आधुनिक जीवनशैली में खान-पान की बदलती आदतों के बीच सासाराम के एक उद्यमी ने पुरानी धरोहर को आजीविका का जरिया बना दिया है। रोहतास जिले के रहने वाले मंटू चंद्रवंशी ने दादा के आयुर्वेदिक ज्ञान को नए रूप में ढालकर पारंपरिक मिठाइयों की एक श्रृंखला पेश की है। श्री नारायणी स्वयं सहायता समूह की नींव रखकर उन्होंने ग्रामीण इलाकों में रोजगार की नई जमीन तैयार की है, जहां शुद्ध देसी सामग्री से तैयार खाद्य पदार्थों को बाजार तक पहुंचाया जा रहा है।
पारिवारिक ज्ञान और डायरी के पन्नों से निकली प्रेरणा
इस कारोबार की जड़ें मंटू के पारिवारिक परिवेश से जुड़ी हैं। उनके दादा एक वैद्य थे, जिनके पास जड़ी-बूटियों और स्वास्थ्यवर्धक खान-पान का गहरा अनुभव था। बचपन के उसी माहौल और घर में रखी पुरानी डायरी में दर्ज विवरणों ने मंटू को पुरानी खान-पान परंपरा पर काम करने की दिशा दिखाई। उनका मकसद उन व्यंजनों को दोबारा जीवन देना था जो आधुनिक बाजार की चकाचौंध में लोगों के घरों से दूर होते जा रहे थे।
शुरुआती दौर में मंटू मुंबई में कार्यरत थे। वहां की परिस्थितियों के चलते उन्हें गृह राज्य लौटना पड़ा था। घर पर एक लंबा वक्त बिताने के बाद उन्होंने अपनी ही मिट्टी में कुछ नया करने का संकल्प लिया। उन्होंने करीब 40-50 हजार रुपये की बेहद सीमित पूंजी से इस काम की शुरुआत की। आगे चलकर उनकी पत्नी जीविका परियोजना से जुड़ीं, जिसके बाद पूरे कामकाज को श्री नारायणी समूह के बैनर तले एक संगठित पहचान दी गई।
शुद्धता पर जोर और 15 तरह की खास किस्में
श्री नारायणी समूह की सबसे बड़ी खासियत इसकी विविध किस्में हैं। इस इकाई में कुल 15 किस्मों के पारंपरिक और औषधीय लड्डू तैयार किए जाते हैं। इनमें प्रमुख रूप से अश्वगंधा लड्डू, हल्दी-मेथी लड्डू, अलसी-तीसी लड्डू, गोंद लड्डू, सोंठ लड्डू, ड्राई फ्रूट लड्डू और बल-बुद्धि वर्धक भोग शामिल हैं। इन सभी उत्पादों का निर्माण देसी घी और गुड़ के सहयोग से किया जाता है। मंटू का स्पष्ट कहना है कि वे निर्माण प्रक्रिया में कृत्रिम रंगों अथवा रसायनों से पूरी तरह परहेज करते हैं।
कीमतों की बात करें तो गोंद का 400 ग्राम का पैकेट लगभग 300 रुपये में मिलता है। इसी मूल्य वर्ग में 21 अलग-अलग जड़ी-बूटियों के अर्क से बना एक विशेष उत्पाद भी ग्राहकों को दिया जाता है। इस खास मिश्रण को तैयार करने के लिए हर्रे, बहेड़ा, आंवला, अजवाइन, मेथी और सौंफ का उपयोग किया जाता है। सूखे मेवों के प्रेमियों के लिए ड्राई फ्रूट लड्डू में कई मेवों का संतुलन रखा जाता है।
उम्र और स्वास्थ्य की जरूरतों के हिसाब से सामग्री का चयन
विभिन्न आयु वर्गों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उत्पादों में तत्वों का संयोजन तय किया गया है। दिमाग के विकास और शक्ति संवर्धन के लिए तैयार बल-बुद्धि वर्धक भोग में अश्वगंधा, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, शतावरी और सफेद मूसली जैसी जड़ी-बूटियों को मिलाया जाता है। छोटे बच्चों की मानसिक सक्रियता के लिए बनाए जाने वाले लड्डू में शंखपुष्पी, ब्राह्मी, शतावरी, तुलसी, अश्वगंधा और कच्ची हल्दी का उपयोग होता है।
मौसम के बदलाव और मौसमी तकलीफों से राहत देने के लिए सोंठ के लड्डू तैयार होते हैं। इसमें सोंठ के अलावा दालचीनी, मुलेठी, इलायची, पिप्पली और लौंग को उचित अनुपात में पकाया जाता है। हर घटक का चयन शरीर की आंतरिक शक्ति को मजबूत करने के दृष्टिकोण से किया गया है।
महिलाओं की भागीदारी और बिक्री का ताना-बाना
इस पूरी पहल ने स्थानीय महिलाओं के जीवन में भी आर्थिक बदलाव लाने का काम किया है। सासाराम में लगभग 15 से 20 महिलाएं इस उद्यम के उत्पादन पक्ष की जिम्मेदारी संभालती हैं। लड्डू बनाने से लेकर पैकिंग तक का काम महिलाएं करती हैं, जबकि मंटू खुद उत्पादों की मार्केटिंग और बिक्री के लिए विभिन्न स्थानों का दौरा करते हैं।
जीविका के साथ जुड़ने से समूह को एक ढांचा तो मिला, लेकिन स्थायी बिक्री केंद्र न होने के चलते उत्पादों की पहुंच बनाना एक चुनौती रही है। इस कमी को पूरा करने के लिए मंटू हाट, महिला बाजार, प्रदर्शनियों और मॉल जैसे मौकों का सहारा लेते हैं। राजधानी पटना में गांधी मैदान के गेट नंबर 7 के समीप स्थित खादी मॉल में भी ये उत्पाद खरीदारी के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा दूर-दराज के उपभोक्ताओं के लिए 6299280880 पर संपर्क कर कूरियर से सामान मंगाने की सुविधा भी दी गई है।



















