पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कूटनीतिक घटनाक्रमों के बीच वैश्विक वित्तीय बाजारों की निगाहें आने वाले दिनों पर टिकी हुई हैं। ईरान ने अमेरिका के समक्ष सात दिनों का एक नया प्रस्ताव रखा है और स्पष्ट किया है कि जब तक उसकी शर्तें स्वीकार नहीं की जातीं, वह होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के पक्ष में नहीं है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज करने के बावजूद इस बात के संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर फिर से शुरू हो सकता है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर जारी इस खींचतान का सीधा प्रभाव वैश्विक शेयर बाजारों, कच्चे तेल, सोने और प्रमुख विदेशी मुद्राओं पर देखने को मिल रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कूटनीतिक और सैन्य गतिरोध
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हालिया घटनाक्रम पर रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से समुद्री व्यापार मार्ग को फिर से बहाल करने की दिशा में कोई भी प्रगति पूरी तरह से ईरान की शर्तों की पूर्ति पर निर्भर करती है। उन्होंने बल देकर कहा कि ईरान अपनी रखी गई मांगों से पीछे नहीं हटेगा। इसके साथ ही ईरान के वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व ने किसी भी संभावित संघर्ष के लिए अपनी युद्ध तैयारियों को दोहराया है।
दूसरी तरफ, वाशिंगटन का रुख भी सख्त बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा प्रस्तुत सात दिवसीय प्रस्ताव को फिलहाल मानने से इंकार कर दिया है। हालांकि, उन्होंने यह उम्मीद भी जताई है कि इस सप्ताह के दौरान दोनों देशों के बीच औपचारिक या अनौपचारिक वार्ता का सिलसिला दोबारा शुरू हो सकता है। इस सैन्य और कूटनीतिक रस्साकशी ने दुनिया भर के निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
बाजार की शब्दावली: रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ का चक्र
अनिश्चितता के इस दौर में वित्तीय बाजारों की दिशा समझने के लिए 'रिस्क-ऑन' और 'रिस्क-ऑफ' की धारणा को जानना बेहद जरूरी है। जब निवेशक भविष्य को लेकर सकारात्मक होते हैं और जोखिम लेने की क्षमता बढ़ती है, तो बाजार में 'रिस्क-ऑन' की स्थिति बनती है। ऐसे समय में निवेशक शेयरों, जिंसों (कमोडिटीज) और क्रिप्टो एसेट्स में पूंजी लगाते हैं। इसके विपरीत, जब किसी युद्ध, संकट या आर्थिक मंदी की आशंका से निवेशक सुरक्षित ठिकाना तलाशते हैं, तो बाजार 'रिस्क-ऑफ' मोड में चला जाता है। ऐसे में सोने, सरकारी बॉन्ड और सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राओं में निवेश बढ़ता है।
'रिस्क-ऑन' माहौल में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कैनेडियन डॉलर (CAD) और न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) जैसी उन देशों की मुद्राएं मजबूत होती हैं, जो कच्चे माल और जिंसों के निर्यात पर निर्भर हैं। इस दौरान दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) और रूसी रूबल (RUB) जैसी मुद्राओं को भी समर्थन मिलता है, क्योंकि औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने से कच्चे माल की मांग में वृद्धि होती है।
सुरक्षित संपत्तियों का गणित: डॉलर, येन और स्विस फ्रैंक
जब बाजार में 'रिस्क-ऑफ' का माहौल होता है, तब वैश्विक पूंजी मुख्य रूप से तीन प्रमुख सुरक्षित मुद्राओं की तरफ भागती है। अमेरिकी डॉलर (USD) दुनिया की रिजर्व मुद्रा होने के कारण पहला विकल्प बनता है। निवेशक अमेरिकी सरकार के ऋण पत्रों (ट्रेजरी बॉन्ड) को जोखिम मुक्त मानते हैं। जापानी येन (JPY) इसलिए मजबूत होता है क्योंकि जापान के अधिकांश सरकारी बॉन्ड घरेलू निवेशकों के पास हैं, जो संकट के समय भी उन्हें बेचने से बचते हैं। वहीं, स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग कानून और संपत्ति सुरक्षा के नियमों के कारण स्विस फ्रैंक (CHF) को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है।
विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल: AUD/USD और USD/JPY की चाल
हालिया एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान विदेशी मुद्रा बाजार (FX) में मिश्रित रुझान देखने को मिले हैं। AUD/USD की जोड़ी 0.7010 के स्तर के आसपास अपनी मजबूती खोती नजर आई। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे भी वृद्धि किए जाने की संभावना से अमेरिकी डॉलर को बल मिला है। इस बीच, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के आगामी मौद्रिक नीतिगत फैसलों पर निवेशकों की नजरें बनी हुई हैं।
वहीं, USD/JPY की जोड़ी में तीन सप्ताह के उच्च स्तर 159.00 तक पहुंचने के बाद गिरावट दर्ज की गई है। जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की आशंका से येन के बिकवालों ने सावधानी बरती है। हालांकि, फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और तेल की कीमतों से उपजने वाली महंगाई दर के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर बनी हुई है, जिससे अमेरिकी डॉलर का आधार मजबूत बना हुआ है। बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा दरों में की गई हालिया बढ़ोतरी के बावजूद उसका रुख उदार माना जा रहा है।
सोना और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मामूली सुधार देखा गया है, यद्यपि यह अभी भी प्रति ट्रॉय औंस $4,300 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है। डॉलर इंडेक्स में हल्की बिकवाली और अमेरिकी यील्ड में आई गिरावट से सोने को कुछ समर्थन मिला है।
वैश्विक केंद्रीय बैंकों की बात करें तो फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों ने हाल ही में अपनी-अपनी ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स (bps) की बढ़ोतरी की है। दोनों ही संस्थान महंगाई को नियंत्रित करने की चुनौती से जूझ रहे हैं और उन्होंने स्पष्ट किया है कि भविष्य में दरों से जुड़े फैसले आने वाले आर्थिक आंकड़ों (इकोनॉमिक डेटा) पर निर्भर करेंगे।


















