रांची में सरकार के फैसलों के चलते कुछ समय पहले शांत हुआ छात्र आंदोलन अब एक बार फिर विकराल रूप धारण कर चुका है। इसकी सबसे बड़ी वजह राज्य में रद्द की गई बाईस परीक्षाओं को लेकर उच्च न्यायालय का वह ताजा फैसला है, जिसमें इन सभी परीक्षाओं पर रोक लगा दी गई है। अदालत के इस आदेश के सामने आने के बाद से ही विद्यार्थियों में जबरदस्त रोष व्याप्त है। बीते शुक्रवार को मुख्यमंत्री के पुतला दहन के निर्धारित कार्यक्रम के दौरान राजधानी रांची के साथ-साथ हजारीबाग, गढ़वा, गिरिडीह और रामगढ़ जैसे प्रमुख जिलों में भी जोरदार हंगामा देखने को मिला। कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच संघर्ष की खबरें आईं, तो वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारी छात्राओं के बीच भी तीखी नोकझोक हुई। कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कई जगहों पर बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज करना पड़ा।
प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच बना यह गतिरोध पिछली उन्नीस अगस्त के आसपास कुछ समय के लिए थमता हुआ प्रतीत हो रहा था, लेकिन न्यायालय के हस्तक्षेप ने इस सुलगती आग को फिर से हवा दे दी है। उच्च न्यायालय ने ग्यारहवीं से तेरहवीं जेपीएससी परीक्षा के अलावा सबसे अधिक विवादों में घिरी जेएसएससी सीजीएल परीक्षा पर भी रोक लगा दी है। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर भी अदालत की तरफ से स्थगन आदेश जारी किए गए हैं। इन कानूनी झटकों और फैसलों के बाद विद्यार्थियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है और वे खुलकर सड़कों पर उतरकर विरोध जता रहे हैं।
जल्दबाजी में लिए गए फैसलों का आरोप
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का सीधा आरोप है कि सरकार ने परीक्षा रद्द करने जैसा बड़ा कदम बेहद जल्दबाजी में उठाया। उनका तर्क है कि इस पूरे मामले को लेकर सरकार की तरफ से मु मुकम्मल तैयारी नहीं की गई थी, जिसके कारण जब यह मामला अदालत की देहरी पर पहुंचा, तो सरकार का कोई भी फैसला कानूनी कसौटी पर खरा नहीं उतर सका। विद्यार्थियों का दावा है कि प्रशासनिक लापरवाही और लचर तैयारियों के चलते ही उच्च न्यायालय को एक के बाद एक परीक्षाओं से जुड़े आदेशों पर स्टे लगाने के लिए बाध्य होना पड़ा।
वर्तमान में जिन प्रमुख परीक्षाओं पर रोक की बात सामने आई है, उनमें ग्यारहवीं से तेरहवीं जेपीएससी, जेएसएससी सीजीएल, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी ऑफिसर की परीक्षाएं शामिल हैं। इन तमाम परीक्षाओं के भविष्य को लेकर पहले से ही युवाओं के मन में भारी असमंजस और नाराजगी थी, जो अब उच्च न्यायालय के फैसले के बाद और अधिक भड़क उठी है। इसी व्यापक आक्रोश के चलते विद्यार्थियों ने बीते इक्कीस अगस्त को संपूर्ण राज्य में मुख्यमंत्री का पुतला फूंकने का बड़ा अभियान चलाया। युवाओं ने विभिन्न जिलों में सड़कों पर मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हालांकि, इस पुतला दहन कार्यक्रम के शुरू होने से ठीक पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से एक आधिकारिक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया था, जिसमें गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया कि इन छात्र आंदोलनों के पीछे भारतीय जनता पार्टी और कोचिंग माफियाओं का प्रत्यक्ष हाथ है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा छात्रों के इस प्रदर्शन का कड़ा विरोध किए जाने के बाद राज्य के कई हिस्सों में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए। अनेक स्थानों पर सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनरत विद्यार्थियों के बीच आमने-सामने की स्थिति बन गई। कुछ जगहों पर तो आंदोलनकारियों के हाथों से पुतला तक छीनने का प्रयास किया गया, जिससे दोनों पक्षों के बीच जमकर धक्का-मुक्की और मारपीट हुई। हालात को बेकाबू होने से बचाने के लिए स्थानीय पुलिस को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा और शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने की खातिर लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।
प्रदर्शनों के दौरान हिंसक झड़पें और तनाव
राजधानी रांची के अतिरिक्त हजारीबाग, गढ़वा, गिरिडीह और रामगढ़ जिलों में भी प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़पें और तनाव का माहौल देखा गया। विद्यार्थियों का कहना है कि वे पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उनके साथ मारपीट की गई। दूसरी ओर, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का यह तर्क रहा कि सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी। इन तमाम ताजा घटनाओं से यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले दिनों में यह छात्र आंदोलन और अधिक आक्रामक रूप ले सकता है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं के रुख और पुलिसिया कार्रवाई के कारण युवाओं का गुस्सा और अधिक गहरा गया है, जिससे यह साफ संकेत मिलते हैं कि यदि स्थिति को समय रहते नहीं संभाला गया, तो आने वाले वक्त में सरकार के लिए इन विरोध प्रदर्शनों पर काबू पाना बेहद कठिन साबित होगा।
दूसरी तरफ, जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में सामने आई कथित गड़बड़ियों के मामलों की जांच सीआईडी द्वारा बेहद तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। इस बहुचर्चित मामले की तह तक जाने के लिए गठित विशेष जांच दल यानी एसआईटी में सदस्यों की कुल संख्या को बढ़ाकर सत्रह कर दिया गया है। जांच एजेंसी की तरफ से एक बार फिर आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस प्रकरण से जुड़ी कोई भी उपयोगी जानकारी उनके साथ साझा करें। सीआईडी की यह ताजा अपील मुख्य रूप से वर्ष दो हजार तेरह और दो हजार चौबीस के दौरान आयोजित की गई जेएसएससी सीजीएल परीक्षा से जुड़ी हुई है। जब इस भ्रष्टाचार मामले की जांच का दायरा पहली बार शुरू किया गया था, उस समय भी जांच एजेंसी ने जनता से परीक्षा से संबंधित सुराग देने का आग्रह किया था, और अब जांच को एक निर्णायक मोड़ पर ले जाने के लिए एक बार फिर से लोगों का खुला सहयोग मांगा गया है।
सीआईडी के अनुसार, यदि किसी भी नागरिक के पास जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के संचालन में हुई किसी भी तरह की कथित धांधली या गड़बड़ी से जुड़ा कोई भी ठोस सबूत अथवा जानकारी उपलब्ध है, तो वह बेझिझक जांच टीम तक अपनी बात पहुंचा सकता है। इसके साथ ही एजेंसी की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान को पूरी तरह से गुप्त रखा जाएगा ताकि किसी को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।





















