छत्तीसगढ़ में सावन का महीना सिर्फ बादलों की छांव और देवाधिदेव महादेव की पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति की हरियाली और सांस्कृतिक उल्लास का भी बड़ा पर्व है। इसी उत्साह के तहत बिलासपुर के कंपनी गार्डन में महिलाओं का एक बड़ा जमावड़ा देखने को मिला, जहां सभी ने मिलकर पारंपरिक अंदाज में सावन उत्सव मनाया।
इस विशेष आयोजन के दौरान महिलाओं ने हरे रंग की साड़ियों के साथ-साथ हरी चूड़ियां, माथे पर बिंदी, सिंदूर और पारंपरिक आभूषणों से अपना सोलह श्रृंगार किया था। पार्क का पूरा परिसर हरी छटा और उत्सव की उमंग में डूबा नजर आया। सहेलियों ने एक साथ मिलकर पेड़ों पर पड़े झूलों का आनंद लिया, पारंपरिक गीत गाए और हंसी-मजाक के बीच दिन बिताया।
शिव भक्ति और उत्सव का संगम
इस अनूठे आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. रूमी दुबे ने बताया कि सावन का पूरा महीना महिलाओं के लिए बहुत खास होता है। इस कालखंड में भगवान भोलेनाथ की आराधना की जाती है और सावन के दौरान सुंदरी कार्यक्रम का विशेष आयोजन किया जाता है। महिलाएं पूरी तैयारी और सज-धज के साथ इसमें हिस्सा लेती हैं ताकि मिलकर इस उत्सव की खुशियों को साझा किया जा सके।
हरे रंग में रंगा सुंदरी रूप
प्रकृति और हरियाली का सावन मास से गहरा नाता है। यही वजह है कि इस उत्सव में हरे रंग को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाती है। कार्यक्रम में पहुंची सभी महिलाओं ने हरी साड़ी और चूड़ियों के अलावा बिंदी, सिंदूर व अन्य श्रृंगार प्रसाधनों का विशेष रूप से चयन किया। इसके साथ ही कई महिलाओं ने अपने हाथों में खूबसूरत मेहंदी रचाई और पारंपरिक गहनों से अपने रूप को और भी ज्यादा निखारा।
माता पार्वती के श्रृंगार की परंपरा
इस परंपरा के धार्मिक और सांस्कृतिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए आशा कांकरवाल ने कहा कि सावन का महीना पूरी तरह से भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में महिलाएं प्रकृति की हरियाली के बीच माता पार्वती के स्वरूप की तरह सोलह श्रृंगार करती हैं और अपनी सखियों के संग मिलकर उत्सव मनाती हैं। छत्तीसगढ़ की संस्कृति में हरियाली अमावस्या, हरियाली तीज और हरेली जैसे पर्व भी पर्यावरण और प्रकृति से गहरे जुड़े हुए हैं।
सहेलियों के साथ मिल बैठकर खुशियां बांटना
यह आयोजन केवल पहनावे और श्रृंगार तक ही सीमित नहीं था, बल्कि यह महिलाओं के लिए एक-दूसरे से मिलने और आपसी मेलजोल बढ़ाने का भी बेहतरीन जरिया बना। महिलाएं अपनी पसंद के सुंदर वस्त्रों और श्रृंगार का सामान लेकर इस आयोजन में शामिल हुईं। सामूहिक मनोरंजन, झूलों की पेंग और लोकगीतों की गूंज ने इस उत्सव के माहौल को जीवंत बना दिया।
स्वादिष्ट और पारंपरिक व्यंजनों की महक
किसी भी भारतीय त्योहार की तरह इस सावन उत्सव में भी पारंपरिक खान-पान का विशेष स्थान रहा। इस बारे में माला तिवारी ने बताया कि महिलाएं अपनी क्षमता और पसंद के अनुसार घरों से तरह-तरह के पकवान तैयार करके लाती हैं। इस भोज में भजिया, आलू गुंडा, समोसा, चीला और फरा जैसे छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजन इस महफिल का अहम हिस्सा बने।
कंपनी गार्डन में जीवंत हुई लोक संस्कृति
बिलासपुर के कंपनी गार्डन में आयोजित इस सावन सुंदरी कार्यक्रम ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और महिलाओं के जोश की एक बेहतरीन तस्वीर पेश की। चारों तरफ फैली हरियाली के बीच हरे परिधानों में सजी महिलाओं की उपस्थिति ने सावन के इस महीने को और भी ज्यादा यादगार बना दिया। महिलाओं का मानना है कि यह आयोजन उन्हें अपनी संस्कृति, प्रकृति और सहेलियों के साथ जोड़कर रखता है।



















