केरल हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन, उनकी बेटी टी. वीना और उनके पति (विधायक व पूर्व मंत्री) पी.ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत नियमित प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर विधिवत जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। यह कानूनी कार्रवाई कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) तथा एक्जालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा साझा किए गए साक्ष्यों के आधार पर होगी।
शुरुआती जांच के सरकारी फैसले पर कानूनी चुनौती
जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने वकील के.एम. शाहजहां द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए यह सख्त आदेश सुनाया। याचिकाकर्ता ने राज्य पुलिस के उस रुख को अदालत में चुनौती दी थी, जिसके तहत केंद्रीय एजेंसी द्वारा साझा की गई जानकारी के आधार पर सीधे आपराधिक मामला दर्ज करने के बजाय केवल शुरुआती पड़ताल की प्रक्रिया अपनाई जा रही थी। शाहजहां ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि प्रवर्तन निदेशालय की पड़ताल में ऐसे स्पष्ट तथ्य उजागर हुए हैं जो प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत संज्ञेय अपराधों की ओर संकेत करते हैं।
याचिका में इस बात पर जोर दिया गया था कि मामले की औपचारिक जांच विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) के सुपुर्द की जाए। इसके अतिरिक्त, राज्य पुलिस प्रमुख और विजिलेंस डायरेक्टर को 22 सितंबर को सौंपी गई लिखित शिकायतों पर तत्काल ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी अदालत के समक्ष उठाई गई थी।
राज्य सरकार की दलीलें और विशेष जांच दल का गठन
अदालत की कार्यवाही के दौरान राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल जाजू बाबू ने इस याचिका की विचारणीयता पर प्रारंभिक आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने दलील दी कि केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा सामग्री साझा किए जाने मात्र से राज्य की अपनी जांच एजेंसी का अधिकार सीमित नहीं हो जाता। राज्य की एजेंसी को इस बात की स्वतंत्र पड़ताल करने का पूरा अधिकार है कि प्राप्त दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया कोई ऐसा अपराध बनता है अथवा नहीं जिसके लिए सीधे प्राथमिकी दर्ज करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो।
विदित रहे कि सीधे प्राथमिकी दर्ज करने के स्थान पर राज्य प्रशासन ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस जांच दल की कमान क्राइम ब्रांच के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस एच. वेंकटेश को सौंपी गई थी, ताकि वे आरोपों की शुरुआती पड़ताल कर सकें। हालांकि, अदालत ने इस प्रक्रिया को अपर्याप्त मानते हुए अब सीधे नियमित आपराधिक मामला दर्ज करने का रास्ता साफ कर दिया है।
3.28 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन और रिश्वतखोरी के आरोप
यह पूरा विवाद कोच्चि स्थित मिनरल-प्रोसेसिंग कंपनी कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और वीना विजयन की कंपनी एक्जालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के आपसी व्यावसायिक संबंधों के इर्द-गिर्द घूमता है। केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड ने टी. वीना की कंपनी को लगभग 3.28 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया था। आरोप है कि इस भारी-भरकम भुगतान के एवज में कंपनी को कोई वास्तविक सेवा प्रदान नहीं की गई।
जांच एजेंसी का मानना है कि यह वित्तीय हस्तांतरण किसी अनुचित समझौते या रिश्वतखोरी की व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है। इसी आधार पर एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा अन्य सुसंगत कानूनी प्रावधानों के तहत स्वतंत्र भ्रष्टाचार जांच की आवश्यकता जताई। केंद्रीय एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 66(2) के तहत उपलब्ध वैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए यह समस्त गोपनीय सामग्री और साक्ष्य केरल पुलिस प्रमुख को भेजे थे, जिसमें पिनराई विजयन, टी. वीना और पी.ए. मोहम्मद रियास से जुड़ी सामग्रियां व आरोप शामिल थे।



















