बिहार के पूर्णिया शहर में 4 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी की तरफ से ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा आयोजित की गई। इस बड़े राजनीतिक कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा विशेष रूप से शामिल हुए। इस दौरान मंच और पदयात्रा में बिहार सरकार के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल, रत्नेश सदा समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी तादाद में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में असम के मुख्यमंत्री ने चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बावजूद जुटी विशाल भीड़ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि इतनी तेज गर्मी में भी लोगों की यह मौजूदगी लोकतंत्र के प्रति उनके उत्साह को दर्शाती है, और वे सब मिलकर इस पदयात्रा को आगे बढ़ाएंगे।
चुनावी हार और वोट चोरी के आरोपों पर पलटवार
विपक्ष की ओर से चुनावों में धांधली और वोट चोरी के लगातार लगाए जा रहे आरोपों पर हिमंता बिस्वा सरमा ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के प्रमुख नेता देश भर में यह नैरेटिव बनाने का प्रयास कर रहे हैं कि चुनावों में वोट की चोरी हो रही है। उन्होंने इस बात को खारिज करते हुए तंज कसा कि देश में चोरी जरूर हो रही है, लेकिन वह जनादेश या मतों की चोरी नहीं बल्कि जनता के दिलों की चोरी है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भाजपा ने जनसेवा के जरिए आम जनता का दिल जीता है, जिसे विरोधी दल पचा नहीं पा रहे हैं।
असम के मुख्यमंत्री ने विपक्ष की हताशा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब ऐतिहासिक स्थलों और प्रतीकों से विदेशी आक्रांताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, तो विपक्षी खेमे में घबराहट साफ दिख रही है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि इतिहास के पुनर्लेखन और आक्रांताओं के महिमामंडन के खत्म होने के बाद अब विपक्ष यह सोचकर परेशान है कि वे चुनाव कैसे जीतेंगे। उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी दल न तो असम में जीत सकते हैं, न पश्चिम बंगाल में और न ही बिहार में उन्हें सफलता मिलने वाली है। व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष को चुनाव जीतने की इतनी ही ललक है तो उन्हें पड़ोसी मुल्क भेज दिया जाना चाहिए, जहां वे अपनी किस्मत आजमा सकते हैं।
दीपावली पर गुलाब वाले वीडियो पर तीखा कटाक्ष
कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से मुखातिब होते हुए असम के मुख्यमंत्री ने एक सोशल मीडिया वीडियो का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मंगलवार को राहुल गांधी ने एक वीडियो साझा किया था, जिसमें वे हाथ में गुलाब लिए प्रधानमंत्री को दीपावली की शुभकामनाएं दे रहे थे। इस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं का बुनियादी ज्ञान होना बेहद आवश्यक है। भारतीय रीति-रिवाजों में दीपावली जैसे पावन पर्व की अपनी विशेष परंपराएं हैं, जबकि गुलाब का आदान-प्रदान आमतौर पर वैलेंटाइन डे पर देखा जाता है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक समझ के अभाव में इस तरह के प्रतीकात्मक वीडियो जारी करना केवल राजनीतिक अपरिपक्वता को दर्शाता है।
सड़क के हंगामे को छोड़कर संसद में बहस की दी सलाह
संसदीय मर्यादा की चर्चा करते हुए असम के मुख्यमंत्री ने विपक्ष के नेता के दायित्वों की याद दिलाई। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि यदि किसी नेता के पास विपक्ष के नेता का संवैधानिक पद है, तो प्रधानमंत्री और सरकार के साथ नीतिगत मुद्दों पर तीखी और सार्थक बहस कहां होनी चाहिए। क्या ऐसी गंभीर राजनीतिक बहसें गलियों और सड़कों पर होनी चाहिए या फिर देश के सर्वोच्च विधायी सदन, यानी संसद के भीतर होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनी हुई संसद ही विचार-विमर्श और नीति निर्माण का सबसे उचित मंच है।
उन्होंने कहा कि भारत एक परिपक्व और संप्रभु लोकतंत्र है, जिसकी तुलना अन्य अस्थिर पड़ोसी देशों से नहीं की जा सकती। जनता को सड़कों पर लाकर अराजकता फैलाने या विदेशी संपर्कों के जरिए आंतरिक राजनीति को प्रभावित करने की कोशिशों को गलत बताते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि विपक्ष को संसद में शांतिपूर्ण ढंग से चर्चा में भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता संसद में गंभीर तर्कों को सुनना चाहती है, न कि केवल निरर्थक शोर-शराबा।
चुनावी राजनीति में दिल जीतने की नसीहत
अपने संबोधन के अंतिम चरण में असम के मुख्यमंत्री ने चुनावी राजनीति में सफलता का मूलमंत्र साझा किया। उन्होंने कहा कि जो लोग बार-बार वोट चोरी का बहाना बनाते हैं, उन्हें जमीनी राजनीति और जनता से जुड़ाव का तरीका सीखना चाहिए। लगातार मिलने वाली चुनावी हार के बाद शिकायतों का रोना रोने और व्यवस्था पर दोष मढ़ने से कभी चुनावी सफलता हासिल नहीं हो सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव जीतने का एकमात्र रास्ता जनता के बीच जाकर उनका विश्वास और दिल जीतना है। प्रशासनिक प्रक्रियाओं या एसआईआर जैसी व्यवस्थाओं के खिलाफ गैर-जरूरी हंगामा खड़ा करने से किसी भी राजनीतिक दल को कोई चुनावी फायदा नहीं मिलने वाला है।

















