श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व आगामी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस विशेष अवसर पर घरों के पूजा स्थलों में विराजित भगवान लड्डू गोपाल की मूर्तियों की विशेष साफ-सफाई और शृंगार करने की परंपरा रही है। हालांकि, लंबे समय तक रखे रहने के कारण पीतल और तांबे की पुरानी मूर्तियां तथा पूजा में इस्तेमाल होने वाले बर्तन काले पड़ जाते हैं। अधिकांश लोग इन्हें साफ करने के लिए नींबू का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन सही जानकारी के अभाव में कई बार मूर्तियों की चमक फीकी पड़ जाती है या धातु को नुकसान पहुंचता है। मूर्तियों और बर्तनों की स्वाभाविक चमक वापस लाने के लिए कुछ विशेष सावधानियां बरतने के साथ-साथ सही तरीकों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
मूर्तियों की सफाई से जुड़े जरूरी नियम और सावधानियां
पूजा की मूर्तियों की सफाई शुरू करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण नियमों का ध्यान रखना आवश्यक है। अक्सर लोग जाने-अनजाने में पुराने टूथब्रश या रसोई में इस्तेमाल होने वाले पुराने कपड़ों से मूर्तियों को रगड़ देते हैं, जिससे धातु की नाजुक सतह पर खरोंच आ सकती है। इसके अलावा, मूर्तियों को रसोई के नल के नीचे बहते पानी में सीधे धोना भी अनुचित माना जाता है।
सफाई के लिए हमेशा नया और पूरी तरह साफ-सुथरा कपड़ा इस्तेमाल करना चाहिए। प्रक्रिया शुरू करने से पहले, घर के किसी स्वच्छ स्थान पर एक बड़ी थाली रखें और उसमें पीतल तथा तांबे की सभी पुरानी मूर्तियों और बर्तनों को व्यवस्थित रूप से रख लें। इसके साथ ही, पास में एक बड़े कटोरे में साफ पानी भरकर रख लें ताकि सफाई के बाद मूर्तियों को उसमें आसानी से धोया जा सके।
पीतांबरी पाउडर से सफाई का बेहद आसान तरीका
पीतल और तांबे की मूर्तियों को चमकाने का सबसे सुलभ और लोकप्रिय माध्यम पीतांबरी पाउडर माना जाता है। बाजार में यह पाउडर विभिन्न मात्रा के अनुसार 30 रुपये से लेकर 100 रुपये तक के पैकेट में आसानी से मिल जाता है। इसे ऑनलाइन माध्यमों से भी खरीदा जा सकता है।
इस विधि का उपयोग करने के लिए सबसे पहले एक छोटी कटोरी में आवश्यकतानुसार पीतांबरी पाउडर निकालें। इसके बाद पाउडर का एक गाढ़ा लेप बनाकर मूर्तियों और बर्तनों पर अच्छी तरह लगाएं। अब किसी नए स्क्रबर या साफ मुलायम कपड़े की मदद से 3 से 4 मिनट तक मूर्तियों पर हल्के हाथों से रगड़ें। रगड़ने के बाद, मूर्तियों को पहले से भरकर रखे गए बड़े कटोरे के पानी में डालकर अच्छी तरह धो लें। इस आसान प्रक्रिया से मूर्तियों पर जमा पुराना कालापन पूरी तरह हट जाता है और उनकी स्वाभाविक चमक वापस लौट आती है।
लिक्विड क्लीनर और मुरादाबाद के कारीगरों की तकनीक
पीतल नगरी के रूप में प्रसिद्ध मुरादाबाद के कुशल कारीगर पुरानी मूर्तियों को बिल्कुल नया जैसा रूप देने के लिए विशेष लिक्विड क्लीनर का प्रयोग करते हैं। इस कार्य के लिए दारा एलाइड प्रोडक्ट्स और ब्रासो जैसे लिक्विड क्लीनर बेहद प्रभावी साबित होते हैं। पीतल की मूर्तियों पर जमा जिद्दी कालेपन को दूर करने के लिए इन उत्पादों का उपयोग किया जा सकता है।
इस्तेमाल के लिए लिक्विड को सीधे मूर्ति पर लेप की तरह लगाया जा सकता है। या फिर किसी साफ कपड़े अथवा रूई में लिक्विड की कुछ बूंदें लेकर उसे मूर्ति की सतह पर अच्छी तरह रगड़ा जा सकता है। कुछ मिनट तक रगड़ने के पश्चात मूर्ति को साफ पानी से धो लें। इस उपाय से पुरानी से पुरानी पीतल की मूर्ति भी चंद मिनटों में नई जैसी चमकने लगती है। ठीक इसी प्रकार ब्रासो लिक्विड का इस्तेमाल करके भी मूर्तियों की खोई हुई चमक आसानी से वापस लाई जा सकती है।
पंचामृत उबटन और नींबू-नमक के प्रभावी घरेलू नुस्खे
यदि आप रासायनिक पाउडर या लिक्विड का उपयोग नहीं करना चाहते, तो घर में मौजूद प्राकृतिक सामग्रियों से पंचामृत उबटन तैयार किया जा सकता है। पीतल और तांबे की धातुएं हवा के संपर्क में आकर जल्दी काली पड़ जाती हैं, जिन्हें चमकाने में यह उबटन बेहद कारगर है। उबटन बनाने के लिए एक कटोरे में 50 ग्राम दही लें। इसमें थोड़ी सी चीनी, चुटकी भर अमचूर पाउडर, दो चुटकी हल्दी और थोड़ी सी शहद मिलाकर अच्छी तरह मिश्रण तैयार कर लें।
इस तैयार पंचामृत उबटन को भगवान की मूर्ति पर चारों तरफ लगाएं और हल्के हाथों से मलें। इसके बाद उबटन को मूर्ति पर लगा रहने दें और 10 मिनट के लिए छोड़ दें। निर्धारित समय बीतने के बाद मूर्ति को स्वच्छ पानी से धोकर पोंछ लें। इससे मूर्ति सोने जैसी अद्भुत चमक से जगमगाने लगेगी। इसके अतिरिक्त, नींबू और नमक का मिश्रण भी एक उत्कृष्ट विकल्प है। इसके लिए नींबू के रस में थोड़ा सा नमक मिलाएं और मूर्ति पर हल्के हाथों से रगड़ें। तत्पश्चात मूर्ति को गुनगुने पानी से धोकर किसी बेहद मुलायम कपड़े से पोंछ लें। इससे मूर्ति पर जमी पूरी गंदगी साफ हो जाएगी और वह बिल्कुल नई जैसी दिखने लगेगी।



















