पलामू टाइगर रिजर्व यानी पीटीआर के बेतला नेशनल पार्क में सर्दियों के मौसम में देश-विदेश से बड़ी संख्या में सैलानी घूमने के लिए पहुंचते हैं। हालांकि, पार्क के आसपास के ग्रामीण इलाकों में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों ने स्थानीय लोगों और प्रशासन की चिंता को बढ़ा दिया है। खासतौर पर जंगली हाथियों की लगातार बढ़ती आवाजाही को देखते हुए वन विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए एक सख्त सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, ऐतिहासिक किला यानी फोर्ट की ओर जाने वाले रास्ते के आसपास हाथियों का नया प्राकृतिक ठिकाना विकसित हो चुका है, जिसके चलते ये विशाल जानवर अब जंगलों से निकलकर मुख्य सड़कों तक पहुंचने लगे हैं। ऐसे में इस मार्ग से गुजरने वाले हर व्यक्ति को बेहद सतर्क रहने की हिदायत दी गई है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
किला मार्ग पर हाथियों का डेरा
वन विभाग के कर्मी निरंजन कुमार ने इस बात की पुष्टि की है कि किला मार्ग के आसपास हाथियों की सक्रियता में काफी इजाफा हुआ है। इस इलाके में हाथियों के विचरण और ठहरने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन जाने के कारण वे अक्सर जंगल से बाहर आकर सड़क पर आ जाते हैं। विभाग की तरफ से की गई फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग में साफ देखा गया है कि हाथी किस तरह सड़क के किनारे घूमते हैं और कई बार राहगीरों का रास्ता तक रोक लेते हैं। हाथियों की इस बेरोक-टोक गतिविधि की वजह से किला मार्ग पर आवाजाही करने वाले लोगों की जान पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है। विशेष तौर पर जंगल के नजदीक रहने वाले ग्रामीणों और इस क्षेत्र में सैर करने आने वाले सैलानियों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी साबित हो रही है, जिससे उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
वाहन चालकों के लिए कड़े निर्देश
सड़क पर जंगली हाथियों की लगातार मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने किला मार्ग पर वाहनों के परिचालन को लेकर बेहद सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बिना किसी वैध अनुमति के इस मार्ग पर दोपहिया और तीनपहिया वाहनों को बिल्कुल न ले जाया जाए। हाथियों के अचानक सड़क पर आ जाने की स्थिति में इन छोटे वाहनों के चालकों के लिए दुर्घटना की आशंका सबसे ज्यादा बनी रहती है। ऐसी गंभीर स्थिति में यदि कोई हाथी के बहुत नजदीक जाने की कोशिश करता है या उनके रास्ते में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करता है, तो इससे भारी जान-माल का नुकसान हो सकता है। यही कारण है कि लोगों से बार-बार यह अपील की जा रही है कि वे वन विभाग के इन नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करें और किसी भी तरह का अनावश्यक जोखिम मोल न लें।
अकेले जंगल जाने पर पाबंदी
सुरक्षा के मोर्चे पर वन विभाग ने आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को सलाह दी है कि वे भूलकर भी अकेले जंगल की तरफ न जाएं। हाथियों की आवाजाही वाले इन संवेदनशील क्षेत्रों में खास सतर्कता बरतने की जरूरत है और किसी भी परिस्थिति में जंगली जानवरों के करीब जाने से बचने की सख्त हिदायत दी गई है। यदि किसी व्यक्ति को रास्ते में हाथियों का झुंड नजर आ जाए, तो उन्हें कभी भी उनके पास जाने, उन्हें छेड़ने या फिर जबरन रास्ता पार करने का दबाव बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा, हाथियों के साथ सेल्फी लेने या फिर उनका वीडियो बनाने के लिए उनके ज्यादा नजदीक जाना भी जानलेवा साबित हो सकता है। सोशल मीडिया पर लाइक्स बटोरने के चक्कर में लोग कई बार अपनी जिंदगी दांव पर लगा देते हैं, जिससे प्रशासन ने सख्ती से बचने को कहा है.
सावधानी ही बचाव का मुख्य उपाय
आम जनता की हिफाजत के लिए वन विभाग लगातार जरूरी कदम उठा रहा है, लेकिन इसमें स्थानीय लोगों और पर्यटकों की अपनी सतर्कता भी उतनी ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। विभाग ने सभी से यह आग्रह किया है कि वे निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें और जंगल के आसपास के इलाकों में बेमतलब की आवाजाही करने से बचें। यदि किसी को भी इलाके में हाथियों की मौजूदगी की कोई सूचना मिलती है, तो उसे तुरंत इसकी जानकारी संबंधित वनकर्मियों को देनी चाहिए ताकि समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें। थोड़ी सी भी लापरवाही या अनदेखी किसी बड़े और गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए बेतला और उसके आसपास के जंगली क्षेत्रों की सैर करते समय सुरक्षा को हमेशा अपनी पहली प्राथमिकता बनाकर रखें ताकि किसी भी आपात स्थिति से सुरक्षित बचा जा सके।



















