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जयपुर के रोजदा में गन्ने की खेती बनी किसानों की ताकत, प्रति बीघा 60 हजार रुपये तक शुद्ध बचतराजस्थान
3 नव॰ 2026, 8:41 am (5 मिनट पहले)· 0

जयपुर के रोजदा में गन्ने की खेती बनी किसानों की ताकत, प्रति बीघा 60 हजार रुपये तक शुद्ध बचत

राजस्थान के जयपुर ग्रामीण स्थित रोजदा गांव में आधे से अधिक काश्तकार गन्ने की खेती कर रहे हैं, जहां एक बीघा में 20 से 25 हजार रुपये की लागत लगाकर किसान 80 हजार रुपये तक की उपज बेच रहे हैं।

राजस्थान की राजधानी जयपुर के ग्रामीण इलाके में स्थित रोजदा गांव ने पारंपरिक खेती के ढर्रे को तोड़कर गन्ना उत्पादन में अपनी खास साख स्थापित कर ली है। आज यह इलाका आसपास की तहसीलों और गांवों में मीठी क्रांति के केंद्र के रूप में पहचाना जाता है। गांव की कृषि योग्य जमीन पर आधे से ज्यादा किसान गन्ने की फसल उगा रहे हैं। सामान्य फसलों के मुकाबले कम खर्च में मजबूत पैदावार और स्थानीय मंडियों में लगातार बनी रहने वाली मांग ने इस नकदी फसल को यहां के ग्रामीणों की आमदनी का सबसे भरोसेमंद जरिया बना दिया है।

प्रति बीघा खर्च और मुनाफे का पूरा गणित

रोजदा के स्थानीय काश्तकार रामधन कुमावत के अनुसार गन्ने की फसल शारीरिक परिश्रम की मांग जरूर करती है, लेकिन मंडी में मिलने वाला दाम सारी मेहनत का उचित फल दे देता है। एक बीघा खेत में बुवाई के लिए तकरीबन 10 क्विंटल गन्ने के बीज की जरूरत पड़ती है। जब फसल पूरी तरह पककर तैयार होती है, तो उसी एक बीघा जमीन से लगभग 10 टन तक गन्ने का कुल उत्पादन हासिल हो जाता है।

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लागत और कमाई के ब्योरे को समझाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि एक बीघा में जुताई, बीज, खाद और रखरखाव मिलाकर लगभग 20 से 25 हजार रुपये का कुल खर्च आता है। फसल तैयार होने के बाद बाजार में उसे बेचने पर 70 से 80 हजार रुपये तक की कुल आमदनी प्राप्त हो जाती है। इस प्रकार सारा कृषि खर्च घटाने के उपरांत किसान के पास प्रति बीघा 45 से 60 हजार रुपये तक की शुद्ध बचत बचती है। यही ठोस आर्थिक लाभ इलाके के नए किसानों को भी गन्ने की तरफ तेजी से मोड़ रहा है।

चार दशकों से जारी है अंगद कुमावत का अनुभव

गांव के वरिष्ठ किसान अंगद कुमावत पिछले करीब 40 वर्षों से अनवरत गन्ने की खेती करते आ रहे हैं। चार दशक लंबे अपने अनुभव को साझा करते हुए वे बताते हैं कि समय के साथ गन्ने की फसल हमेशा किसानों के लिए घाटे से बचाने वाली साबित हुई है। हर सत्र में पैदावार का स्तर ऊंचा रहता है और स्थानीय बाजारों में गन्ने का उठाव कभी धीमा नहीं पड़ता।

बाजार में बिक्री के स्वरूप पर बात करते हुए अंगद कुमावत ने जानकारी दी कि खुदरा और थोक स्तर पर गन्ने का एक नग लगभग 15 रुपये के भाव से आसानी से बिक जाता है। गन्ने का सीधे नग के हिसाब से बिकना किसानों के हाथ में त्वरित नकदी पहुंचाने का काम करता है, जिससे उन्हें अपनी उपज को औने-पौने दामों पर बेचने की विवशता नहीं रहती।

समय पर खाद, सिंचाई और देखरेख से बढ़ता है उत्पादन

गांव के अनुभवी किसानों का मानना है कि गन्ने की अधिक पैदावार लेने के लिए कैलेंडर के अनुसार सही समय पर बुवाई करना, नियमित सिंचाई चक्र बनाए रखना और संतुलित जैविक व रासायनिक खाद का प्रयोग बेहद जरूरी है। फसल की नियमित निगरानी कीटों और रोगों से बचाव करती है, जिससे गन्ने के तने का वजन और मिठास दोनों बेहतर होते हैं।

हालांकि किसानों ने यह सावधानी भी जोड़ी है कि खेती की अंतिम लागत और उससे होने वाली शुद्ध आमदनी हर खेत की मिट्टी की गुणवत्ता, बदलते मौसम के मिजाज, पानी की उपलब्धता और उस समय चल रहे बाजार भाव के आधार पर थोड़ी बहुत घट या बढ़ सकती है। इसके बावजूद गन्ने का बुनियादी अर्थशास्त्र अधिकांश परिस्थितियों में किसान के पक्ष में ही रहता है।

फसल विविधीकरण की ओर बढ़ रहे आसपास के क्षेत्र

रोजदा गांव की इस आर्थिक कामयाबी ने आसपास की ग्राम पंचायतों के काश्तकारों को भी परंपरागत खेती के दायरे से बाहर निकलने का हौसला दिया है। जो किसान पहले केवल पारंपरिक अनाज या मौसमी फसलों की अनिश्चितता से जूझते थे, वे अब फसल विविधीकरण अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। रोजदा के किसानों की इस सामूहिक पहल ने यह सिद्ध किया है कि यदि सही फसल का चुनाव सूझबूझ से किया जाए और वैज्ञानिक पद्धति से श्रम किया जाए, तो सीमित रकबे में भी मजबूत आर्थिक सुरक्षा पाई जा सकती है।

सवाल-जवाब

रोजदा गांव में कितने किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं?
रोजदा गांव में आधे से अधिक किसान अब गन्ने की खेती को अपनी आय का प्रमुख साधन बना चुके हैं।
एक बीघा में गन्ने की खेती पर कितना खर्च आता है?
एक बीघा जमीन पर गन्ने की फसल तैयार करने में लगभग 20 से 25 हजार रुपये का खर्च आता है।
एक बीघा गन्ने से किसान को कितनी कुल आमदनी और शुद्ध बचत होती है?
तैयार फसल से 70 से 80 हजार रुपये की कुल कमाई होती है, जिसमें से खर्च निकालकर किसान को 45 से 60 हजार रुपये की शुद्ध बचत होती है।
एक बीघा में गन्ने की बुवाई और पैदावार का अनुपात क्या है?
एक बीघा में करीब 10 क्विंटल गन्ने की बुवाई करने पर लगभग 10 टन तक कुल उत्पादन प्राप्त हो जाता है।
बाजार में गन्ने का एक नग किस भाव में बिकता है?
बाजार में गन्ने का एक नग लगभग 15 रुपये की दर से बिकता है।
रोजदा गांव किस जिले और राज्य में स्थित है?
रोजदा गांव राजस्थान राज्य के जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
किसान अंगद कुमावत कितने समय से गन्ने की खेती कर रहे हैं?
अंगद कुमावत पिछले करीब 40 वर्षों से लगातार गन्ने की खेती कर रहे हैं।
गन्ने की अधिक पैदावार के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
सही समय पर बुवाई, समय पर सिंचाई, उचित खाद और फसल की नियमित देखभाल अधिक पैदावार के लिए आवश्यक है।
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