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पूरे क्यूबा में फिर बत्ती गुल, गुस्साए लोग बर्तन पीटते और कूड़ा जलाते सड़कों पर उतरेलैटिन अमेरिका
8 जुल॰ 2026, 4:58 pm (39 दिन पहले)· 3

पूरे क्यूबा में फिर बत्ती गुल, गुस्साए लोग बर्तन पीटते और कूड़ा जलाते सड़कों पर उतरे

क्यूबा में इस साल तीसरी बार पूरे देश की बिजली ठप होने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा, कई शहरों में लोगों ने बर्तन पीटे और सड़कों पर कूड़ा जलाकर विरोध जताया। सरकार ने इसके लिए अमेरिकी प्रतिबंधों और तेल की नाकेबंदी को जिम्मेदार ठहराया है।

क्यूबा में इस साल तीसरी बार पूरे देश की बिजली गुल होने के बाद लोगों का सब्र टूट गया। मंगलवार शाम को द्वीप के कई इलाकों में गुस्साए लोग घरों से बाहर निकल आए और बर्तन पीटकर अपना विरोध जताने लगे। कुछ जगहों पर नाराज लोगों ने सड़कों पर कूड़ा भी जला दिया। यह गुस्सा उस ताजा बिजली कटौती को लेकर था, जिसने एक बार फिर पूरे देश को अंधेरे में डुबो दिया।

ऐसे देश में विरोध, जहां आवाज उठाना आसान नहीं

क्यूबा एक कम्युनिस्ट शासन वाला देश है, जहां सार्वजनिक रूप से सरकार के खिलाफ असहमति जताने पर अक्सर लंबी जेल की सजा तक हो जाती है। इसके बावजूद जिन इलाकों में बिजली कटौती की मार सबसे ज्यादा पड़ी है, वहां लोग अपने आप, बिना किसी संगठित नेतृत्व के, सड़कों पर उतर आए। यही बात इन प्रदर्शनों को खास बना देती है, क्योंकि यहां खुलकर नाराजगी दिखाना जोखिम भरा माना जाता है।

क्यूबा में ईंधन की भारी किल्लत है, और इस संकट को अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों तथा तेल की एक तरह की नाकेबंदी ने और गहरा कर दिया है। हालत यह है कि जिन लोगों के पास बिजली न होने पर चलाने के लिए जनरेटर हैं, उनके पास भी अक्सर उसे चलाने के लिए ईंधन नहीं होता। ऐसे में बिजली जाते ही उनका घर भी अंधेरे में डूब जाता है।

ज्यादातर हिस्सों में बिजली बहाल, फिर भी कई इलाके अंधेरे में

मंगलवार को क्यूबा के अधिकारियों ने कहा कि देश के ज्यादातर हिस्सों में बिजली फिर से चालू कर दी गई है। लेकिन जहां अब भी अंधेरा था, वहां लोग गुस्से में चिल्ला रहे थे, बत्ती जलाओ! सोमवार को हुई यह देशव्यापी बिजली कटौती इस साल की तीसरी ऐसी घटना थी। यह उन तयशुदा घूमती हुई बिजली कटौतियों के ऊपर से थी, जो सरकार खुद बची-खुची ईंधन को बचाने के लिए लगाती रही है।

कुछ ग्रामीण इलाकों में तो एक-एक बार में 70 घंटे तक अंधेरा छाया रहता है, जबकि शहरी इलाकों में 30 घंटे तक की योजनाबद्ध कटौती देखी गई है। सरकारी बिजली कंपनी ने यह नहीं बताया कि इस बार की गैर-योजनाबद्ध घटना की वजह आखिर क्या रही। देश के दूसरे सबसे बड़े शहर सैंटियागो डे क्यूबा में मंगलवार शाम स्थानीय समय तक बिजली बहाल नहीं हो पाई थी।

राष्ट्रपति ने माना जनता में बढ़ रही नाराजगी

क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल ने भी माना कि लोगों में असंतोष तेजी से फैल रहा है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, परिवहन की कमी है, खाने की कमी है, दवाइयों की कमी है, 20 घंटे से ज्यादा लंबी बिजली कटौती हो रही है, इससे नाराजगी पैदा होती है, कोई भी खुश नहीं रह सकता, लोग तकलीफ में हैं। उन्होंने यह बात सैन जुआन, प्यूर्टो रिको से छपने वाले एक स्पैनिश साप्ताहिक अखबार क्लारिदाद के पत्रकारों के सामने कही।

हालांकि, राष्ट्रपति ने लोगों से अपील की कि वे अपना गुस्सा उनकी सरकार की बजाय अमेरिकी सरकार की ओर मोड़ें। उन्होंने कहा, लोग बर्तन पीटते हैं, कोई ज्यादा गुस्से से तो कोई कम। मैं कहता हूं, अपनी बर्तन पीटने की यह नाराजगी हमारे उत्तरी पड़ोसी की तरफ मोड़ो, असली में इन बिजली कटौतियों के पीछे वही हैं।

अमेरिका ने ठीकरा क्यूबा सरकार पर फोड़ा

दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइकल वॉल्ट्ज ने पूरी जिम्मेदारी सीधे क्यूबा सरकार पर डाल दी। मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक बैठक में बोलते हुए उन्होंने क्यूबा सरकार से कहा कि वह अपने तौर-तरीके बदले और अपने लोगों के लिए बत्ती फिर से जलाए। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी जोड़ा कि क्यूबा की तानाशाही के लिए तो हमेशा पर्याप्त बिजली मौजूद रहती है।

इसके जवाब में क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज़ ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह क्यूबा के खिलाफ बहुआयामी और गैर-पारंपरिक युद्ध छेड़े हुए है। उनके मुताबिक पिछले सात महीनों में यह और भी ज्यादा क्रूर होता चला गया है।

तनाव की पुरानी जड़ें, इस साल और गहराई खाई

अमेरिका और क्यूबा के रिश्ते दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन इस साल की शुरुआत से इनमें तेजी से गिरावट आई है। यह वह वक्त था जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया कि इस द्वीप देश की सरकार अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई है। जनवरी में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपने कब्जे में लिया, जो क्यूबा सरकार के करीबी सहयोगी माने जाते थे। इसके तुरंत बाद ट्रंप ने खुले तौर पर यह भी कहा कि क्यूबा गिरने के लिए तैयार है।

उसके बाद से ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा पर नए प्रतिबंध लगाए और तेल की खेप पर एक तरह की नाकेबंदी कर दी। साथ ही उन देशों पर भी शुल्क लगाने की धमकी दी गई, जो क्यूबा को ईंधन मुहैया कराते हैं। अमेरिका ने क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर हत्या के आरोप भी लगाए हैं। 95 साल की उम्र के बावजूद कास्त्रो आज भी द्वीप पर एक असरदार शख्सियत बने हुए हैं।

सार्वजनिक तीखी बयानबाजी, पर्दे के पीछे बातचीत

दिलचस्प बात यह है कि सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर तीखे हमले करने के बावजूद, हाल के हफ्तों में दोनों देश गुपचुप तरीके से बातचीत भी करते रहे हैं। क्यूबा के विदेश मंत्री ने मंगलवार को कहा कि इस बातचीत में कोई प्रगति नहीं दिख रही है। हालांकि उन्होंने यह दरवाजा खुला रखा कि आपसी सम्मान और क्यूबा के आंतरिक मामलों में दखल न देने के आधार पर संवाद हो सकता है।

सवाल-जवाब

क्यूबा में लोग विरोध क्यों कर रहे हैं?
इस साल तीसरी बार पूरे देश की बिजली गुल होने से लोग गुस्से में हैं। कई इलाकों में उन्होंने बर्तन पीटकर और सड़कों पर कूड़ा जलाकर अपना विरोध जताया।
यह इस साल की कौन सी बड़ी बिजली कटौती है?
सोमवार को हुई देशव्यापी बिजली कटौती इस साल की तीसरी ऐसी बड़ी घटना थी, जो पहले से चल रही तयशुदा घूमती कटौतियों के अलावा थी।
बिजली कितने समय तक गायब रहती है?
कुछ ग्रामीण इलाकों में एक बार में 70 घंटे तक अंधेरा रहता है, जबकि शहरी इलाकों में 30 घंटे तक की योजनाबद्ध कटौती होती है।
क्यूबा सरकार इसके लिए किसे जिम्मेदार मानती है?
राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल ने अमेरिकी सरकार को जिम्मेदार ठहराया और लोगों से कहा कि वे अपना गुस्सा उत्तरी पड़ोसी की तरफ मोड़ें।
अमेरिका का इस पर क्या कहना है?
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइकल वॉल्ट्ज ने पूरी जिम्मेदारी क्यूबा सरकार पर डाली और उससे अपने तरीके बदलकर लोगों की बत्ती जलाने को कहा।
बिजली संकट के पीछे मुख्य वजह क्या है?
देश में ईंधन की भारी किल्लत है, जिसे अमेरिकी प्रतिबंधों और तेल की नाकेबंदी ने और गंभीर बना दिया है, इसलिए जनरेटर वाले भी उन्हें चला नहीं पाते।
किस शहर में बिजली सबसे देर तक बहाल नहीं हो पाई?
देश के दूसरे सबसे बड़े शहर सैंटियागो डे क्यूबा में मंगलवार शाम स्थानीय समय तक बिजली बहाल नहीं हो सकी थी।
क्या अमेरिका और क्यूबा के बीच कोई बातचीत हो रही है?
सार्वजनिक तीखी बयानबाजी के बावजूद दोनों देश हाल के हफ्तों में गुपचुप बातचीत करते रहे हैं, हालांकि विदेश मंत्री के मुताबिक इसमें कोई प्रगति नहीं दिख रही।
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