झारखंड की राजधानी रांची में एक पांचवीं कक्षा के छात्र ने अपनी वैज्ञानिक सोच से सबको हैरान कर दिया है। जेवीएम श्यामली स्कूल में पढ़ने वाले मोहम्मद अंशुमन ने ग्रेविटी स्टोरेज का एक अनूठा मॉडल तैयार किया है, जिसकी मदद से भविष्य की जरूरतों के लिए ऊर्जा को सुरक्षित रखा जा सकता है। यह पूरा मॉडल पोटेंशियल एनर्जी और ग्रेविटेशनल फोर्स के वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है और बिजली संकट से निपटने का एक नया रास्ता दिखाता है।
काम करने का तरीका और तकनीकी प्रक्रिया
इस प्रोजेक्ट की कार्यप्रणाली को समझाते हुए मोहम्मद अंशुमन ने बताया कि उन्होंने इसके लिए एक मजबूत रस्सी और बाजार में मिलने वाले भारी तौलने वाले बाट का इस्तेमाल किया है। इस पूरी व्यवस्था में ऊपर की तरफ एक मोटर से जुड़ा हुआ व्हील लगाया गया है। जब रस्सी के सहारे उस भारी बाट को ऊपर की तरफ खींचा जाता है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण उसमें स्थितिज ऊर्जा यानी पोटेंशियल एनर्जी जमा हो जाती है।
ऊर्जा संरक्षण के मूल नियम के मुताबिक ऊर्जा को न तो पैदा किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, बल्कि इसका रूप बदला जाता है। इसी सिद्धांत के तहत जब उस भारी बाट को दोबारा नीचे की ओर लाया जाता है, तो स्टोर की गई ऊर्जा का उपयोग बिजली बनाने के लिए किया जाता है। बाट का चयन उन्होंने इसलिए किया क्योंकि किसी भारी चीज को ऊपर उठाने के लिए यह एक सुलभ और सटीक विकल्प साबित हुआ।
ग्लोबल प्रोजेक्ट से मिली प्रेरणा और यूट्यूब की भूमिका
छात्र ने बताया कि इस अनोखी तकनीक का इस्तेमाल दुनिया के बड़े स्तर पर भी हो रहा है। स्विट्जरलैंड की एक कंपनी ने इस तरह की परियोजना की शुरुआत की थी और अब उसी कंपनी ने चीन में भी इसे लागू किया है, जहां इसी विधि से बड़े पैमाने पर ऊर्जा को स्टोर करके रखा जा रहा है। मोहम्मद अंशुमन को इस प्रोजेक्ट को बनाने का विचार यूट्यूब पर वीडियो देखने के दौरान आया था।
वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो देख रहे थे तभी उनकी नजर इस तकनीक पर पड़ी। भारत में बिजली की समस्या को गहराई से महसूस करते हुए उन्होंने चार-पांच साधारण चीजों की मदद से इस मॉडल को अपने घर पर ही तैयार कर लिया। उनकी यह छोटी सी कोशिश बड़े स्तर पर ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ा संदेश देती है।


















