घर के फर्श और दीवारों पर कितनी भी नियमित सफाई कर ली जाए, लेकिन अगर टाइलों के बीच की ग्राउट लाइनें मैली नजर आने लगें तो पूरा कमरा या किचन बेकार लगने लगता है। तमाम कोशिशों के बाद भी जब यह जिद्दी गंदगी आसानी से नहीं हटती, तो इसकी मुख्य वजह ग्राउट की खुरदरी और छिद्रदार बनावट होती है, जो धूल, तेल, साबुन के अवशेष और नमी को आसानी से अपने अंदर जकड़ लेती है।
बाथरूम या रसोई घर की इस समस्या से निपटने के लिए बाजार में मिलने वाले तेज केमिकल क्लीनर ही एकमात्र विकल्प नहीं हैं। घर में पहले से मौजूद कुछ सामान्य चीजों की मदद से भी इस तरह की हल्की और सामान्य गंदगी को प्रभावी ढंग से साफ किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी नए तरीके को आजमाने से पहले सतह के एक छोटे और छिपे हुए हिस्से पर उसका परीक्षण करना समझदारी होती है, क्योंकि हर तरह की टाइल और ग्राउट का स्वभाव अलग होता है।
बेकिंग सोडा और पानी का इस्तेमाल
अगर टाइलों के जोड़ों में सामान्य रोजमर्रा की धूल और मैल जम गया है, तो इसकी शुरुआत बेकिंग सोडा से की जा सकती है। इसके लिए थोड़े से पानी में बेकिंग सोडा को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है। इस मिश्रण को एक पुराने टूथब्रश या किसी छोटे सफाई वाले ब्रश की सहायता से सीधे ग्राउट लाइनों पर लगाया जाता है। पेस्ट को लगभग 10 से 15 मिनट तक वैसे ही छोड़ देने के बाद, हल्के हाथों से रगड़कर साफ पानी से धो दिया जाता है। यह तरीका उन जगहों के लिए सबसे उपयुक्त है जहाँ मैल पुराना तो है लेकिन बहुत अधिक गहरा नहीं हुआ है।
बेकिंग सोडा और सफेद सिरके का मेल
जब ग्राउट लाइनों पर मैल के साथ-साथ हल्के दाग भी दिखाई देने लगें, तब बेकिंग सोडा के साथ सफेद सिरके का उपयोग किया जा सकता है। सबसे पहले प्रभावित जगह पर बेकिंग सोडा छिड़का जाता है और उसके ऊपर थोड़ी मात्रा में सफेद सिरका डाला जाता है। दोनों पदार्थों के आपस में मिलते ही रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण झाग उठने लगता है। कुछ मिनट तक इंतजार करने के बाद ब्रश की मदद से उस हिस्से को रगड़ा जाता है और अंत में पानी से अच्छी तरह धोकर साफ कर लिया जाता है। इस प्रक्रिया में यह सावधानी रखना जरूरी है कि सिरका हर प्रकार की टाइल के अनुकूल नहीं होता है।
बेकिंग सोडा और हाइड्रोजन पेरोक्साइड
अत्यधिक पीली या भूरी हो चुकी ग्राउट लाइनों को फिर से चमकाने के लिए बेकिंग सोडा और हाइड्रोजन पेरोक्साइड के मिश्रण का सहारा लिया जाता है। लगभग दो हिस्से बेकिंग सोडा में एक हिस्सा हाइड्रोजन पेरोक्साइड मिलाकर एक लेप बनाया जाता है। इस लेप को ग्राउट पर एक पतली परत के रूप में फैलाकर 15 से 20 मिनट के लिए छोड़ दिया जाता है। समय पूरा होने के बाद ब्रश से सफाई करके पानी से धोया जाता है। इस मिश्रण को पहले से बनाकर स्टोर करने के बजाय हमेशा जरूरत के वक्त ताजा ही तैयार करना बेहतर परिणाम देता है।
नींबू का रस और बेकिंग सोडा
यदि टाइलों के बीच पानी के सूखने से सफेद परत या किसी प्रकार का खनिज जमाव नजर आ रहा है, तो नींबू के रस और बेकिंग सोडा का नुस्खा आजमाया जा सकता है। बेकिंग सोडा में थोड़ा सा ताजा नींबू का रस निचोड़कर पेस्ट बनाया जाता है। इसे समस्या वाली जगह पर लगाकर कुछ मिनटों के लिए छोड़ दिया जाता है और फिर ब्रश से साफ किया जाता है। नींबू की प्राकृतिक खूशबू से सफाई के बाद आसपास का वातावरण भी तरोताजा महसूस होता है। हालांकि, प्राकृतिक पत्थर की सतहों पर किसी भी अम्लीय सामग्री का उपयोग करने से पहले पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए।
डिश सोप और गर्म पानी का उपयोग
रसोई घर की टाइलों के जोड़ों में बाथरूम की तरह साबुन और नमी की बजाय मुख्य रूप से तेल और भोजन के छोटे अवशेष जमते हैं। ऐसी स्थिति में डिश सोप और गर्म पानी का संयोजन सबसे आसान उपाय साबित होता है। गुनगुने पानी में थोड़ा सा डिश सोप मिलाकर एक घोल तैयार किया जाता है और ब्रश या कपड़े की मदद से ग्राउट की सफाई की जाती है। लगभग पांच मिनट बाद उसी प्रक्रिया को दोबारा दोहराकर साफ पानी से पोंछ लिया जाता है। किचन के फर्श और बैकस्प्लैश की नियमित देखभाल के लिए यह तरीका बेहद उपयोगी है।
स्टीम क्लीनर से गहरी सफाई
जो लोग अपने घर की सफाई में किसी भी प्रकार के रसायनों के प्रयोग से बचना चाहते हैं, वे स्टीम क्लीनर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी तेज गर्म भाप ग्राउट के अंदर बरसों से फंसी गंदगी और पर्तों को ढीला करने का काम करती है। स्टीम प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद उस ढीली हुई गंदगी को एक साफ ब्रश या कपड़े की मदद से हटा दिया जाता है। चूंकि हर प्रकार की टाइल और ग्राउट भाप की गर्मी को सहन नहीं कर पाती है, इसलिए इस उपकरण का प्रयोग करते समय निर्माता के निर्देशों का पूरी तरह पालन करना आवश्यक है।
मोल्ड और फफूंदी से निपटने के उपाय
यदि शॉवर या बाथटब के आस-पास की ग्राउट लाइनें लगातार काली पड़ रही हैं और वहाँ नमी अधिक रहती है, तो यह केवल सामान्य धूल-मिट्टी नहीं बल्कि फफूंदी का संक्रमण हो सकता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में हाइड्रोजन पेरोक्साइड का सीधा उपयोग किया जाता है। इसे प्रभावित ग्राउट पर लगाकर कुछ समय के लिए छोड़ दिया जाता है और बाद में ब्रश से अच्छी तरह रगड़कर पानी से धो लिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कमरे में हवा के आने-जाने का उचित प्रबंध होना चाहिए और इसे किसी अन्य क्लीनर के साथ मिलाने से बचना चाहिए।
ग्राउट को दोबारा गंदा होने से कैसे बचाएं
केवल एक बार की गई सफाई से समस्या का स्थाई समाधान नहीं मिलता है। बाथरूम का इस्तेमाल करने के बाद फर्श पर जमा होने वाले अतिरिक्त पानी को पोंछने की आदत डालनी चाहिए। किचन में तेल या खाने का कोई भी सामान गिरते ही उसे तुरंत साफ कर देना एक अच्छी आदत है। हफ्ते में कम से कम एक बार ग्राउट लाइनों की हल्की सफाई करने से गंदगी की मोटी परत कभी नहीं जम पाती है। इसके बावजूद यदि ग्राउट बहुत पुरानी हो चुकी है, टूट गई है या लगातार खराब हो रही है, तो घरेलू उपायों के बजाय किसी पेशेवर क्लीनर की मदद लेनी पड़ सकती है या फिर से ग्राउटिंग करवानी पड़ सकती है।



















