मध्य प्रदेश के उज्जैन में देवास रोड पर स्थित होटल श्री गंगा में शनिवार की रात एक भीषण औद्योगिक दुर्घटना सामने आई। होटल परिसर के दाईं ओर निर्मित अपशिष्ट शोधन कक्ष की सफाई करने उतरे चार कर्मचारियों की दम घुटने और जहरीली गैस की चपेट में आने से जान चली गई। शनिवार रात लगभग 10:30 बजे घटित इस दर्दनाक घटनाक्रम में चैंबर के भीतर अत्यधिक फिसलन, गहराई और रासायनिक गैसों के जमाव के कारण सफाईकर्मी अंदर ही बेसुध होकर गिर पड़े। उन्हें बचाने के प्रयास में उतरे अन्य सहकर्मी भी इन जहरीली वाष्पों के संपर्क में आकर गंभीर रूप से अस्वस्थ हो गए, जिन्हें तुरंत चिकित्सकीय देखरेख में पहुंचाया गया।
कन्फेक्शनरी कचरे के चैंबर में जमा जहरीली गैस बनी काल
होटल के दाहिने हिस्से में स्थित यह वेस्टेज चैंबर मुख्य रूप से मिष्ठान, बेकरी और डेयरी निर्माण इकाई से निकलने वाले अवशिष्टों को एकत्रित करने के लिए बनाया गया था। इस भूमिगत कक्ष में निर्माण प्रक्रिया से निकला मैला पानी, चाशनी, घी, तेल और अन्य जैविक अवशिष्ट बहकर आते हैं, जो धीरे-धीरे नालियों की ओर प्रवाहित होते हैं। लंबे समय तक जैविक पदार्थों के जमाव और बहाव अवरुद्ध होने से ऐसे बंद कक्षों में अत्यंत विषैली गैसें एकत्र हो जाती हैं। नियमित सफाई अभियान के तहत कर्मचारी जब इस गहरे कक्ष में उतरे, तब वहां ऑक्सीजन की भारी कमी और विषैले धुएं के कारण वे तुरंत अचेत हो गए तथा बाहर निकलने का कोई सुरक्षित मार्ग नहीं पा सके।
भीतर फंसे कर्मियों की चीख-पुकार और हलचल बंद होने पर होटल के अन्य कर्मचारियों ने तत्काल बचाव की कोशिश की। राहत पहुंचाने उतरे दो कर्मचारी भी चैंबर के अंदर व्याप्त सघन गैस के असर से अचेत होने लगे, जिससे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। इन प्रभावित सहकर्मियों को भी बाद में गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।
डेढ़ घंटे चला जटिल बचाव अभियान
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, स्थानीय पुलिस बल, एम्बुलेंस और नागरिक सुरक्षा दल तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। बंद और संकरे चैंबर की सामान्य सीढ़ियों अथवा संकीर्ण मुख से अचेत पड़े कर्मियों को खींच पाना पूरी तरह असंभव था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसपी प्रदीप शर्मा के सीधे निर्देशन में आपातकालीन तकनीकी दल ने मोर्चा संभाला। बचाव दल ने भारी इलेक्ट्रिक कटर मशीनों का सहारा लेकर चैंबर के बाहरी कंक्रीट हिस्से को काटकर बड़ा निकास द्वार तैयार किया।
लगभग डेढ़ घंटे तक चले इस सघन बचाव अभियान के बाद चारों श्रमिकों को एक-एक कर बाहर निकाला गया। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने आपातकालीन प्रक्रिया के तहत पीड़ितों को सीपीआर देकर सांसें लौटाने का प्रयास किया और उन्हें अविलंब निकटवर्ती चिकित्सालय पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल के चिकित्सकों ने जांच के उपरांत चारों कर्मियों को मृत घोषित कर दिया। बचाव कार्य के दौरान विषाक्त वातावरण और मलबे से जूझते हुए एक पुलिस उपनिरीक्षक भी घायल हुए हैं।
हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों का विवरण
इस दुखद दुर्घटना में जान गंवाने वाले चारों व्यक्तियों की पहचान प्रशासनिक स्तर पर स्थापित की गई है, जिनमें स्थानीय और अंतरराज्यीय श्रमिक शामिल हैं
- कमलेश: सोहनलाल के पुत्र, निवासी वाल्मीकि नगर, उज्जैन
- नितिन: ताराचन्द के पुत्र, निवासी वाल्मीकि नगर, उज्जैन
- वाहिद: निवासी सोमवारिया, उज्जैन
- मनोज मीणा: निवासी झालावाड़, राजस्थान
सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल के उल्लंघन की गहन जांच
उज्जैन पुलिस ने होटल प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर संपूर्ण प्रकरण की वैधानिक जांच प्रारंभ कर दी है। प्रशासनिक अधिकारी इस बात की विस्तृत छानबीन कर रहे हैं कि क्या कर्मचारियों को इतने जोखिम भरे और जहरीले कक्ष में उतारने से पूर्व अनिवार्य व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण जैसे मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर, हार्नेस बेल्ट या गैस डिटेक्टर उपलब्ध कराए गए थे। चैंबर में गैस रिसाव अथवा निर्माण के तकनीकी कारणों की पड़ताल के साथ ही होटल संचालन में सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।



















