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पर्यावरण अनुकूल कृषि की मिसाल: देवघर के वकील यादव ने तैयार किया जैविक खाद और कीटनाशक का सफल उपक्रमझारखंड
9 सित॰ 2026, 12:19 pm (1 घंटे पहले)· 2

पर्यावरण अनुकूल कृषि की मिसाल: देवघर के वकील यादव ने तैयार किया जैविक खाद और कीटनाशक का सफल उपक्रम

झारखंड के देवघर जिले के पदनबेडा गांव निवासी वकील यादव ने रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों का उत्पादन शुरू किया है। कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने एक बीआरसी सेंटर स्थापित किया है, जहां जीवामृत, अग्न्यस्त्र और ब्रह्मास्त्र तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के उद्देश्य से झारखंड स्थित देवघर जिले के पदनबेडा गांव निवासी वकील यादव ने एक नवीन पहल की है। लंबे समय तक रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से कृषि योग्य भूमि की सेहत पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों को देखते हुए उन्होंने प्राकृतिक विकल्पों को अपनाने का निर्णय लिया। वकील यादव ने स्वयं जैविक उर्वरक और प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करने का एक बीआरसी सेंटर शुरू किया है, जिसके माध्यम से वे न केवल अपने खेतों में इनका उपयोग कर रहे हैं बल्कि अन्य कृषकों को भी इस पद्धति से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

सरकारी प्रोत्साहन और कृषि विज्ञान केंद्र का सहयोग

केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जैविक तथा प्राकृतिक खेती को दिए जा रहे प्रोत्साहन से प्रेरित होकर वकील यादव ने इस दिशा में व्यावसायिक कदम बढ़ाया। उन्होंने देवघर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित जैविक कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इस प्रशिक्षण के दौरान उन्हें जैविक खाद बनाने के वैज्ञानिक तरीकों, घटकों के सही अनुपात और प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करने की विविध तकनीकों की विस्तृत जानकारी मिली। प्रशिक्षण पूर्ण करने के उपरांत उन्होंने एक बीआरसी केंद्र की स्थापना की, जहां वे स्थानीय स्तर पर सुलभ संसाधनों की मदद से जैविक उत्पाद तैयार कर रहे हैं।

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जीवामृत: मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक टॉनिक

जैविक खेती की प्रक्रिया में मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए वकील यादव जीवामृत का निर्माण करते हैं। उनके अनुसार जीवामृत मिट्टी के लिए एक प्रभावी टॉनिक की भांति कार्य करता है। इसे तैयार करने के लिए मुख्य रूप से देशी गाय का गोबर, गोमूत्र, बेसन, गुड़ तथा बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे की प्राकृतिक रूप से उपजाऊ मिट्टी का मिश्रण उपयोग में लाया जाता है।

इन सभी सामग्रियों को निश्चित मात्रा में मिलाकर एक बर्तन में रखा जाता है। लगभग तीन दिनों की समयावधि में यह जैविक घोल पूरी तरह तैयार हो जाता है। जब इस मिश्रण को खेतों में डाला जाता है, तो यह मिट्टी में मौजूद मित्र सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों और उनकी संख्या में तेजी से वृद्धि करता है। इसके नियमित प्रयोग से भूमि की प्राकृतिक उर्वरता पुनः जीवित होती है और फसलों को आवश्यक पोषक तत्व सहजता से प्राप्त होते हैं।

अग्न्यस्त्र और ब्रह्मास्त्र: कीट नियंत्रण के लिए अचूक घोल

फसलों को विभिन्न हानिकारक कीटों और बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए वकील यादव अग्न्यस्त्र और ब्रह्मास्त्र नामक प्राकृतिक कीटनाशक घोल तैयार करते हैं। इन घोलों का निर्माण पूरी तरह से वनस्पतियों और गोमूत्र के संयोजन से किया जाता है।

  • अग्न्यस्त्र का निर्माण: अग्न्यस्त्र तैयार करने के लिए गोमूत्र में नीम की हरी पत्तियां, कड़वी व तीखी तंबाकू, तीखी हरी मिर्च और कुचला हुआ लहसुन मिलाकर संसाधित किया जाता है। यह घोल फसलों पर कीटों के आक्रमण को रोकने में अत्यंत प्रभावशाली साबित होता है।
  • ब्रह्मास्त्र का निर्माण: ब्रह्मास्त्र तैयार करने के लिए गोमूत्र के साथ नीम, करंज, सीताफल, अरंडी और धतूरे जैसी कड़वी तथा औषधीय पत्तियों का उपयोग किया जाता है। इन पत्तियों को गोमूत्र में मिलाकर शक्तिशाली कीटनाशक बनाया जाता है।

हालांकि वकील यादव यह स्पष्ट करते हैं कि ऐसे प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करते समय सही मात्रा, सुरक्षा मानकों और कृषि विशेषज्ञों की सलाह का अनुपालन करना अनिवार्य है, ताकि फसल को सही सुरक्षा मिल सके।

किसानों में जागरूकता फैलाना और व्यावहारिक चुनौतियां

प्राकृतिक खेती की दिशा में कार्य करते हुए वकील यादव को कई व्यावहारिक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। वर्षों से रासायनिक खाद और त्वरित कीटनाशकों का इस्तेमाल कर रहे किसानों को जैविक विकल्पों के लिए सहमत करना एक कठिन कार्य है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई कृषकों के बीच यह भ्रांति फैली हुई है कि रासायनिक उर्वरक छोड़ने से फसल की पैदावार में गिरावट आएगी।

वकील यादव इस भ्रांति को दूर करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। वे किसानों को समझाते हैं कि जैविक तरीकों के निरंतर प्रयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होता है, जिससे दीर्घावधि में स्थायी और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त होता है। कम लागत में तैयार होने वाले इन प्राकृतिक विकल्पों से खेती का लागत खर्च घटता है। उनका प्राथमिक ध्येय केवल अपना लाभ कमाना नहीं, बल्कि समूचे क्षेत्र के किसानों को कम खर्च वाली और टिकाऊ प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना है। उनकी इस अभिनव पहल की स्थानीय स्तर पर काफी सराहना हो रही है।

सवाल-जवाब

वकील यादव का जैविक खाद स्टार्टअप किस स्थान पर संचालित हो रहा है?
यह उपक्रम झारखंड के देवघर जिले के अंतर्गत पदनबेडा गांव में स्थापित बीआरसी सेंटर के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।
जीवामृत बनाने के लिए किन मुख्य सामग्रियों की आवश्यकता होती है?
जीवामृत तैयार करने के लिए गोबर, गोमूत्र, बेसन, गुड़ और बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे की उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है।
जीवामृत कितने दिनों में बनकर तैयार हो जाता है?
सभी आवश्यक घटकों को उचित अनुपात में मिलाने के पश्चात जीवामृत लगभग तीन दिनों में तैयार हो जाता है।
फसलों को कीटों से बचाने के लिए वकील यादव कौन से घोल तैयार करते हैं?
वे प्राकृतिक कीट नियंत्रण के लिए अग्न्यस्त्र और ब्रह्मास्त्र नामक वनस्पति आधारित जैविक घोल तैयार करते हैं।
अग्न्यस्त्र बनाने के लिए किन चीजों का उपयोग किया जाता है?
अग्न्यस्त्र बनाने के लिए गोमूत्र में नीम की पत्तियां, तीखी तंबाकू, हरी मिर्च और लहसुन मिलाकर तैयार किया जाता है।
ब्रह्मास्त्र में कौन सी वनस्पतियों की पत्तियां डाली जाती हैं?
ब्रह्मास्त्र में गोमूत्र के साथ नीम, करंज, सीताफल, अरंडी और धतूरे की कड़वी पत्तियों का मिश्रण तैयार किया जाता है।
वकील यादव ने जैविक खेती का प्रशिक्षण कहां से प्राप्त किया?
उन्होंने देवघर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से जैविक खेती और खाद निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·54 मिनट पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था की बीट पर काम करते हुए यह देखना महत्वपूर्ण है कि कैसे रासायनिक कृषि और मिलावटी खाद्य पदार्थों का काला बाजार जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। देवघर के वकील यादव द्वारा शुरू किया गया यह जैविक उपक्रम केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा और रासायनिक माफियाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में एक अहम कानूनी व सामाजिक संदेश देता है। यदि ऐसे जमीनी और पारदर्शी मॉडल को पुलिस और प्रशासन का संरक्षण मिले, तो नकली उर्वरकों के अवैध कारोबार पर स्वतः लगाम लगेगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षित होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·54 मिनट पहले

वकील यादव का यह मॉडल दिखाता है कि कैसे ग्रामीण स्तर पर कृषि और जनस्वास्थ्य दोनों को सुधारा जा सकता है। रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से न सिर्फ मिट्टी की सेहत गिर रही है, बल्कि खाद्य श्रृंखला में जहरीले तत्व भी घुल रहे हैं। यदि इस प्रकार के जैविक उपक्रमों को पंचायत और जिला प्रशासन स्तर पर बढ़ावा मिले, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और मिलावटी कृषि उत्पादों के अवैध नेटवर्क पर भी प्रभावी लगाम कसी जा सकेगी।

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