कैरेबियाई दौरे के दूसरे चरण के तहत किंग चार्ल्स गुयाना पहुंचे हैं, जहां हवाई अड्डे पर गुयाना डिफेंस फोर्स की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इससे पहले उनका बहामास दौरा संपन्न हुआ, जिसे बकिंघम पैलेस ने एक बेहद संवेदनशील संतुलन साधने वाली कवायद और राजनयिक सफलता करार दिया है। दो दिवसीय इस राजकीय यात्रा में ब्रिटेन और गुयाना के बीच तेजी से बढ़ते व्यापारिक रिश्तों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण तथा सतत विकास के प्रमुख मुद्दों पर मुख्य ध्यान केंद्रित रहेगा।
गुयाना में द्विपक्षीय बातचीत और 60 साल की साझेदारी
गुयाना प्रवास के दौरान किंग चार्ल्स की मुलाकात देश के राष्ट्रपति इरफान अली से होगी। दोनों नेता साझा हितों और भावी सहयोग पर विमर्श करेंगे। इसके साथ ही किंग चार्ल्स दोनों देशों के बीच 60 साल पुराने औपचारिक द्विपक्षीय संबंधों के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले एक विशेष राजकीय स्वागत समारोह में भी शिरकत करेंगे। इस यात्रा में सांस्कृतिक आदान-प्रदान का रंग भी दिखाई देगा, जिसके लिए स्कॉटलैंड के नेशनल पाइपिंग सेंटर से आए बैगपाइपर्स का एक विशेष दल शाही दौरे के कार्यक्रमों में शामिल हुआ है।
दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना को पहले ब्रिटिश गुयाना के नाम से जाना जाता था। साल 2015 में विशाल तेल भंडारों की खोज के बाद यह देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। आर्थिक प्रगति के बावजूद गुयाना की पर्यावरणीय पहचान बेजोड़ है, क्योंकि देश का चार-पांचवां से अधिक भूभाग सघन वर्षावनों से आच्छादित है। इसके साथ ही पूरी दुनिया में सबसे कम वन कटाई की दरों में गुयाना की गिनती होती है, जिससे जलवायु संतुलन में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बहामास दौरा और ऐतिहासिक गुलामी पर रुख
गुरुवार को बहामास से गुयाना के लिए उड़ान भरते समय किंग चार्ल्स के प्रवक्ता ने बताया कि बहामास के द्वीप समूह उनके दिल में बेहद खास जगह रखते हैं। प्रवक्ता के अनुसार, जनता से मिलते समय जो जोरदार स्वागत और उत्साह उन्हें देखने को मिला, वह लंबे समय तक उनकी यादों में रहेगा। यही उत्साह दौरे के अगले चरणों यानी गुयाना और उसके बाद एंटीगुआ और बारबुडा की यात्रा के लिए एक बड़े प्रोत्साहन का जरिया बनेगा।
बहामास में अपने दो दिन के प्रवास के दौरान उन्होंने स्थानीय राजनेताओं, पर्यावरणविदों और युवा मुक्केबाजों से मुलाकात की थी। स्थानीय जीवन और उत्सव के रंग में रंगते हुए वे जंकानू परेड में सड़क पर पारंपरिक नृत्य करते हुए भी शामिल हुए थे। हालांकि, इस पूरे दौरे के दौरान बहामास के अपने शुरुआती कार्यक्रम में दिए गए एकमात्र सार्वजनिक भाषण में किंग चार्ल्स ने ऐतिहासिक गुलामी के दौर और उसमें ब्रिटेन की संलिप्तता का स्पष्ट उल्लेख किया। उन्होंने उस दौर की मानवीय पीड़ा और अतीत के गहरे कष्टों को आधिकारिक मंच से स्वीकार किया।
शाही प्रवक्ता ने इस संदर्भ में स्पष्ट किया कि यात्रा का मुख्य मकसद बहामास और ब्रिटेन के बीच आधुनिक साझेदारी को मजबूती देना और उसका जश्न मनाना था। इसके साथ ही भविष्य की साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करने और अतीत के भारी अन्यायों को सम्मानजनक तरीके से स्वीकार करने का प्रयास इस दौरे में किया गया।
मुआवजे की मांग और आगामी राष्ट्रमंडल शिखर सम्मेलन
किंग चार्ल्स का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब कैरेबियाई देशों की ओर से ऐतिहासिक दास व्यापार के लिए ब्रिटेन से औपचारिक माफी मांगने और वित्तीय मुआवजे की मांग लगातार तेज हो रही है। इन देशों का तर्क है कि जिन ताकतों ने गुलाम बनाए गए पुरुषों और महिलाओं के व्यापार से भारी मुनाफा कमाया, उन्हें अब ऐतिहासिक क्षतिपूर्ति करनी चाहिए।
बहामास में किंग चार्ल्स के कुछ कार्यक्रमों के बाहर छोटे समूहों में प्रदर्शनकारी भी जमा हुए थे। इन प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर उनका बकाया चुकाने की मांग लिखी थी, हालांकि इन विरोध प्रदर्शनों के बावजूद किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम में कोई व्यवधान नहीं पड़ा।
गुयाना के बाद किंग चार्ल्स एंटीगुआ और बारबुडा जाएंगे। वहां 1 नवंबर से शुरू होने वाले राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों के महत्वपूर्ण सम्मेलन यानी चोगम का वे औपचारिक उद्घाटन करेंगे। राष्ट्रों के परिवार के प्रमुख के तौर पर किंग चार्ल्स इस सम्मेलन में अपना विशेष संबोधन देंगे, जहां गुलामी की ऐतिहासिक विरासत और उसके प्रभावों पर सदस्य देशों के बीच विस्तृत चर्चा होना तय है।



















