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मानसून में पौधों को कीटों और दीमक से बचाएंगे रसोई के ये घरेलू उपाय, जानें जरूरी गार्डनिंग टिप्सजीवनशैली
1 सित॰ 2026, 1:08 pm (1 घंटे पहले)· 1

मानसून में पौधों को कीटों और दीमक से बचाएंगे रसोई के ये घरेलू उपाय, जानें जरूरी गार्डनिंग टिप्स

बारिश के मौसम में गमलों में जलजमाव और नमी के कारण दीमक व फंगल इन्फेक्शन होने लगता है। हींग और नमक जैसे घरेलू नुस्खों से पौधों की सुरक्षा की जा सकती है।

बरसात का मौसम आते ही चारों तरफ हरियाली छाने लगती है और लोग अपने घरों में नया गार्डन तैयार करने के लिए उत्साहित रहते हैं। हालांकि, मानसून की फुहारें जहां पेड़-पौधों के विकास के लिए बेहतर मानी जाती हैं, वहीं यह मौसम पौधों के लिए कई समस्याएं भी लेकर आता है। लगातार बारिश और वातावरण में बनी रहने वाली नमी के कारण गमलों में उधाई, दीमक और तरह-तरह के कीट लगने का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। सही समय पर ध्यान न दिया जाए तो हरे-भरे पौधे अचानक सूखने और खराब होने लगते हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए महंगे कीटनाशकों के स्थान पर रसोई की कुछ साधारण चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

बरसात में पौधों पर कीट और फंगल इंफेक्शन का खतरा

मानसून में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि गमलों और मिट्टी में पानी जमा होने लगता है। लंबे समय तक पानी रुकने से मिट्टी में हवा का संचार बंद हो जाता है और पौधों की जड़ें गलने लगती हैं। कमजोर जड़ों के आसपास छोटे-छोटे कीड़े और दीमक तेजी से पनपने लगते हैं, जो जड़ों को धीरे-धीरे खाकर पौधे को पूरी तरह सुखा देते हैं। इसके अलावा नमी के कारण पत्तों और तनों पर फंगल इन्फेक्शन भी फैलने लगता है, जिससे पौधा अपनी पत्तियों को गिराने लगता है।

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हींग और नमक से करें पौधों का बचाव

पौधों को कीड़ों और दीमक के हमले से बचाने के लिए रसोई में रखी हींग और नमक बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं। जब भी मिट्टी के आसपास कीटों का प्रकोप दिखाई दे, तो हींग को पानी में घोलकर एक हल्का मिश्रण तैयार कर लें। इस हींग के पानी का छिड़काव मिट्टी के चारों ओर करने से कीड़े और दीमक दूर भागते हैं। इसके अलावा, कुछ लोग घरेलू नुस्खे के रूप में नमक के पानी का भी प्रयोग करते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार नमक का अत्यधिक इस्तेमाल मिट्टी के उपजाऊपन को नुकसान पहुंचा सकता है और पौधे को सुखा सकता है। इसलिए नमक के घोल का इस्तेमाल सीधे पौधों या उनकी जड़ों पर कभी नहीं करना चाहिए और इसे बहुत सावधानी से कम मात्रा में ही प्रयोग में लाना चाहिए।

नर्सरी एक्सपर्ट विपिन पाल की सलाह

नर्सरी एक्सपर्ट विपिन पाल के अनुसार बरसात के मौसम में पौधों की नियमित रूप से निगरानी करना बेहद आवश्यक है। उनका कहना है कि गमलों और पौधों के आसपास किसी भी हाल में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। गमलों की मिट्टी में पानी की निकासी के लिए उचित व्यवस्था होना जरूरी है ताकि अतिरिक्त पानी तुरंत बाहर निकल सके। विपिन पाल यह भी सलाह देते हैं कि कोई भी घरेलू घोल या नुस्खा पहली बार इस्तेमाल करते समय उसे बेहद कम मात्रा में आजमाएं। यदि पौधे पर इसका कोई बुरा असर दिखाई दे, तो उस उपाय का उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए।

मानसून में गार्डन की देखभाल के जरूरी टिप्स

मानसून के दौरान पौधों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रखरखाव बहुत जरूरी है। गमले की मिट्टी को समय-समय पर खुरपी से हल्का ढीला करते रहना चाहिए ताकि जड़ों को पर्याप्त हवा मिल सके। पौधे पर मौजूद सूखे या सड़े-गले पत्तों को तुरंत हटा देना चाहिए, क्योंकि ये संक्रमण फैलाने का काम करते हैं। इसके अलावा गमलों को ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां उन्हें पर्याप्त धूप और ताजी हवा मिल सके। इन आसान सावधानियों और घरेलू नुस्खों को अपनाकर मानसून में अपने होम गार्डन को पूरी तरह हरा-भरा रखा जा सकता है।

सवाल-जवाब

बरसात में पौधों की जड़ों में कीड़े क्यों लगते हैं?
अधिक नमी और गमलों में पानी जमा रहने के कारण मिट्टी में कीड़े और फंगल संक्रमण आसानी से पनपने लगते हैं।
हींग के घोल का पौधों पर प्रयोग कैसे करें?
हींग को पानी में मिलाकर हल्का घोल बनाएं और इसे मिट्टी के आसपास छिड़कें ताकि कीटों की समस्या से राहत मिल सके।
क्या नमक का इस्तेमाल सीधे पौधे की जड़ में किया जा सकता है?
नहीं, नमक का अत्यधिक या सीधा इस्तेमाल मिट्टी और पौधे को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए इसका उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए।
मानसून में गमले की मिट्टी की देखभाल के लिए क्या करना चाहिए?
समय-समय पर मिट्टी की गुड़ाई करके उसे ढीला करें, पानी रुकने न दें और सूखे या खराब पत्तों को तुरंत हटा दें।
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