अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में हफ्ते के पहले कारोबारी सत्र के दौरान बहुमूल्य पीली धातु की हालिया रिकवरी पर अचानक ब्रेक लग गया है। पिछले छह हफ्तों के निचले दायरे 4,235 डॉलर प्रति औंस के करीब से संभलने के बाद सोना 4,400 डॉलर के मनोवैज्ञानिक बैरियर को पार करने में असमर्थ साबित हुआ। ताजा सत्र में यह कीमती धातु 4,399 डॉलर के आसपास संघर्ष करती दिखी, जो पिछले बंद भाव 4,425 डॉलर के मुकाबले 0.59 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है। भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दोबारा गहराने से दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा अमेरिकी डॉलर को अप्रत्याशित मजबूती मिली है, जिसने सोने की तेजी को थामने में सीधी भूमिका निभाई है।
पूर्वी यूरोप में सैन्य टकराव और अमेरिकी डॉलर की सुरक्षित मांग
सप्ताहांत के दौरान रूस और यूक्रेन के बीच जंग नाटकीय रूप से और हिंसक हो उठी। यूक्रेन द्वारा मॉस्को और आसपास के इलाकों को निशाना बनाकर रात भर बड़े पैमाने पर ड्रोन तथा मिसाइल हमला किया गया। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि इन 450 ड्रोनों ने शहर की मुख्य तेल रिफाइनरी और एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचाया। इस अप्रत्याशित हमले के बाद ऐसे संकेत भी उभर रहे हैं कि रूसी सेना आने वाले महीनों में यूक्रेन का समर्थन करने वाले नाटो सदस्य मुल्कों के खिलाफ अपने ड्रोन, मिसाइल, साइबर अभियानों और तोड़फोड़ की गतिविधियों को तेज कर सकती है। इसी अंदेशे को देखते हुए यूरोपीय देशों की सरकारें अपनी सैन्य व नागरिक तैयारियों को युद्ध स्तर पर मजबूत करने में जुट गई हैं।
आम तौर पर युद्ध की स्थिति में सोने की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार भू-राजनीतिक अस्थिरता ने निवेशकों को नकदी और अमेरिकी डॉलर की तरफ धकेल दिया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में जब भी व्यापक अनिश्चितता गहराती है, दुनिया की सबसे प्रमुख आरक्षित मुद्रा होने के नाते डॉलर को सुरक्षित निवेश का जरिया माना जाता है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने से विदेशी मुद्राओं में लेन-देन करने वाले खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे भौतिक व सट्टेबाजी मांग पर तात्कालिक असर पड़ता है।
कच्चे तेल में नरमी से घटा महंगाई का डर, वार्ता पर टिकी नजरें
सोने के लिए एक अन्य दबाव कच्चे तेल के लुढ़कते दामों से आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक हफ्ते से अधिक के अपने सबसे निचले स्तर पर फिसल गईं। संयुक्त राष्ट्र की बैठक के दौरान ईरान संघर्ष में कूटनीतिक समाधान निकलने की उम्मीदों ने ऊर्जा बाजार की चिंताएं घटाई हैं। इसके अलावा डीबीएस के रणनीतिकारों ने संकेत दिया है कि तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है क्योंकि चीन ने सऊदी अरब की तरफ से हूती हमलों को नियंत्रित करने के लिए ईरान से मध्यस्थता की गुहार लगाई है। साथ ही, सऊदी अरब लाल सागर तट तक जाने वाली अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन की हालिया क्षति की मरम्मत में जुटा है और उसका लक्ष्य आधी क्षमता को जल्द बहाल करने का है, जिससे आपूर्ति से जुड़ी तात्कालिक बाधाएं दूर हो रही हैं। ईंधन सस्ता होने से महंगाई के आंकड़े नरम पड़ने की संभावना बनी है, जिससे मुद्रास्फीति के खिलाफ बचाव के रूप में सोने की तात्कालिक जरूरत कुछ हद तक घट गई है।
अमेरिका-चीन शिखर वार्ता और वैश्विक आर्थिक समीकरण
व्यापारियों की नजरें अमेरिका और चीन के बीच होने वाली महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बातचीत पर भी जमी हैं। गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के बीच सीधी मुलाकात निर्धारित है। इस शिखर बैठक से पहले अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मुद्दों पर बीजिंग के साथ उनकी बातचीत बेहद सकारात्मक रही है। यदि दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव घटता है, तो बाजार में जोखिम लेने की क्षमता सुधरेगी, जो पारंपरिक तौर पर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों के लिए नकारात्मक साबित हो सकती है।
इसके साथ ही जापानी मुद्रा बाजार पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा की गई दर जांच के बाद टोक्यो से संभावित फॉरेक्स हस्तक्षेप का खतरा मंडरा रहा है। इस बीच, बैंक ऑफ जापान ने पहले ही अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। एशियाई कारोबार में यूएसडी/जेपीवाई 157.00 से नीचे फिसल गया, जबकि डॉलर का दबाव बने रहने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7100 के ऊपर स्थिर रहा, जिस पर पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम दरों को स्थिर रखने का असर भी दिखा।
सोने के लिए तकनीकी स्तर और आगामी बाधाएं
दैनिक चार्ट पर सोने का तकनीकी ढांचा मिला-जुला रुख दर्शा रहा है। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 48 के स्तर पर बना हुआ है, जो बिल्कुल तटस्थ स्थिति की पुष्टि करता है। वहीं मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) शून्य से नीचे -3.09 पर फिसल गया है, जो इसके 14.95 के सिग्नल स्तर से नीचे होने के कारण बियरिश हिस्टोग्राम (-18.04) बनाता है। मूविंग एवरेजेज की बात करें तो 20-दिवसीय ईएमए 4,427 डॉलर और 50-दिवसीय ईएमए 4,393 डॉलर पर है, जबकि 200-दिवसीय ईएमए 4,429 डॉलर पर स्थित है। 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे आना एक डेथ क्रॉस दर्शाता है।
तेजी की ओर लौटने के लिए खरीदारों को 200-दिवसीय एसएमए 4,541.68 डॉलर और हालिया 200-दिवसीय साधारण मूविंग एवरेज 4,554 डॉलर को पार करना अनिवार्य होगा। अल्पकालिक रेजिस्टेंस पिवट 4,406 डॉलर के आसपास है, जिसके बाद आर1 4,415 डॉलर और आर2 4,431 डॉलर पर स्थित हैं। नीचे की तरफ पहला प्रमुख सहारा 21-दिवसीय एसएमए 4,419 डॉलर और पिवट सपोर्ट 4,389 डॉलर (एस1) व 4,380 डॉलर (एस2) पर है। यदि बिकवाली और गहरी होती है, तो 100-दिवसीय एसएमए 4,319 डॉलर और 50-दिवसीय एसएमए 4,296 डॉलर पर सहारा दे सकते हैं। चार्ट पर लंबी अवधि की बढ़ती ट्रेंड-लाइन का मुख्य सपोर्ट 4,002 डॉलर पर स्थित है, जिसके टूटने पर गहरा सुधारात्मक दौर शुरू हो सकता है। 52-हफ्तों का दायरा 3,718 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच फैला हुआ है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और सोने की बुनियादी भूमिका
मानव इतिहास में सोने ने हमेशा मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में अटूट भूमिका निभाई है। आभूषणों के अतिरिक्त यह धातु अशांत वित्तीय माहौल में संकटमोचक मानी जाती है। इसमें किसी देश की सरकार या केंद्रीय बैंक की साख पर निर्भर रहने का जोखिम नहीं होता। केंद्रीय बैंक अपनी मुद्राओं की साख बचाने और आर्थिक मजबूती का भरोसा जगाने के लिए भारी मात्रा में सोने का भंडारण करते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक 2022 में केंद्रीय बैंकों ने कुल 1,136 टन सोना खरीदा था, जिसकी कीमत करीब 70 अरब डॉलर थी और यह इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक सरकारी खरीद दर्ज की गई थी। भारत, चीन और तुर्की जैसे उभरते हुए देश लगातार अपने स्वर्ण भंडार में इजाफा कर रहे हैं।
डिजिटल एसेट्स के मोर्चे पर भी तेजी जारी रही। बिटकॉइन 81,300 डॉलर के पार निकला, एथेरियम 2,600 डॉलर के ऊपर पहुंचा और एक्सआरपी 1.300 डॉलर का आधार बनाए रखने में कामयाब रहा। आगामी कुछ दिनों में ट्रंप-शी बैठक का निष्कर्ष और कच्चे तेल की दिशा ही तय करेगी कि सोना 4,400 डॉलर की दीवार को तोड़कर नई ऊंचाई छूता है या डॉलर की मजबूती इसे और निचले स्तरों पर खींचती है।




















