बरसात का मौसम बागवानी के शौकीनों के लिए बेहद खूबसूरत लेकिन चुनौतीपूर्ण होता है। इस मौसम में हवा में मौजूद नमी पेड़-पौधों को नया जीवन देती है, लेकिन लगातार बारिश के कारण मिट्टी में पानी जमा होने से पौधों में सड़न और फंगल संक्रमण का खतरा भी काफी हद तक बढ़ जाता है। ऐसे में अपने बगीचे को हरा-भरा और सुरक्षित रखने के लिए सही तकनीकों का इस्तेमाल करना जरूरी है। बागवानी के क्षेत्र में विशेषज्ञ डॉक्टर रतन कुमार ने इस मौसम में नए पौधे लगाने और उनकी सही देखरेख को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं, जिनकी मदद से आप अपने पौधों को खराब होने से बचा सकते हैं।
बरसात में कट प्लांट तकनीक है सबसे ज्यादा फायदेमंद
विशेषज्ञ डॉक्टर रतन कुमार के अनुसार, मानसून के दौरान नए पौधे लगाने के लिए पारंपरिक बीजों या सीधे पौधों के बजाय कटिंग यानी कट प्लांट तकनीक का इस्तेमाल करना सबसे बेहतरीन विकल्प होता है। बारिश के अनुकूल मौसम में कट प्लांट बहुत ही कम समय में अपनी जड़ें विकसित कर लेते हैं और इस मौसम में उनके जीवित रहने और तेजी से बढ़ने की संभावना काफी अधिक होती है। गुलदाउदी और पिंक एरिना जैसे लोकप्रिय पौधों को लगाने के लिए यह तकनीक सबसे ज्यादा प्रभावी साबित होती है। इसे पहले से छोटे बर्तनों या गिलास में तैयार किया जाता है, जिससे पौधों को शुरुआती दौर में सीधे जमीन के फंगल संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
इन फूलों की किस्मों को लगाएं, जो सालभर खिलेंगी
अगर आप अपने बगीचे को खूबसूरत फूलों से सजाना चाहते हैं, तो डॉक्टर रतन कुमार ने गेंदे की कुछ खास किस्मों को लगाने की सलाह दी है। गेंदे की पूसा नारंगी और पूसा बसंती जैसी वैरायटी सालभर लगातार फूल देने की क्षमता रखती हैं। इन दोनों ही किस्मों को लगाने के लिए बरसात का मौसम सबसे उत्तम माना जाता है। इस समय इन्हें लगाने से पौधों को अच्छी वृद्धि मिलती है और पूरे साल आपके बगीचे में फूलों की रौनक बनी रहती है। इसके अलावा अन्य सजावटी पौधों के रोपण के लिए भी यह एक अनुकूल समय है।
रोपण से पहले कवकनाशी दवाओं से करें उपचार
कट प्लांट को तैयार करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। डॉक्टर रतन कुमार का कहना है कि किसी भी कटिंग को मिट्टी या गिलास में लगाने से पहले उसका सही तरीके से उपचार किया जाना चाहिए। कटिंग के निचले हिस्से को कार्बेन्डाजिम या विविस्टिन जैसी प्रभावकारी फफूंदनाशक दवाओं के घोल से उपचारित किया जाना जरूरी है। ऐसा करने से पौधों की कटी हुई सतह पर किसी भी प्रकार के हानिकारक फंगस का हमला नहीं होता है और नए पौधे बिना किसी बीमारी के स्वस्थ तरीके से विकसित हो पाते हैं।
अतिरिक्त नमी का प्रबंधन और जरूरी दवाओं का छिड़काव
बारिश के दिनों में पौधों की सिंचाई उनकी जरूरत के हिसाब से नहीं, बल्कि गमलों और जमीन की मिट्टी में मौजूद अतिरिक्त नमी को ध्यान में रखकर करनी चाहिए। लगातार बारिश से जड़ों को हवा नहीं मिल पाती, जिससे वे गलने लगती हैं। इस समस्या से निपटने और पौधों को फंगल व बैक्टीरियल रोगों से सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टर रतन कुमार ने नियमित अंतराल पर दवाओं के छिड़काव की सलाह दी है। बगीचे में समय-समय पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या स्ट्रेप्टोसाइक्लिन का छिड़काव करते रहना चाहिए। यह छिड़काव पौधों को फफूंद और जीवाणुओं से होने वाली विभिन्न बीमारियों से बचाए रखता है।
व्यावसायिक खेती से कमा सकते हैं मुनाफा
बागवानी केवल घर की खूबसूरती बढ़ाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे मुनाफे के व्यवसाय में भी बदला जा सकता है। डॉक्टर रतन कुमार के मुताबिक, यदि सही तकनीक, सही किस्मों के चुनाव और रोपण से पहले वैज्ञानिक उपचार विधियों को अपनाया जाए, तो फूलों और सजावटी पौधों का व्यावसायिक स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सकता है। इससे किसान और घरेलू स्तर पर बागवानी करने वाले लोग अच्छी और नियमित आय अर्जित कर सकते हैं। सही दवाओं का छिड़काव और समय पर देखभाल ही मानसून में बागवानी की सफलता की असली कुंजी है।



















