आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए काजल, आईलाइनर, मस्कारा और आईशैडो का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन चेहरे के बाकी हिस्सों की तुलना में आंखों के आसपास की त्वचा और अंदरूनी हिस्से बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसलिए इनकी सही देखभाल करना बेहद जरूरी माना जाता है। थोड़ी सी भी असावधानी से आंखों में सूखापन, लालिमा और धुंधला दिखने जैसी परेशानियां पैदा हो सकती हैं, जिससे खूबसूरती पर भी असर पड़ सकता है।
एक्सपायरी डेट वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल
पुराने हो चुके मस्कारा, आईलाइनर और आईशैडो जैसी चीजों में बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपने लगते हैं। इनके प्रयोग से आंखों में गंभीर इंफेक्शन, कंजंक्टिवाइटिस और पलकों में सूजन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। आमतौर पर मस्कारा को हर 3 महीने के भीतर बदल देना चाहिए। इसके अलावा अन्य मेकअप प्रोडक्ट्स को भी उनकी एक्सपायरी डेट और उनकी मौजूदा स्थिति को देखकर समय पर बदल देना चाहिए ताकि किसी तरह का जोखिम न रहे।
दूसरों के साथ मेकअप शेयर करना
अपना निजी मस्कारा, आईलाइनर या मेकअप ब्रश किसी अन्य व्यक्ति के साथ इस्तेमाल के लिए साझा करने से हमेशा बचना चाहिए। इन चीजों के माध्यम से बैक्टीरिया और खतरनाक वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान तक बहुत आसानी से पहुंच जाते हैं। ऐसा करने से आंखों में संक्रमण होने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे बचना बहुत आवश्यक है।
आंखों की अंदरूनी वॉटरलाइन पर काजल लगाना
पलकों के बिल्कुल अंदरूनी किनारे पर काजल या आईलाइनर लगाने की आदत से आंखों की प्राकृतिक तेल बनाने वाली ग्रंथियों के छिद्र बंद हो सकते हैं। इस रुकावट के कारण आंखों में सूखापन, जलन और देखने की क्षमता में उतार-चढ़ाव जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। जिन लोगों को पहले से ही ड्राई आई की समस्या है, उन्हें इस मामले में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
मेकअप लगाकर सो जाना
रात के वक्त बिना आंखों का मेकअप हटाए ही सो जाने से पलकों की ग्रंथियां पूरी तरह बंद हो सकती हैं। इसकी वजह से आंखों में तेज जलन और पलकों में सूजन यानी ब्लेफेराइटिस होने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा यही सलाह दी जाती है कि सोने से पहले किसी अच्छे रिमूवर से आंखों का मेकअप हल्के हाथों से पूरी तरह साफ कर लें।
आंखों के बहुत पास मेकअप लगाना
ग्लिटर और बहुत बारीक कणों वाले आई मेकअप प्रोडक्ट्स कई बार सीधे आंखों के अंदर चले जाते हैं। इसकी वजह से कॉर्निया पर खरोंच आ सकती है या फिर गंभीर एलर्जी की शिकायत हो सकती है। ऐसे किसी भी उत्पाद का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए जिनके कण आसानी से झड़कर आंखों में गिर जाते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं।
गंदे ब्रश और एप्लिकेटर का इस्तेमाल
नियमित रूप से इस्तेमाल होने वाले मेकअप ब्रश पर तेल, मृत त्वचा यानी डेड स्किन और बैक्टीरिया जमा होते रहते हैं। यही वजह है कि सभी ब्रश और एप्लिकेटर को समय-समय पर अच्छी तरह साफ करना बेहद जरूरी होता है। सफाई के बाद इन्हें दोबारा इस्तेमाल करने से पहले पूरी तरह सुखा लेना चाहिए ताकि नमी की वजह से बैक्टीरिया न पनपें।
वाटरप्रूफ मेकअप का ज्यादा इस्तेमाल
वाटरप्रूफ मस्कारा और आईलाइनर को हटाने के लिए काफी ज्यादा रगड़ना पड़ता है। इस प्रक्रिया में आंखों और पलकों को बार-बार रगड़ने से वहां जलन पैदा हो सकती है और पलकें टूटने की समस्या भी खड़ी हो सकती है। इन प्रोडक्ट्स को साफ करते समय हमेशा बेहद हल्के हाथों का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि नाज़ुक पलकों को कोई नुकसान न पहुंचे।






















