कर्नाटक के बेलगावी जिले में गन्ना उत्पादक किसानों और चीनी मिल मालिकों के बीच मूल्य निर्धारण को लेकर चल रहा विवाद और गहरा गया है। लाभकारी खरीद मूल्य तय करने के लिए किसानों ने प्रशासन को नई समय-सीमा दे दी है। प्रदर्शनकारी किसानों का स्पष्ट कहना है कि यदि तय अवधि के भीतर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे और राज्यव्यापी ‘जेल भरो’ आंदोलन छेड़ देंगे। 4 नवंबर को यह नई चेतावनी तब जारी की गई, जब लोक निर्माण विभाग के मंत्री और बेलगावी जिले के प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली द्वारा बुलाई गई दो दौर की बातचीत पूरी तरह बेनतीजा साबित हुई। 3 नवंबर को आयोजित इन बैठकों में किसान प्रतिनिधियों और चीनी मिल प्रबंधन के बीच किसी भी बिंदु पर सहमति नहीं बन सकी थी।
प्रस्ताव खारिज और दरों पर बड़ा अंतर
जमीनी हालात की गंभीरता और किसानों के बढ़ते आक्रोश के बीच सतीश जारकीहोली बुधवार को चीनी मिल संचालकों के साथ नए सिरे से बातचीत की मेज पर हैं। किसान संघों ने पहले ही दो टूक कह दिया है कि जब तक उनकी अपेक्षा के अनुरूप दर तय नहीं होगी, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। बैठकों के दौरान मिल प्रबंधन ने किसानों को 3,500 रुपए प्रति टन की दर से भुगतान करने की पेशकश रखी, जिसे उत्पादकों ने फौरन ठुकरा दिया। किसानों का तर्क है कि बढ़ती लागत के मुकाबले यह दर बेहद कम है। आंदोलनकारी किसानों ने चीनी मिलों से 4,500 रुपए प्रति टन के भुगतान की मांग की है, साथ ही राज्य सरकार से 1,000 रुपए प्रति टन की अतिरिक्त सहायता की मांग जोड़ी है। इस प्रकार किसानों की कुल मांग 5,500 रुपए प्रति टन तक पहुंच गई है।
किसान नेतृत्व का कड़ा रुख
वार्ता के बेनतीजा रहने पर किसान नेता चूनाप्पा पुजारी ने अपनी नाराजगी जाहिर की। चूनाप्पा पुजारी ने कहा कि बिना किसी ठोस फैसले के लगातार बैठकें बुलाने का कोई औचित्य नहीं है, किसान 3,500 रुपए प्रति टन का प्रस्ताव कतई स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी मांग उठाई कि मुख्यमंत्री डीके. शिवकुमार आगे आएं और राज्य सरकार की ओर से 1,000 रुपए प्रति टन की सब्सिडी जारी करने का आधिकारिक ऐलान करें। उन्होंने सचेत किया कि यदि शासन ने किसानों की इस मांग को अनसुना करना जारी रखा, तो उसके परिणाम काफी गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मसले का समाधान न निकलने की स्थिति में कर्नाटक विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार को विधानसभा के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध का सामना करना पड़ेगा।
कई जिलों में तेज हुआ विरोध प्रदर्शन
गन्ने के मूल्य का यह असंतोष केवल बेलगावी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मैसूरु और मांड्या जैसे दक्षिणी जिलों में भी देखने को मिल रहा है। मैसूरु में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने उपायुक्त कार्यालय परिसर के भीतर प्रवेश करने की कोशिश की, जिससे वहां अफरातफरी की स्थिति बन गई। वहीं मांड्या जिले में गन्ना उत्पादकों ने स्थानीय कन्नड़ कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उपायुक्त कार्यालय के समक्ष जोरदार धरना दिया और राज्य तथा केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में नारेबाजी की। बीते कुछ हफ्तों से पूरे कर्नाटक में आंदोलन की धार तेज हुई है। किसान लंबी पदयात्राएं कर रहे हैं, राज्यभर में विरोध मार्च निकाल रहे हैं और प्रमुख सड़कों को अवरुद्ध कर रहे हैं। इससे पूर्व आंदोलनकारियों ने बेहतर दर की मांग उठाते हुए पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर 30 घंटे से अधिक समय तक चक्का जाम रखा था।
पुरानी बैठकों के वादों पर अमल नहीं
गन्ना खरीद दरों को लेकर यह गतिरोध काफी समय से खिंचता चला आ रहा है। 26 अक्टूबर को बेलगावी स्थित सुवर्ण विधान सौधा में सरकार, मिल मालिकों और किसान प्रतिनिधियों के बीच विस्तृत वार्ता हुई थी, लेकिन वह बैठक भी बेनतीजा रही थी। उस दौरान सरकार की ओर से चीनी मिलों से अपील की गई थी कि वे किसानों को प्रति टन 250 रुपए का अतिरिक्त भुगतान करें। हालांकि कई मिलों ने इस व्यवस्था को धरातल पर लागू नहीं किया, जिससे किसानों का असंतोष और ज्यादा भड़क गया और वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए।



















