अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मादक पदार्थों की कथित तस्करी में शामिल नौकाओं पर अमेरिकी सेना के हालिया हवाई हमलों ने अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनी संधियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष दूत द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि ये सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन है और इन्हें मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में माना जा सकता है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिकी सेना ने कैरेबियन सागर में एक नाव को निशाना बनाकर चार लोगों को मारने की पुष्टि की थी।
हवाई हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक बेन शाऊल द्वारा जारी ब्रीफिंग नोट में इस सैन्य अभियान के कानूनी पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष सितंबर महीने से कैरेबियन सागर और प्रशांत महासागर के उन हिस्सों में कम से कम 68 अमेरिकी हवाई हमले किए गए, जो अमेरिकी क्षेत्रीय जलसीमा से बाहर पड़ते हैं। इन सभी हमलों में कुल मिलाकर 223 लोगों की जान चली गई है।
बेन शाऊल ने यह स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी देश को आत्मरक्षा का अधिकार केवल तब मिलता है जब उस पर कोई सीधा सशस्त्र हमला हुआ हो। रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि यदि इन नौकाओं पर सवार लोगों की पहचान किसी प्रतिबंधित आतंकवादी समूह के सदस्यों के रूप में भी सिद्ध हो जाए, तब भी उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका पर ऐसा कोई सैन्य या सशस्त्र हमला नहीं किया था जिससे वाशिंगटन को इस प्रकार घातक बल प्रयोग करने का आत्मरक्षात्मक अधिकार मिल सके।
गैर-न्यायिक हत्याओं और मानवता के खिलाफ अपराध की कानूनी परिभाषा
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को सोमवार को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में बेन शाऊल ने कहा कि इस प्रकार के हमले जीवन के अधिकार का हनन करने वाली क्रमिक गैर-न्यायिक हत्याओं के बराबर हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अथवा व्यक्तिगत आत्मरक्षा, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून, समुद्र के अंतरराष्ट्रीय कानून, नारकोटिक्स दमन संधियों अथवा आतंकवाद विरोधी अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत इन हमलों को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।
बेन शाऊल के निष्कर्ष के अनुसार इस बात पर विश्वास करने के पर्याप्त और उचित आधार मौजूद हैं कि कम से कम 68 हमलों में 223 लोगों की जान जाना प्रथागत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत हत्या के जरिए मानवता के खिलाफ अपराध का रूप लेता है। कानूनी विशेषज्ञों का भी कहना है कि समुद्री सीमा में मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए स्थापित संधियां किसी भी राष्ट्र को खुले समुद्र में सीधे मिसाइल या बम गिराकर संदिग्धों को खत्म करने की अनुमति नहीं देती हैं।
साउदर्न स्पीयर अभियान और अमेरिकी प्रशासन का पक्ष
अमेरिकी सेना ने इस अभियान को 'साउदर्न स्पीयर' नाम दिया है, जिसे सितंबर की शुरुआत में शुरू किया गया था। इस अभियान के तहत हाल ही में कैरेबियन सागर में किए गए एक ताजा हमले में एक पोत को निशाना बनाया गया था जिसमें चार लोग मारे गए। इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बलों का संचालन करने वाले साउथकॉम ने उस हमले के बाद एक बयान जारी कर कहा था कि पुख्ता खुफिया जानकारी से उस नाव के नार्को-तस्करी में सक्रिय रूप से शामिल होने की पुष्टि हुई थी, और इस कार्रवाई में चार नार्को-आतंकवादियों को मार गिराया गया। सेना ने इस दावे के समर्थन में एक अस्पष्ट वीडियो फुटेज भी जारी किया था।
रक्षा सचिव पीट हेगसेथ पहले यह कह चुके हैं कि इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य हमारे गोलार्ध से नार्को-आतंकवादियों को खत्म करना और देश को उन नशीले पदार्थों से सुरक्षित रखना है जो लोगों की जान ले रहे हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तक ऐसे कोई निर्णायक या सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए हैं जिनसे यह ठोस रूप से साबित हो सके कि जिन जहाजों और नावों को निशाना बनाया गया वे वास्तव में मादक पदार्थों की तस्करी में ही लगे हुए थे।
लैटिन अमेरिकी देशों का विरोध और कानूनी विवाद
शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार और कानून विशेषज्ञ इन हवाई हमलों की वैधानिकता पर लगातार आपत्ति जता रहे हैं। इस अभियान के शुरू होते ही लैटिन अमेरिकी देशों के नेताओं की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं, क्योंकि जिन नौकाओं पर अमेरिकी विमानों और ड्रोनों ने बमबारी की, उनमें मुख्य रूप से लैटिन अमेरिकी देशों के नागरिक सवार थे।
व्हाइट हाउस और विदेश विभाग के समक्ष इन गंभीर आरोपों और रिपोर्ट पर टिप्पणी के लिए अनुरोध भेजे गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले के तूल पकड़ने से अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या मादक पदार्थों के खिलाफ युद्ध के नाम पर खुले समुद्र में बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के सैन्य हमले किए जा सकते हैं, या फिर वैश्विक मंचों पर जिम्मेदार अधिकारियों को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।


















