महाराष्ट्र की सियासत में जुबानी हमले तेज हो गए हैं, जहां शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कई समसामयिक मुद्दों पर मुखर होकर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने दिवाली से पहले बृहन्मुंबई नगर निगम के पटाखे विरोधी कदमों, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट और रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संबोधन के दौरान बने हालात पर विस्तृत प्रतिक्रिया दी। निरुपम ने सहयोगी दलों के बीच होने वाले संवाद को बेहद स्वाभाविक करार दिया, जबकि विपक्ष और मशहूर हस्तियों के रुख पर कड़े सवाल खड़े किए।
एनसीपी नेताओं की केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात पर निरुपम का रुख
उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई बैठक को संजय निरुपम ने सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि इस मुलाकात को लेकर सोशल मीडिया पर बेवजह की अटकलें लगाई जा रही हैं और मनगढ़ंत बातें बनाई जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनसीपी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का एक प्रमुख घटक दल है, और गठबंधन के सहयोगियों का वरिष्ठ नेताओं से मिलकर अपने विचार साझा करना एक निरंतर चलने वाली व्यवस्था का हिस्सा है।
निरुपम के अनुसार, इस संवाद के दौरान महाराष्ट्र के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रमों या केंद्र सरकार से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा संभव है। जब कई दल मिलकर सरकार चलाते हैं, तो समन्वय स्थापित करने के लिए ऐसे संवाद जरूरी होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बैठक में कौन शामिल रहा और किसकी मौजूदगी नहीं थी, इसके पीछे बेवजह के निहितार्थ तलाशना कतई तर्कसंगत नहीं है।
दीवाली, आतिशबाजी और दीया मिर्ज़ा पर टिप्पणी
बृहन्मुंबई नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे पटाखे विरोधी अभियान और इस संबंध में अभिनेत्री दीया मिर्ज़ा के बयानों को लेकर भी शिवसेना प्रवक्ता ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि दीपोत्सव पर पटाखे जलाना और पूरे परिवेश को रोशन करना एक पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है। निरुपम ने सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि क्या अभिनेत्री ने कभी अपने समुदाय के लोगों द्वारा शुक्रवार के दिन सार्वजनिक सड़कों पर नमाज अदा करने की व्यवस्था का विरोध किया है?
उन्होंने कहा कि अभिनेत्री दूसरों की मान्यताओं और रीति-रिवाजों पर टिप्पणी कर रही हैं, जबकि उन्होंने अन्य धार्मिक गतिविधियों पर कभी इस तरह की आपत्ति नहीं जताई। निरुपम का मानना था कि किसी दूसरे धर्म की मान्यताओं पर सवाल उठाने से पहले व्यक्ति में अपने समुदाय के भीतर मौजूद कुरीतियों और समस्याओं पर बोलने का साहस होना चाहिए।
बॉम्बे हाईकोर्ट के नियम और त्योहार का संतुलन
स्थानीय नागरिक निकाय की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए संजय निरुपम ने कहा कि मुंबई हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत पटाखे फोड़ने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। इन नियमों का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि संतुलन बना रहे।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि प्रकाश का पर्व दिवाली पूरे उल्लास के साथ मनाया जाना चाहिए। जो नागरिक अपनी परंपरा के मुताबिक आतिशबाजी करना चाहते हैं, वे तय की गई सीमाओं के भीतर रहकर अपने निजी परिसरों में ऐसा कर सकते हैं। उनका कहना था कि त्योहार मनाने की स्वतंत्रता और पर्यावरण से जुड़ी जरूरी सीमाओं का ध्यान रखना दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।
मल्लिकार्जुन खरगे के भाषण और वायरल वीडियो पर तंज
रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संबोधन के दौरान कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए हंगामे और शोर-शराबे के वायरल वीडियो पर निरुपम ने कड़ा प्रहार किया। इस वीडियो में कांग्रेस अध्यक्ष बार-बार अपने ही कार्यकर्ताओं से शांत रहने की गुहार लगाते हुए नजर आ रहे हैं। साथ ही वे यह चेतावनी देते भी सुनाई दे रहे हैं कि अगर कार्यकर्ता शांत नहीं बैठे, तो वे पूरे एक घंटे तक अपना भाषण जारी रखेंगे।
संजय निरुपम ने इस स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि जब कांग्रेस पार्टी के अपने कार्यकर्ता ही अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की बात सुनने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं, तो देश की आम जनता उनकी बातों को गंभीरता से कैसे ले सकती है? उन्होंने कहा कि यह दृश्य पार्टी के भीतर नेतृत्व के प्रभाव की असलियत बयां करता है।
कांग्रेस संगठन में नेतृत्व की स्थिति पर सवाल
शिवसेना प्रवक्ता ने मल्लिकार्जुन खरगे को कांग्रेस के लिए एक राजनीतिक बोझ करार देते हुए कहा कि पार्टी के आंतरिक ढांचे में उनके विचारों को लेकर कोई उत्साह नहीं दिखता। उन्होंने पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई खरगे की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस बयान के बाद से उनकी स्वीकार्यता में भारी गिरावट आई है।
निरुपम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई नेता उनकी सार्वजनिक छवि को बेहतर बनाने के प्रयास में जुटे रहते हैं, लेकिन जमीन पर आम नागरिकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी छवि प्रभावशाली नहीं बन पाई है। उन्होंने खरगे की भाषण शैली और संवाद क्षमता पर भी सवाल उठाया और कहा कि उनके वक्तव्यों में वह धार और राजनीतिक प्रभाव दिखाई नहीं देता जो एक बड़े विपक्षी दल के नेता में होना चाहिए।


















