झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर में सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर तेजी से बदल रही है। शहर की व्यस्त सड़कों पर अब पारंपरिक डीजल वाहनों के साथ संपीड़ित प्राकृतिक गैस यानी CNG से चलने वाले तिपहिया वाहनों की तादाद में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। ईंधन की कम खपत और बेहद किफायती रखरखाव के कारण तिपहिया चालक इसे अपनी आजीविका के लिए एक मजबूत और टिकाऊ विकल्प मान रहे हैं।
डीजल की तुलना में बेहतर ईंधन दक्षता और बचत
सड़क पर करीब 30 वर्षों से तिपहिया वाहन चला रहे एमडी असलम ने लगभग एक साल पहले अपने पुराने डीजल वाहन को बदलकर नया CNG ऑटो खरीदा था। उनके पुराने डीजल वाहन में प्रति लीटर लगभग 28 से 30 किलोमीटर का औसत मिलता था, लेकिन उसकी नियमित मरम्मत और कलपुर्जों की देखरेख पर होने वाला खर्च काफी ज्यादा रहता था। दिनभर की कड़ी मशक्कत के बाद होने वाली दैनिक कमाई का एक बड़ा हिस्सा गाड़ी की मरम्मत में ही चला जाता था।
गैस चालित नए तिपहिया मॉडल में आने के बाद उन्हें ईंधन के मामले में सीधा लाभ मिला। नया CNG ऑटो 40 किलोमीटर से अधिक का माइलेज निकाल रहा है। ईंधन की कम लागत और बेहद मामूली देखरेख खर्च के कारण तमाम जरूरी खर्चे काटने के बाद भी उन्हें हर महीने लगभग 10 से 12 हजार रुपये की अतिरिक्त बचत हो रही है। वह रोजाना तकरीबन 8 से 10 घंटे तक शहर के विभिन्न मार्गों पर गाड़ी चलाते हैं।
कीमत, यात्री क्षमता और सफर का आराम
इस वाहन की खरीद लागत और संचालन विशेषताओं का ब्योरा देते हुए एमडी असलम ने बताया कि उन्होंने यह CNG ऑटो लगभग 3.45 लाख रुपये की लागत में खरीदा था। इस नए वाहन में छह यात्रियों के बैठने की आरामदायक व्यवस्था है, जिससे नियमित तौर पर सवारियों को लाने और ले जाने में कोई दिक्कत नहीं आती।
दिन में आठ से दस घंटे तक लगातार संचालन करने के बाद भी गैस आधारित मॉडल चलाने में काफी आरामदायक साबित होता है। डीजल गाड़ियों की तुलना में इसमें इंजन की तेज आवाज बेहद कम होती है और रास्ते में झटके भी काफी कम महसूस होते हैं, जिससे लंबे समय तक ड्राइविंग की थकान घट जाती है।
प्रदूषण पर लगाम और आने वाले दिनों की राह
वित्तीय मुनाफे के साथ-साथ यह बदलाव पर्यावरण संरक्षण के नजरिए से भी शहर के लिए मुफीद साबित हो रहा है। डीजल चालित वाहनों से निकलने वाले धुएं के मुकाबले गैस चालित गाड़ियां हवा में बेहद कम प्रदूषण फैलाती हैं। इसी वजह से शहर में आने वाले दिनों में हरित ईंधन वाले वाहनों का बेड़ा और बड़ा होने की संभावना दिख रही है। जो चालक नया सार्वजनिक वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह आर्थिक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर एक उपयोगी विकल्प बनकर उभरा है।





















