आगरा का नाम सुनते ही ताजमहल और अन्य ऐतिहासिक स्मारकों की छवि दिमाग में उभर आती है, लेकिन इस शहर का स्वाद भी उतना ही अद्भुत है। अगर आप आगरा की यात्रा पर हैं, तो यहाँ का नाश्ता और मिठाइयां आपकी यात्रा को यादगार बना देंगी। आइए आपको आगरा की उन 6 विशेष मिठाइयों से रूबरू कराते हैं, जिन्होंने इस शहर को पूरी दुनिया में खास पहचान दिलाई है।
विश्व प्रसिद्ध पेठा
आगरा की पहचान का सबसे बड़ा नाम 'पेठा' है। इसकी शुरुआत मुगलकाल में हुई थी और तब से यह शहर की सबसे लोकप्रिय मिठाई बनी हुई है। शुरुआत में पेठा केवल सफेद और सूखा हुआ करता था, लेकिन समय के साथ इसमें कई बदलाव आए हैं। वर्तमान में आगरा में लगभग 56 अलग-अलग किस्म के पेठे बनाए जाते हैं, जिनकी मांग देश-विदेश तक है। आज यहाँ अंगूरी पेठा, केसर पेठा, पान पेठा और चॉकलेट पेठा जैसे कई फ्लेवर आसानी से मिल जाते हैं।
मिठाई वाली गली की रसमलाई
आगरा में 'सेठ गली' के पास एक ऐसी जगह है जिसे 'मिठाई वाली गली' के नाम से जाना जाता है। यहाँ की सबसे खास चीज है केसर से भरपूर रसमलाई। यह इतनी स्वादिष्ट और लाजवाब होती है कि इसे चखने वाला हर व्यक्ति इसका दीवाना हो जाता है। यहाँ की शुद्धता और केसर का मेल इसे आगरा की अन्य मिठाइयों से अलग खड़ा करता है।
राजभोग का शाही अंदाज
आगरा के शादी-समारोहों या किसी भी खास आयोजन की थाली में 'राजभोग' का स्थान सबसे ऊपर होता है। हालांकि यह मूल रूप से आगरा की स्थानीय मिठाई नहीं है, लेकिन यहाँ के लोगों ने इसे इतने चाव से अपनाया है कि यह आगरा का हिस्सा बन गई है। यदि आप मीठे के शौकीन हैं, तो आगरा प्रवास के दौरान राजभोग का आनंद लेना बिल्कुल न भूलें।
नाश्ते के साथ जलेबी का मेल
आगरा के लोग खाने-पीने के इतने शौकीन हैं कि सुबह 5 बजे से ही यहाँ नाश्ते की दुकानें गुलजार हो जाती हैं। यहाँ जलेबी का क्रेज देखते ही बनता है। आगरा वासी इसे आलू की चटपटी सब्जी और दही के साथ खाना पसंद करते हैं। कचौरी के साथ सब्जी और फिर जलेबी का यह कॉम्बो आगरा की सुबह की एक बड़ी खासियत है।
शाही खुरचन मिठाई
खुरचन आगरा की एक पारंपरिक और बेहद शाही मिठाई है, जो शुद्ध दूध और मलाई से तैयार की जाती है। इसे बनाने में मावे या किसी कृत्रिम गाढ़ेपन वाले पदार्थ का उपयोग नहीं किया जाता। फुल-क्रीम दूध को धीमी आंच पर घंटों उबाला जाता है, और कड़ाही के किनारों पर जमने वाली मलाई की परतों को सावधानी से खुरचकर इसे तैयार किया जाता है। इसी प्रक्रिया के कारण इसे 'खुरचन' कहा जाता है।
मेवों से सजी रबड़ी
पेठे के बाद, आगरा की गाढ़ी और मलाईदार रबड़ी का भी अपना अलग ही जलवा है। सेठ गली या शहर की नामी दुकानों पर मिलने वाली यह रबड़ी शुद्ध देसी घी और ढेर सारे मेवों से सजाकर परोसी जाती है। स्थानीय लोग हों या बाहर से आए पर्यटक, हर कोई इस मिठाई का लुत्फ उठाना पसंद करता है।
इतिहास की जुबानी
आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार प्रोफेसर अनुराग पालीवाल का मानना है कि शहर की हर मिठाई के पीछे एक लंबा इतिहास है। उनके अनुसार, पेठे का जन्म मुगलकाल में हुआ था। जब ताजमहल का निर्माण चल रहा था, तब बादशाह ने एक विशिष्ट मिठाई तैयार करने का आदेश दिया था, जिसके बाद से पेठा निरंतर लोकप्रिय बना हुआ है। खुरचन जैसी अन्य मिठाइयां भी काफी प्राचीन मानी जाती हैं, जिन्हें कई पीढ़ियों से आगरा के कुशल कारीगरों ने सहेज कर रखा है।













