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अंबाला में तालाब बनाकर मछली पालन शुरू करने पर सरकार देगी लाखों का अनुदानहरियाणा
5 सित॰ 2026, 8:08 pm (2 घंटे पहले)· 2

अंबाला में तालाब बनाकर मछली पालन शुरू करने पर सरकार देगी लाखों का अनुदान

हरियाणा के अंबाला में मत्स्य विभाग किसानों को तालाब बनाकर मछली पालन शुरू करने के लिए प्रेरित कर रहा है, जिसमें परियोजना लागत का 40 से 60 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान मिल सकता है।

हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में सितंबर का महीना खुद का कारोबार शुरू करने के लिहाज से खासा मुफीद माना जा रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जो नौकरी के भरोसे न रहकर अपना काम खड़ा करना चाहते हैं। जिनके पास खेती की जमीन है, वे उसी में तालाब खुदवाकर मछली पालन का काम शुरू कर सकते हैं। जिनके पास जमीन नहीं है, उनके लिए भी रास्ता बंद नहीं है, क्योंकि 8 से 10 साल के लिए जमीन लीज पर लेकर भी यही कारोबार खड़ा किया जा सकता है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के जरिए किसानों और युवाओं को मछली पालन के पेशे से जोड़ने की कोशिश हो रही है, और इसी कड़ी में अंबाला जिले का मत्स्य विभाग गांव-गांव कैंप लगाकर लोगों तक योजना की जानकारी पहुंचा रहा है। विभाग का कहना है कि जिले में हर साल 50 से ज्यादा किसान इस योजना का सहारा लेकर मछली पालन शुरू करते हैं, जो इस काम के प्रति बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है।

एक हेक्टेयर के तालाब पर कितनी सब्सिडी

अंबाला की मत्स्य अधिकारी रूबी के मुताबिक इस योजना के तहत किसान एक हेक्टेयर जमीन पर तालाब तैयार करवा सकते हैं, फिर चाहे वह जमीन उनकी अपनी हो या 8 से 10 साल के लीज एग्रीमेंट पर ली गई हो। एक हेक्टेयर के तालाब को खड़ा करने में करीब 11 लाख रुपये तक की परियोजना लागत आ सकती है। इस पूरी रकम पर सरकार लाभार्थी की श्रेणी के हिसाब से 40 से 60 प्रतिशत तक अनुदान देती है। सामान्य वर्ग से आने वाले आवेदकों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है, जबकि महिला लाभार्थियों और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के आवेदकों के लिए यह अनुदान बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यानी वर्ग के हिसाब से 11 लाख रुपये की लागत में से लाभार्थी को खुद अपनी जेब से बाकी की रकम ही जुटानी पड़ती है।

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सिर्फ तालाब तक सीमित नहीं है योजना, गाड़ी पर भी सब्सिडी

रूबी के अनुसार मछली पालन का यह कारोबार सिर्फ तालाब बनाने तक ही सीमित नहीं रहता। मछलियों को तालाब से मंडी या बाजार तक पहुंचाने के लिए फोर व्हीलर वाहन खरीदने पर भी योजना के तहत सब्सिडी का प्रावधान रखा गया है, और इसकी रकम 2.25 लाख रुपये तक हो सकती है। इससे किसान को मछलियों की लोडिंग-अनलोडिंग के साथ-साथ उन्हें समय पर बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलती है। कारोबार की शुरुआत भले ही एक छोटे तालाब से हो, लेकिन आगे चलकर यही काम मछली उत्पादन, परिवहन और बाजार तक सप्लाई करने वाला पूरा कारोबार बन सकता है, जिससे किसान की कमाई के कई जरिए एक साथ खुल जाते हैं।

आवेदन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज

योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान हरियाणा सरल पोर्टल या मत्स्य विभाग हरियाणा की वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा होने के बाद विभाग की ओर से लाभार्थी को बुलाया जाता है और उसकी जानकारी व दस्तावेजों की जांच की जाती है। यह पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पात्र पाए गए आवेदक को योजना के तहत सब्सिडी का लाभ दिया जाता है। आवेदन के वक्त आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, जमीन के कागजात या लीज एग्रीमेंट के अलावा जरूरत पड़ने पर जाति प्रमाण पत्र और दूसरे दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले ये सभी कागजात तैयार रखना बेहतर रहेगा।

सवाल-जवाब

यह योजना किस नाम से चल रही है?
इसका नाम प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना है।
तालाब बनाने के लिए कितनी जमीन चाहिए?
योजना के तहत एक हेक्टेयर जमीन पर तालाब तैयार किया जा सकता है, चाहे वह खुद की हो या लीज पर ली गई हो।
अगर खुद की जमीन नहीं है तो क्या करें?
जमीन 8 से 10 साल के लिए लीज पर लेकर भी तालाब बनाया जा सकता है।
एक हेक्टेयर तालाब बनाने में कितनी लागत आती है?
इसकी परियोजना लागत करीब 11 लाख रुपये तक हो सकती है।
सरकार कितनी सब्सिडी देती है?
सामान्य वर्ग को 40 प्रतिशत तक और महिला, एससी, एसटी वर्ग को 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है।
वाहन खरीदने पर कितनी सब्सिडी मिल सकती है?
मछली ढोने के लिए फोर व्हीलर खरीदने पर 2.25 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है।
आवेदन कहां किया जा सकता है?
किसान हरियाणा सरल पोर्टल या मत्स्य विभाग हरियाणा की वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, जमीन के कागजात या लीज एग्रीमेंट और जरूरत पड़ने पर जाति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·2 घंटे पहले

यह पहल ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिलने वाली 40 से 60 प्रतिशत की वित्तीय सहायता और परिवहन वाहन पर मिलने वाला अनुदान किसानों को पारंपरिक खेती के चक्र से बाहर निकालकर कृषि-व्यवसाय की ओर मोड़ने में मददगार साबित होगा। लीज पर जमीन लेकर काम शुरू करने का विकल्प भूमिहीन युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलता है। यदि जिला प्रशासन शिविरों के माध्यम से कागजी प्रक्रिया को और सरल बना दे, तो अंबाला में इस योजना के दायरे में आने वाले किसानों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 घंटे पहले

अंबाला में मत्स्य पालन और परिवहन वाहन पर मिलने वाली वित्तीय सहायता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलने की पूरी संभावना है। हालांकि, इस तरह की कल्याणकारी योजनाओं में अक्सर फर्जी दस्तावेजों या कागजी हेराफेरी के जरिए सरकारी अनुदान हड़पने के प्रयास होने का जोखिम रहता है। जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऑनलाइन आवेदन और दस्तावेजों की भौतिक जाँच के दौरान पूरी पारदर्शिता बरती जाए, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे और केवल पात्र लाभार्थियों तक ही सही समय पर इसका लाभ पहुँचे।

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