देवघर में आलू की खेती करने वाले किसान अगर इस सीजन में बंपर पैदावार हासिल करना चाहते हैं, तो केवल खेत की जुताई पर ही ध्यान केंद्रित करना काफी नहीं माना जाता है। खेत में बुवाई के लिए किस तरह के बीज का इस्तेमाल किया जा रहा है, इस बात की जानकारी होना भी उतना ही आवश्यक होता है। कई बार किसान बीज खरीदते समय उसकी गुणवत्ता को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका सीधा और नकारात्मक असर फसल के कुल उत्पादन पर देखने को मिल सकता है। ऐसे में आलू की बुवाई का काम शुरू करने से पहले कुछ बुनियादी बातों का विशेष तौर पर ध्यान रखना बहुत जरूरी हो जाता है। देवघर की कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा का कहना है कि आलू की उत्कृष्ट पैदावार के लिए खेत तैयार करने से लेकर सही बीज चुनने तक हर चरण में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। किसानों को विशेष रूप से बीमार या खराब बीजों का प्रयोग करने से बचना चाहिए, क्योंकि एक स्वस्थ बीज ही हमेशा अच्छी फसल की मजबूत बुनियाद बनता है।
खेत की सही तैयारी और मिट्टी की स्थिति
अंबिका कुशवाहा ने जानकारी दी है कि जब भी किसान आलू की फसल उगाने की योजना बनाएं, तो उन्हें सबसे पहले अपने खेत को पूरी तरह तैयार कर लेना चाहिए। खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाकार उसकी गहरी जुताई करनी चाहिए, ताकि मिट्टी एकदम भुरभुरी हो जाए। खेत की मिट्टी के भुरभुरी रहने से आलू के कंदों के प्राकृतिक विकास के लिए बेहद अनुकूल परिस्थितियां पैदा होती हैं। इसलिए बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में खेत तैयार करके सीधे बुवाई करने के बजाय मिट्टी की सेहत पर पूरा ध्यान देना अनिवार्य है। खेत में खाद डालने और उसकी जुताई करने के बाद उसकी स्थिति का मुआयना करना चाहिए, ताकि बाद में बुवाई के समय कंदों के बढ़ने में किसी भी तरह की रुकावट न आए।
स्वस्थ बीज का चयन और गुणवत्ता की पहचान
खेत को ठीक से तैयार करने के बाद सबसे अहम काम सही आलू के बीज का चुनाव करना होता है। कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा के मुताबिक, किसानों को हमेशा रोगमुक्त और स्वस्थ बीज का ही चयन करना चाहिए। यदि बीज के ऊपर किसी भी बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं या वह अंदर से सड़ा हुआ है, तो ऐसे बीज को खेत में भूलकर भी नहीं लगाना चाहिए। कई बार किसान कम दाम के चक्कर में बाजार से बेहद खराब गुणवत्ता वाला बीज खरीद लेते हैं, लेकिन इस तरह की लापरवाही से आगे चलकर फसल बर्बाद होने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। इसलिए बीज की खरीदारी करते समय सिर्फ उसकी कीमत देखने के बजाय उसकी क्वालिटी को प्राथमिकता देनी चाहिए। हमेशा किसी भरोसेमंद और प्रमाणित स्रोत से ही बीज खरीदना चाहिए और उसकी सही किस्म की पूरी जानकारी भी जरूर प्राप्त कर लेनी चाहिए।
बीज के आकार और आंखों की जांच
बाजार से बीज खरीदते समय उसके आकार और उसकी आंखों पर भी बारीकी से ध्यान देना जरूरी होता है। अंबिका कुशवाहा बताती हैं कि आलू का बीज चुनते समय उसके साइज का अच्छी तरह मुआयना करना चाहिए। उनके अनुसार, बीज की आंखें हमेशा अंदर की तरफ धंसी हुई होनी चाहिए और कंद पूरी तरह स्वस्थ दिखना चाहिए। हालांकि, केवल उसके आकार या आंखों को देखकर ही बीज की गुणवत्ता का सौ फीसदी फैसला नहीं किया जा सकता है। किसानों को यह भी गहराई से देखना चाहिए कि कंद में किसी प्रकार की सड़न, अजीबोगरीब धब्बे या अन्य बीमारियों के दूसरे संकेत तो मौजूद नहीं हैं। बीज की सही किस्म और उसकी गुणवत्ता के बारे में पूरी जानकारी जुटाने के बाद ही खरीदारी करनी चाहिए, ताकि फसल बोने के बाद किसी फालतू की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बुवाई से पहले बीज का उपचार
अंबिका कुशवाहा ने एक और बेहद अहम बात साझा करते हुए बताया कि आलू की बुवाई का काम शुरू करने से पहले बीज का उपचार यानी ट्रीटमेंट करना अनिवार्य है। बीज के उपचार का सही तरीका हमेशा बीमारी के प्रकार और बाजार में उपलब्ध इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद पर पूरी तरह निर्भर करता है। इसलिए किसानों को बिना पूरी जानकारी के किसी भी रासायनिक दवा का अंधाधुंध इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, बल्कि किसी योग्य कृषि विशेषज्ञ की उचित सलाह के बाद ही बीज का उपचार करना चाहिए। कुल मिलाकर देखा जाए तो आलू की खेती से बंपर पैदावार पाने के लिए खेत की सही जुताई, मिट्टी को भुरभुरा बनाना, रोगमुक्त स्वस्थ बीज चुनना और बुवाई से पहले उसका कायदे से उपचार करना सबसे ज्यादा जरूरी है। यदि किसान खेती की शुरुआत से ही इन तमाम बातों का कड़ाई से पालन करेंगे, तो वे फसल में किसी भी प्रकार की बीमारी से होने वाले आर्थिक नुकसान के जोखिम को काफी हद तक कम करने में सफल हो सकते हैं।



















