सिरोही जिले में होने वाले आगामी पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासन की तरफ से विभिन्न विभागों के साथ-साथ पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों को भी चुनावी कार्यों में तैनात किया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत जिलेभर से विभाग के लगभग 100 कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी सौंपी गई है, जिनमें तकनीकी स्टाफ भी शामिल है। इस स्थिति के चलते ग्रामीण इलाकों के कई पशु चिकित्सा उप केंद्रों और अस्पतालों में कामकाज पर असर पड़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है। पूर्व के चुनावों के दौरान भी जब इन कर्मचारियों को चुनावी मैदान में उतारा गया था, तब कई पशुपालकों को अपने बीमार मवेशियों के लिए समय पर चिकित्सीय सहायता हासिल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। उस समय कुछ स्थानों से इलाज के अभाव में पशुओं की मौत होने की खबरें भी सामने आई थीं।
बीमार मवेशियों के इलाज का संकट और पुरानी घटनाएं
आबूरोड क्षेत्र के किवरली गांव के रहने वाले पशुपालक गणपत सिंह के साथ पिछली बार चुनाव के दौरान एक गंभीर घटना घटी थी। उनके पशु के बीमार पड़ने पर जब वे इलाज की आस में पहुंचे, तो संबंधित पशु चिकित्साकर्मी की चुनाव ड्यूटी लगी होने के कारण जानवर को समय पर उपचार नहीं मिल सका, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इस तरह की गंभीर समस्याओं को लेकर जब जमीनी स्तर पर पड़ताल की गई, तो सांतपुर गांव के पशुपालक पीराराम देवासी और वाघाराम देवासी ने अपनी पीड़ा खुलकर साझा की। उन्होंने बताया कि चुनाव के समय विभाग के कर्मचारियों को पोलिंग ड्यूटी पर भेज दिए जाने से मवेशियों के इलाज और देखभाल से जुड़े अन्य जरूरी कार्यों में भारी बाधा आती है। पिछली बार भी उन्हें इसी तरह की पेरशानियों से जूझना पड़ा था। स्थानीय पशुपालकों की सरकार से यह पुरजोर मांग है कि पशु चिकित्सा सेवा से जुड़े अमले को चुनाव कार्य से पूरी तरह मुक्त रखा जाए, ताकि किसी भी स्थिति में बेजुबान जानवरों का उपचार प्रभावित न हो सके।
जिला प्रशासन और पशुपालक संघ की दखल
इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रीय पशुपालक संघ सिरोही के जिलाध्यक्ष सवाराम देवासी ने भी आवाज उठाई है और सिरोही जिला कलक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट मांग की है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान जिले के तमाम पशु चिकित्सालयों में पशु चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए। सवाराम देवासी का कहना है कि अस्पतालों से कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी पर भेजने से पशुओं के इलाज की व्यवस्था बुरी तरह चरमरा सकती है। सिरोही जिले के ग्रामीण अंचलों में पशुपालन ही आम जनता की आजीविका का मुख्य और सबसे मजबूत आधार है। ऐसे हालात में जब पशुओं के बीमार पड़ने, चोटिल होने या किसी भी तरह की आपातकालीन चिकित्सीय जरूरत आन पड़े, तो समय पर उपचार मिलना निहायत जरूरी हो जाता है।
कर्मचारी संघ का विरोध और चुनाव आयोग के नियमों का हवाला
दूसरी तरफ, विभाग के तकनीकी कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी लगाए जाने का विरोध राजस्थान पशु चिकित्सा कर्मचारी संघ ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए दर्ज कराया है। संघ के सिरोही जिलाध्यक्ष शंकरलाल और जिला मंत्री गोपालकृष्ण उपाध्याय ने जिला कलक्टर से मुलाकात कर पशुधन निरीक्षक, पशुधन प्रसार अधिकारी और वरिष्ठ पशुधन प्रसार अधिकारी पदों पर तैनात कार्मिकों को चुनाव ड्यूटी से पूरी तरह मुक्त करने की मांग रखी। अपने इस ज्ञापन में उन्होंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राजस्थान के 22 जून 2023 के परिपत्र का विशेष हवाला दिया है। इस परिपत्र में यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पशु चिकित्सालयों में कार्यरत डॉक्टरों और कंपाउंडरों को चुनाव ड्यूटी से अलग रखा जाना चाहिए। जानकारों का तर्क है कि पशुओं में फैलने वाले संक्रामक रोगों की रोकथाम, सघन टीकाकरण अभियान, कृत्रिम गर्भाधान और हरसंभव आपातकालीन उपचार जैसी जरूरी सेवाएं लगातार जारी रहना बेहद आवश्यक है, जो कर्मचारियों की गैरमौजूदगी में बाधित हो सकती हैं।



















