राजस्थान सरकार अपने सार्वजनिक परिवहन तंत्र और सड़क सुरक्षा ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए व्यापक स्तर पर सुधार कर रही है। प्रदेश में वाहन चालकों की दक्षता जांचने से लेकर आम मुसाफिरों के सफर को सुगम बनाने तक, कई अहम परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है। राज्य में कुल 35 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें पूरी तरह ऑटोमेटेड बनाया जाना है। इनमें से 23 स्थानों पर यह स्वचालित व्यवस्था पहले ही शुरू होकर सुचारू रूप से काम करने लगी है। नई व्यवस्था लागू होने से ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में मानवीय दखल खत्म होगा और सेंसर व कैमरों के जरिए निष्पक्ष मूल्यांकन संभव हो सकेगा।
सड़क पर उतरने वाले नए चालकों की योग्यता परखने के साथ-साथ राज्य परिवहन व्यवस्था के बुनियादी ढांचे को भी नया रूप दिया जा रहा है। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के बेड़े को मजबूत करने के लिए करीब 900 नई बसों को जोड़ने की योजना अब अपने आखिरी दौर में पहुंच चुकी है। इन बसों के आने से न केवल लंबे और ग्रामीण रूटों पर बसों की कमी दूर होगी, बल्कि यात्रियों को आधुनिक और आरामदायक सफर का विकल्प भी मिलेगा।
सेंसर आधारित 35 ट्रैक से परखी जाएगी ड्राइविंग दक्षता
सड़क हादसों में कमी लाने और सुरक्षित ड्राइविंग संस्कृति विकसित करने के मकसद से राज्य के सभी 35 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक को तकनीक से जोड़ा जा रहा है। अब तक 23 प्रमुख केंद्रों पर ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पूरी तरह सक्रिय किए जा चुके हैं, जबकि शेष 12 केंद्रों पर काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। पारंपरिक व्यवस्था में अक्सर परीक्षक के व्यक्तिगत निर्णय पर निर्भरता रहती थी, लेकिन इस स्वचालित प्रणाली में सेंसर, हाई-डेफिनिशन कैमरे और कंप्यूटर आधारित एल्गोरिदम आवेदक के ड्राइविंग कौशल का सटीक विश्लेषण करते हैं।
इस आधुनिक प्रणाली का मुख्य उद्देश्य ड्राइविंग परीक्षा में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना और किसी भी तरह की धांधली या मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश को समाप्त करना है। वाहन को रिवर्स करने, ढलान पर रोकने, आठ के आकार में मोड़ने और आपातकालीन ब्रेक लगाने जैसे कठिन परीक्षणों का मूल्यांकन पूरी तरह कंप्यूटर स्क्रीन पर दर्ज होता है। निर्धारित मानकों पर खरा उतरने वाले आवेदकों को ही ड्राइविंग लाइसेंस मिल सकेगा, जिससे अकुशल चालकों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी।
रोडवेज बेड़े में शामिल होंगी 900 अत्याधुनिक बसें
राजस्थान रोडवेज की परिवहन क्षमता को विस्तार देने और पुरानी खटारा बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए करीब 900 नई बसें बेड़े में लाई जा रही हैं। यह पूरी खरीद प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है और जल्द ही ये बसें सड़कों पर दौड़ती नजर आएंगी। इस नए बेड़े में विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों की जरूरतों का विशेष ख्याल रखा गया है, जिसमें आधुनिक वातानुकूलित बसें, सामान्य दूरी के लिए ब्लू लाइन बसें और पर्यावरण के अनुकूल चलने वाली इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गई हैं।
इलेक्ट्रिक बसों को सार्वजनिक सेवा में उतारने से राज्य में हरित ऊर्जा और प्रदूषण मुक्त परिवहन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। वहीं, दूरदराज के क्षेत्रों और अंतरराज्यीय मार्गों पर ब्लू लाइन और एसी बसों के संचालन से दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और पर्यटकों को सुरक्षित, समयबद्ध और आरामदायक परिवहन सेवा मिल सकेगी। इससे रोडवेज की आमदनी में सुधार होने के साथ-साथ निजी ऑपरेटरों पर यात्रियों की निर्भरता भी घटेगी।
अजमेर, कोटा और उदयपुर समेत कई जिलों में सुधरेंगे बस स्टैंड
सड़कों और बसों के साथ-साथ यात्री सुविधाओं के प्रमुख केंद्र यानी बस स्टैंडों के पुनर्विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अजमेर, भरतपुर, दूदू, कोटा, उदयपुर और अलवर सहित कई प्रमुख जिला मुख्यालयों और कस्बों में आधुनिक बस स्टैंडों के निर्माण और पुराने भवनों के जीर्णोद्धार का काम प्रगति पर है। कई स्थानों पर वर्षों पुराने बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तोड़कर नए सिरे से तैयार किया जा रहा है, ताकि बढ़ते यात्री दबाव को संभाला जा सके।
इन बस स्टैंडों पर यात्रियों की सहूलियत के लिए आधुनिक प्रतीक्षालय, साफ-सुथरे प्रसाधन, इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड, सुगम टिकट काउंटर और बसों के व्यवस्थित आवागमन के लिए चौड़े प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं। अलवर, कोटा और उदयपुर जैसे पर्यटन व औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरों में बेहतर बस टर्मिनल बनने से स्थानीय व्यापार और आवागमन को नई गति मिलेगी।
सड़क सुरक्षा और जनसुविधाओं पर केंद्रित एकीकृत रणनीति
राजस्थान में परिवहन सुधारों की यह पूरी कवायद एक एकीकृत दृष्टिकोण के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। एक तरफ जहां ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक के माध्यम से लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सख्त और पारदर्शी बनाकर सड़कों को सुरक्षित करने का प्रयास हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ 900 नई बसों और आधुनिक टर्मिनलों के जरिए सार्वजनिक परिवहन को आम नागरिक के लिए पहली पसंद बनाने पर जोर है। जब सुरक्षित चालक, आधुनिक बसें और सुविधाजनक बस स्टैंड एक साथ काम करेंगे, तो प्रदेश की परिवहन व्यवस्था राष्ट्रीय स्तर पर एक मानक स्थापित करेगी।




















