साइबर ठगी की रकम वापस पाने के लिए डॉ रक्षित टंडन ने दिए 5 मूलमंत्र, रायपुर में 300 पुलिस अधिकारियों को दी गई स्पेशल ट्रेनिंगमानसून बीतते ही निखर उठती है उदयपुर की प्राकृतिक खूबसूरती, बिना कोई टिकट खरीदे लें इन शानदार नजारों का आनंदकुंभ राशि 2027: 3 जून को खत्म होगी शनि साढ़ेसाती, 20 अक्टूबर को वक्री होकर फिर बढ़ाएगी मुश्किलेंवर्कआउट के अनुसार जिम वियर का सही चुनाव जानिए कब ढीले और कब टाइट कपड़े पहनना होता है फायदेमंदबैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि की उम्मीदों और मजबूत आर्थिक आंकड़ों से जापानी येन सात महीने के उच्च स्तर के करीब पहुंचादिवाली और छठ पूजा पर रेलवे का बड़ा तोहफा, योग नगरी ऋषिकेश से मुजफ्फरपुर के लिए शुरू होगी स्पेशल ट्रेनअमेरिका और ईरान तनाव के बीच अमेरिकी फेड फैसले पर टिकीं निफ्टी और सेंसेक्स की निगाहेंयूरोपीय फुटबॉल के सबसे महान दबदबों से पेरिस सेंट-जर्मेन की तुलना और महाद्वीपीय प्रभुत्व का इतिहासघर पर बनाएं बाजार से बेहतर आम का मीठा अचार, सालों-साल नहीं होगा खराबबोगनवेलिया के रंग-बिरंगे फूलों से सजाएं अपना घर, सितंबर में पौधा रोपने के 7 असरदार नियम
बोकारो के किसान ने मचान विधि में अपनाया सह-फसली मॉडल, मक्का और नेनुआ से कमाया 1.5 लाख का शुद्ध लाभझारखंड
9 सित॰ 2026, 12:02 pm (1 घंटे पहले)· 2

बोकारो के किसान ने मचान विधि में अपनाया सह-फसली मॉडल, मक्का और नेनुआ से कमाया 1.5 लाख का शुद्ध लाभ

झारखंड के बोकारो में जरीडीह प्रखंड के किसान शंकर सोरेन ने मचान खेती के बीच खाली बची जमीन पर मक्का उगाकर स्मार्ट कृषि का नया उदाहरण पेश किया है। एक एकड़ खेत में 45 हजार रुपये की लागत लगाकर वे 1.5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।

कृषि क्षेत्र में नवाचार और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से खेती को बेहद लाभदायक बनाया जा सकता है। झारखंड के बोकारो जिले में जरीडीह प्रखंड के रहने वाले पारंपरिक किसान शंकर सोरेन ने इसी अवधारणा को धरातल पर उतारकर दिखाया है। पीढ़ियों से खेती-किसानी से जुड़े शंकर सोरेन ने अपनी जमीन के एक-एक इंच का सही उपयोग करने के लिए एक नई सह-फसली तकनीक विकसित की है। उन्होंने मचान विधि से लगाई जाने वाली नेनुआ की फसल के नीचे खाली पड़ी जमीन पर मक्का की खेती करके एक ही खेत और एक ही मौसम में दोहरा मुनाफा हासिल किया है।

मचान खेती के खाली स्थान का स्मार्ट इस्तेमाल

नेनुआ जैसी बेलदार सब्जियों की खेती आमतौर पर बांस और तारों से बने मचान ढांचे पर की जाती है। शंकर सोरेन लंबे समय से मचान विधि से नेनुआ उगाते आ रहे हैं। इस प्रक्रिया के दौरान उन्होंने गौर किया कि मचान पर लताओं के फैलने के बावजूद जमीन पर कतारों के बीच लगभग 6 से 8 फीट का बड़ा फासला खाली पड़ा रह जाता है। इस खाली स्थान में खरपतवार उग आते थे या जमीन अप्रयुक्त रह जाती थी। शंकर सोरेन ने इस जगह का सदुपयोग करने की योजना बनाई। उन्होंने पाया कि मक्का एक ऐसी फसल है जो लगभग 6 फीट की दूरी वाले छायादार या आंशिक रूप से खुले स्थानों में भी आसानी से पनप सकती है। इसी व्यावहारिक विचार के साथ उन्होंने जून महीने में अपनी एक एकड़ जमीन पर नेनुआ और मक्का की बुवाई एक साथ शुरू कर दी।

ये भी पढ़ें

बुवाई का समय और फसल तैयार होने की समय-सीमा

इस सह-फसली मॉडल की सबसे बड़ी खासियत दोनों फसलों के चक्र और समय-सीमा का सटीक सामंजस्य है। शंकर सोरेन बताते हैं कि जून के महीने में लगाई गई नेनुआ की फसल बुवाई के महज 60 से 65 दिनों के भीतर पूरी तरह तैयार होकर उपज देने लगती है। दूसरी तरफ, उसी खेत में कतारों के बीच बोया गया मक्का लगभग 70 दिनों में पककर तैयार हो जाता है। इसका अर्थ यह है कि किसान को दो अलग-अलग चक्रों का इंतजार नहीं करना पड़ता और लगभग एक ही समय सीमा के दौरान दो अलग-अलग फसलों की उपज एक साथ मिल जाती है। इससे न केवल समय की बचत होती है बल्कि सिंचाई, खाद और खेत की देखभाल में लगने वाली मेहनत भी आधी रह जाती है।

उत्पादन और कमाई का पूरा गणित

एक एकड़ खेत में इस एकीकृत विधि से खेती करने पर उत्पादन के आंकड़े बेहद उत्साहजनक रहे हैं। शंकर सोरेन के अनुसार एक एकड़ जमीन से लगभग 40 क्विंटल नेनुआ और उसी खाली जगह से करीब 25 क्विंटल मक्का प्राप्त होता है। इस प्रकार दोनों फसलों को मिलाकर कुल 65 क्विंटल की संयुक्त उपज हासिल होती है। वित्तीय पहलुओं पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि एक एकड़ खेत में इस दोहरी खेती को तैयार करने में लगभग 45 हजार रुपये की कुल लागत आती है। जब उत्पाद को बाजार में बेचा जाता है तो औसतन 30 से 35 रुपये प्रति किलोग्राम का मंडी भाव मिल जाता है। कुल 65 क्विंटल (6500 किलोग्राम) उपज की बिक्री से लगभग 1.95 लाख रुपये की कुल आय होती है। इसमें से 45 हजार रुपये की शुरुआती लागत को घटा देने पर किसान को करीब 1.50 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त होता है।

जोखिम प्रबंधन और अन्य किसानों के लिए सीख

इस दोहरी खेती मॉडल का एक बड़ा लाभ बाजार के जोखिम को नियंत्रित करना भी है। शंकर सोरेन का मानना है कि केवल एक फसल पर निर्भर रहने से यदि बाजार में उस सब्जी के दाम गिरते हैं तो किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन जब खेत में दो फसलें एक साथ मौजूद हों, तो एक फसल की कीमत कम होने पर दूसरी फसल उसकी भरपाई कर देती है। उन्होंने अन्य किसानों को सलाह दी है कि वे अपने खेतों में उपलब्ध जमीन के हर हिस्से का अधिकतम उपयोग करें। यदि फसलों की कतारों के बीच खाली स्थान बचता है तो वहां किसी पूरक फसल की बुवाई करके अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है।

सवाल-जवाब

शंकर सोरेन ने मचान खेती के नीचे कौन सी दूसरी फसल उगाई?
उन्होंने मचान पर उगने वाली नेनुआ की फसल के नीचे बची खाली जमीन पर मक्का की खेती की।
इस सह-फसली खेती की बुवाई किस महीने में की जाती है?
नेनुआ और मक्का दोनों फसलों की बुवाई जून महीने में एक साथ की जाती है।
दोनों फसलों को तैयार होने में कितना समय लगता है?
नेनुआ की फसल 60 से 65 दिनों में और मक्का लगभग 70 दिनों में पककर तैयार हो जाता है।
एक एकड़ जमीन से कुल कितना उत्पादन प्राप्त होता है?
एक एकड़ से लगभग 40 क्विंटल नेनुआ और 25 क्विंटल मक्का मिलाकर कुल 65 क्विंटल उत्पादन मिलता है।
एक एकड़ खेती की लागत और शुद्ध मुनाफा कितना है?
एक एकड़ में लागत करीब 45 हजार रुपये आती है और 1.95 लाख रुपये की बिक्री पर लगभग 1.50 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा मिलता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR