गोविंदा की कथित प्रेमिका कोमल रानी पर फूटा राखी सावंत का गुस्सा, परिवार तोड़ने का आरोप लगाते हुए दी सख्त चेतावनीपश्चिमी राजस्थान में अकाल और पानी की किल्लत पर रविंद्र सिंह भाटी ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनीहाथ की सुई से डिजिटल ट्रेंड तक: कोडरमा की इस दुकान में 1919 से कपड़े सिल रहीं पांच पीढ़ियांभारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की अकूत दौलत के आगे बाकी 9 देश मिलकर भी पिछड़े, वित्तीय आंकड़ों में दुनिया भर के बोर्ड्स का निकला दमनागौर कृषि मंडी ने रचा नया कीर्तिमान, राजस्व में 84.29 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्जत्रिपुरा में बुनियादी ढांचे और परिवहन नेटवर्क की निगरानी के लिए बनेगा एकीकृत डिजिटल मंचजमशेदपुर की सड़कों पर सफाई का अनोखा संदेश लेकर घूमती 17 साल पुरानी करिज्मापांवटा साहिब में डंपर और कार की जोरदार भिड़ंत में 3 की जान गई, कुल्लू में पलटी बसझड़ते और पतले बालों से हैं परेशान, तो महंगे प्रोडक्ट्स के बजाय अपनाएं 5 पारंपरिक देसी हर्ब्सपूर्वी नौसेना कमान की जासूसी में नाविक प्रदीप मुखर्जी गिरफ्तार, पाकिस्तानी महिला हैंडलर को भेजीं खुफिया जानकारियां
ड्राइवर से उद्यमी बने दिलीप कुमार: सरकारी सब्सिडी लेकर शुरू की बेकरी, अब हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपये का टर्नओवरझारखंड
4 अक्तू॰ 2026, 1:30 pm (56 मिनट पहले)· 0

ड्राइवर से उद्यमी बने दिलीप कुमार: सरकारी सब्सिडी लेकर शुरू की बेकरी, अब हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपये का टर्नओवर

पूर्व में बेकरी में ड्राइवर रहे दिलीप कुमार ने केंद्र सरकार की योजना से 35 प्रतिशत सब्सिडी और बैंक लोन लेकर अपनी खुद की खाद्य प्रसंस्करण इकाई शुरू की, जिससे वह हर महीने 1.5 से 2 लाख रुपये का कारोबार कर रहे हैं।

कभी बेकरी गाड़ियों के स्टीयरिंग संभालकर आजीविका चलाने वाले दिलीप कुमार ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए खुद का बेकरी उद्यम खड़ा कर लिया है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में कदम रखने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना का सहारा लिया। इस सरकारी पहल के तहत उन्होंने विधिवत ऑनलाइन आवेदन दाखिल किया और फिर पूरी बेकरी परियोजना की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराई। प्रशासनिक और वित्तीय औपचारिकताओं को पूरा करते हुए उन्होंने स्वरोजगार की दिशा में ठोस शुरुआत की।

परियोजना लागत, बैंक लोन और 35 प्रतिशत सब्सिडी

इस नई बेकरी इकाई की स्थापना में कुल 7 लाख रुपये के आसपास का खर्च आया। इस संपूर्ण वित्तीय ढांचे को खड़ा करने के लिए उन्हें बैंकिंग चैनल के माध्यम से लोन स्वीकृत किया गया। इसके साथ ही योजना के प्रावधानों के अंतर्गत दिलीप कुमार को कुल लागत पर 35 प्रतिशत की पूंजीगत सब्सिडी का सीधा लाभ मिला, जिससे शुरुआती निवेश का दबाव काफी कम हो गया। व्यवसाय संचालन के लिए जरूरी तकनीकी ढांचा और मशीनरी जुटाने के क्रम में उन्होंने दरभंगा के एक अधिकृत सप्लायर से संपर्क साधा और वहां से आवश्यक उपकरण मंगवाए।

ये भी पढ़ें

आधुनिक मशीनरी और दैनिक उत्पादन का दायरा

बेकरी परिसर में आधुनिक उत्पादन के लिए कई जरूरी मशीनें स्थापित की गई हैं। इनमें तापमान नियंत्रण वाली इलेक्ट्रॉनिक भट्टी, बड़े पैमाने पर मिश्रण तैयार करने वाली मिक्सिंग मशीन, ब्रेड कटिंग मशीन, ट्रे और कई छोटे-बड़े सहायक कलपुर्जे शामिल हैं। इन तकनीकी उपकरणों के जरिए उत्पादन प्रक्रिया को सुगम बनाया गया है। वर्तमान समय में इस सेटअप के जरिए ब्रेड, रस्क टोस्ट, क्रीम केक, मीठी पापड़ी और बिस्किट जैसे दैनिक उपभोग के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। हर दिन इस इकाई में लगभग 60 से 70 किलोग्राम बेकरी आइटम का उत्पादन सफलतापूर्वक किया जा रहा है।

स्थानीय आपूर्ति, दैनिक कमाई और पारिवारिक श्रम

तैयार माल की बिक्री के लिए कोडरमा जिले के विभिन्न बाजारों और स्थानीय खुदरा दुकानों में सीधी आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। रोजाना के माल की खपत से बेकरी में प्रतिदिन करीब 5 से 6 हजार रुपये का कारोबार दर्ज हो रहा है। इस निरंतर मांग के चलते पूरी इकाई का मासिक टर्नओवर लगभग डेढ़ लाख से दो लाख रुपये तक पहुंच जाता है। इस पूरे उद्यम का सबसे उल्लेखनीय पहलू इसका पारिवारिक श्रम मॉडल है। दिलीप ने बाहर से किसी पेशेवर कारीगर को काम पर नहीं रखा है, बल्कि उनके पिता, भाई और परिवार के अन्य सदस्य ही उत्पादन में हाथ बंटाते हैं। इतना ही नहीं, तैयार खाद्य सामग्री की मार्केटिंग और दुकानों तक डिलीवरी का पूरा जिम्मा भी परिवार के लोग आपस में मिलकर निभाते हैं।

सवाल-जवाब

दिलीप कुमार ने अपनी बेकरी इकाई स्थापित करने के लिए किस योजना के तहत आवेदन किया था?
उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन किया था।
इस बेकरी इकाई को शुरू करने में कुल कितनी लागत आई?
इस इकाई की स्थापना में लगभग 7 लाख रुपये की कुल लागत आई।
योजना के अंतर्गत उन्हें कितनी सब्सिडी का लाभ मिला?
उन्हें बैंक ऋण के साथ परियोजना लागत पर 35 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिला।
बेकरी के लिए जरूरी मशीनें कहां से खरीदी गईं?
बेकरी संचालन के लिए आवश्यक मशीनें दरभंगा के एक सप्लायर से खरीदी गईं।
यूनिट में रोजाना कितना माल तैयार होता है और दैनिक बिक्री कितनी है?
इकाई में प्रतिदिन 60 से 70 किलो खाद्य उत्पाद तैयार होते हैं और रोजाना 5 से 6 हजार रुपये का कारोबार होता है।
दिलीप कुमार की बेकरी का मासिक कारोबार कितना है?
उनकी बेकरी से हर महीने लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये का कारोबार होता है।
तैयार खाद्य उत्पादों की आपूर्ति किस क्षेत्र में की जाती है?
तैयार सामान की आपूर्ति कोडरमा जिले की विभिन्न दुकानों में की जाती है।
उत्पादन और विपणन का काम कौन संभालता है?
बिना किसी बाहरी कारीगर के, दिलीप के पिता, भाई और अन्य परिजन मिलकर उत्पादन और मार्केटिंग संभालते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 मिनट पहले

ड्राइवर से खुद का मालिक बनना वाकई बड़ी बात है। सबसे अच्छी बात यह लगी कि बाहर से कारीगर रखने के बजाय पूरा परिवार मिलकर काम संभाल रहा है।

Rohan Verma@rohan-verma·3 मिनट पहले

करण भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या परिवार वालों को बाजार में डिलीवरी करते समय कोई परेशानी नहीं आती होगी?

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp