झारखंड के अलग-अलग जिलों से हर साल हजारों छात्र-छात्राएं जमशेदपुर की बड़ी कंपनियों में अप्रेंटिसशिप करने पहुंचते हैं और इन दिनों शहर की कई फैक्ट्रियों में भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. नए शहर में कदम रखते ही इन छात्रों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत खड़ी होती है, कम बजट में सिर छुपाने की जगह ढूंढना. सीमित जेब खर्च और तय समय सीमा के बीच किराए का कमरा तलाशना आसान काम नहीं होता, और यही वजह है कि गोविंदपुर जैसा इलाका इन छात्रों के लिए राहत की तरह उभर रहा है.
दो हजार रुपये में मिल जाता है ठिकाना
गोविंदपुर में रहने वाले जगदीश के मुताबिक, इस इलाके की सबसे बड़ी खासियत यहां का किफायती किराया है. स्थानीय स्तर पर करीब दो हजार रुपये में ही कमरा मिल जाता है, जो बाहर से आने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत साबित होता है. जगदीश कहते हैं, "यहां कम कीमत में कमरे मिल जाते हैं, इसलिए बाहर से आने वाले छात्रों के लिए यह जगह मुफीद है." कम आमदनी में गुजारा करने वाले अप्रेंटिस छात्रों के लिए ऐसी दरें किसी वरदान से कम नहीं हैं.
फैक्ट्रियों तक चंद कदमों की दूरी
किराया कम होने के अलावा गोविंदपुर की भौगोलिक स्थिति भी इसे खास बनाती है. जमशेदपुर के कई औद्योगिक क्षेत्र और बड़ी कंपनियां यहां से महज एक से दो किलोमीटर के दायरे में मौजूद हैं. इसका सीधा फायदा यह होता है कि छात्रों को रोजाना लंबा सफर तय नहीं करना पड़ता और आने-जाने पर होने वाला खर्च भी काफी हद तक बच जाता है. कई जगहों पर तो छात्र पैदल चलकर या बेहद कम दूरी के साधन से ही अपनी कंपनी तक पहुंच सकते हैं, जिससे समय और पैसा दोनों की बचत होती है.
सीमित स्टाइपेंड में बजट संभालने की चुनौती
अप्रेंटिसशिप के दौरान छात्रों को जो राशि मिलती है, वह आमतौर पर सीमित होती है और उसी में उन्हें कमरे का किराया, खाना-पीना, आने-जाने का खर्च और बाकी जरूरतें भी पूरी करनी होती हैं. ऐसे हालात में अगर ठहरने की जगह कंपनी के पास हो और किराया भी कम हो, तो पूरे महीने का बजट संभालना कहीं आसान हो जाता है. यही समीकरण गोविंदपुर को छात्रों की पसंदीदा जगह बना रहा है, क्योंकि यहां कम खर्च में दोनों जरूरतें, रहना और आना-जाना, एक साथ पूरी हो जाती हैं.
नए शहर में कमरा ढूंढना आसान नहीं
जगदीश के अनुसार, बाहर से पहली बार जमशेदपुर आने वाले छात्रों को अक्सर कंपनी के आसपास सस्ता कमरा तलाशने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है, क्योंकि उन्हें न तो इलाके की जानकारी होती है और न ही स्थानीय संपर्क. ऐसे छात्रों के लिए गोविंदपुर जैसी जगहें भरोसे का सहारा बन सकती हैं. हालांकि किसी भी कमरे को अंतिम रूप देने से पहले छात्रों को सिर्फ किराए पर ही नहीं रुकना चाहिए, बल्कि बिजली, पानी, सिक्योरिटी डिपॉजिट और दूसरे अतिरिक्त खर्चों के बारे में भी पूरी जानकारी ले लेनी चाहिए, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो.
अप्रेंटिस छात्रों के लिए बेहतर विकल्प
कुल मिलाकर, जमशेदपुर की किसी कंपनी में अप्रेंटिसशिप के लिए आ रहे और कम खर्च में कंपनी के करीब रहना चाहने वाले छात्रों के लिए गोविंदपुर एक व्यावहारिक विकल्प बनकर उभरा है. करीब दो हजार रुपये में मिलने वाले कमरे और आसपास मौजूद कई औद्योगिक कंपनियां इस इलाके को सुविधाजनक बनाती हैं. रहने का खर्च कम रखने के साथ-साथ रोजाना कंपनी तक बिना परेशानी पहुंचने के लिहाज से छात्र गोविंदपुर को अपनी शहर में ठहरने की सूची में शामिल कर सकते हैं.



















