ही बीमारी समझ लेते हैं, जबकि दोनों में स्पष्ट अंतर है। डॉ दीप्ति मिंज के अनुसार, काफ स्कोर्स विशेष रूप से 30 दिन तक के नवजात बछड़ों में होने वाली दस्त की समस्या को कहा जाता है। दूसरी तरफ, डिसेंट्री या पेचिश की बीमारी किसी भी उम्र की गाय, बैल या बड़े मवेशियों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए दोनों स्थितियों के उपचार का तरीका और दवाएं अलग होती हैं।
बचाव के आसान और असरदार उपाय
नवजात बछड़ों को काफ स्कोर्स जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए पशुपालकों को कुछ बुनियादी सावधानियां बरतनी चाहिए
- समय पर खीस पिलाना: जन्म के तुरंत बाद बछड़े को मां का पहला दूध यानी खीस अवश्य पिलाएं ताकि उसकी प्रतिरक्षा क्षमता मजबूत हो सके।
- साफ और सूखा स्थान: बछड़े को जिस स्थान पर रखा जाए, वह पूरी तरह से साफ, सूखा और हवादार होना चाहिए। नमी और गंदगी कीटाणुओं को पनपने का मौका देती है।
- नियमित निगरानी: यदि नवजात बछड़ा सुस्त लगे, दूध पीने से इंकार करे या उसे पतला दस्त हो, तो बिना देर किए नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
- डिहाइड्रेशन से बचाव: दस्त शुरू होते ही शरीर में पानी और लवणों का संतुलन बनाए रखने के लिए चिकित्सकीय निर्देशानुसार तरल पदार्थ देना प्रारंभ करें।



















