ब्राजील के संघीय पुलिस अधिकारियों ने हालिया राष्ट्रपति चुनाव में पराजित हुए दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लावियो बोलसोनारो के सभी पासपोर्ट अमान्य घोषित कर दिए हैं। यह दंडात्मक कदम तब उठाया गया जब उन्होंने अपने आधिकारिक यात्रा दस्तावेज पुलिस के हवाले करने के अदालती निर्देश की पूरी तरह अनदेखी की। सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को पैंतालीस वर्षीय नेता को अपने दस्तावेज जमा कराने के लिए चौबीस घंटे की मोहलत दी थी।
यह अदालती आदेश उन पर चल रही कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी एक औपचारिक पड़ताल के तहत जारी किया गया था। यद्यपि फ्लावियो बोलसोनारो ने अपने ऊपर लगे वित्तीय कदाचार के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद उन्होंने अपने पासपोर्ट कानून प्रवर्तन एजेंसियों को नहीं सौंपे। इस विफलता के बाद सुरक्षा हलकों में यह आशंका गहराई है कि वह कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए सीमा पार कर चुके हो सकते हैं।
जांच के घेरे में बढ़ता कानूनी शिकंजा
पासपोर्ट सौंपने की मियाद बीतने से पहले सीनेटर ने सार्वजनिक तौर पर जोर देकर कहा था कि उनका मुल्क छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने दावा किया था कि वह ब्राजील में ही रहकर वामपंथी प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा के शासन के खिलाफ मुखर विपक्षी खेमे का नेतृत्व करेंगे। हालांकि, तय समय पर दस्तावेज न मिलने से स्थिति पूरी तरह बदल गई है।
संघीय जांच दल अब अंतरराष्ट्रीय सीमा चौकियों की सघन निगरानी कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वह चुपके से पड़ोसी देश अर्जेंटीना चले गए हैं। अर्जेंटीना के अधिकारियों ने इस संबंध में पुष्टि की है कि उनकी किसी भी आधिकारिक आव्रजन चौकी पर सीनेटर के देश में प्रवेश का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
फ्लावियो बोलसोनारो पहले से ही अपने पिता एवं पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो पर केंद्रित एक फिल्म के वित्तपोषण में कथित भ्रष्टाचार के मामले की जांच का सामना कर रहे हैं। गौरतलब है कि जायर बोलसोनारो को तख्तापलट की साजिश रचने का दोषी ठहराया जा चुका है और वह वर्तमान में नजरबंदी में हैं। इसके अतिरिक्त, सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को पुलिस को निर्देश दिया कि फ्लावियो बोलसोनारो के हालिया चुनावी अभियान को मिले कथित विदेशी धन के स्रोतों की भी जांच की जाए।
चुनावी हार और मतदान परिणाम पर गहराता विवाद
फ्लावियो बोलसोनारो को रविवार को हुए कड़े मुकाबले वाले रन-ऑफ चुनाव में लूला के हाथों अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव पूर्व के जनमत सर्वेक्षणों में उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वी पर मामूली बढ़त हासिल थी। चार अक्टूबर को संपन्न हुए पहले चरण के मतदान में जीत हासिल करने के कारण राजनीतिक विश्लेषक मान रहे थे कि दूसरे चरण में भी उनकी विजय लगभग तय है।
मतगणना के शुरुआती दौर में बढ़त हासिल करने के बावजूद, अनुभवी वर्तमान राष्ट्रपति लूला ने बाद के दौरों में जोरदार वापसी की। इस चुनावी परिणाम के साथ ही लूला पहले चरण की हार को दूसरे दौर में पलटकर जीत दर्ज करने वाले इतिहास के पहले राष्ट्रपति उम्मीदवार बन गए। अंतिम आंकड़ों के मुताबिक लूला ने 51.79 प्रतिशत मत हासिल किए, जबकि बोलसोनारो 48.21 प्रतिशत वोटों पर सिमट गए।
लगभग 44 लाख वोटों से पिछड़ने के बावजूद, दक्षिणपंथी नेता ने औपचारिक रूप से अपनी हार स्वीकार नहीं की है और उन्होंने इस पूरे चुनाव को रद्द घोषित करने की मांग उठाई है। उनका मुख्य तर्क यह है कि मतदान के दिन प्रक्रिया को दो घंटे बढ़ाने से उनके पक्ष को भारी नुकसान हुआ। यह विस्तार सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश के निर्देश पर हुआ था, हालांकि इस अतिरिक्त समय की औपचारिक अर्जी स्वयं उनके दल और विपक्षी दल दोनों की तरफ से दी गई थी।
सीनेटर ने इस अदालती कदम को अनुचित हथकंडा करार दिया। दूसरी ओर, उनके राजनीतिक संगठन लिबरल पार्टी ने चुनाव के अंतिम परिणाम को आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है, हालांकि संगठन का कहना है कि मतदान की अवधि बढ़ाए जाने के निर्णय की अलग से जांच होनी चाहिए।



















