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सीमा पार आतंकी साजिश पर NIA का कड़ा एक्शन, जम्मू-कश्मीर में 10 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारीजम्मू-कश्मीर
22 अग॰ 2026, 11:10 pm (1 घंटे पहले)· 3

सीमा पार आतंकी साजिश पर NIA का कड़ा एक्शन, जम्मू-कश्मीर में 10 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के पांच जिलों में 10 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई सीमा पार से रची जा रही आतंकी साजिश के सिलसिले में डिजिटल और भौतिक साक्ष्य जुटाने के लिए की गई है।

श्रीनगर में केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बड़े अभियान के तहत सीमा पार से रची जा रही आतंकी साजिश के मामलों में तलाशी ली है। इस कार्रवाई के दायरे में कई जिले आए हैं, जहां सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने मिलकर सुराग तलाशने का काम किया है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य इस नेटवर्क से जुड़े डिजिटल, दस्तावेजी और अन्य भौतिक साक्ष्यों को अपने कब्जे में लेना है। इसके साथ ही, इस पूरी साजिश के पीछे काम कर रहे स्थानीय मददगारों की भूमिका को भी बारीकी से परखा जा रहा है।

किन जिलों में की गई छापेमारी

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपनी इस कार्रवाई के तहत कुल पांच जिलों को अपनी सूची में शामिल किया था। इनमें श्रीनगर, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम जिले पूरी तरह से शामिल हैं। इन सभी जगहों पर एक साथ दबिश दी गई ताकि संदिग्ध ठिकानों से जुड़े अहम दस्तावेज और अन्य सामग्रियां हाथ लग सकें। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के लोकल सपोर्ट नेटवर्क पर लगाम कसना सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है।

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एफआईआर और मामले की पृष्ठभूमि

यह पूरा कानूनी शिकंजा श्रीनगर के जकूरा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर संख्या 0024/2026 के आधार पर कसा गया है। इसी मामले को आगे बढ़ाते हुए एनआईए ने अपनी औपचारिक प्राथमिकी संख्या आरसी-02/2026/एनआईए/जेएमयू के तौर पर दोबारा दर्ज की थी। इस मामले में कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की जा रही है, जिसमें गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम की धारा 23, शस्त्र अधिनियम की धारा 7 और 25, तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 शामिल हैं।

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ओजीडब्ल्यू की गिरफ्तारी

इस पूरे मामले की जड़ें 31 मार्च, 2026 की देर रात हुई एक घटना से जुड़ी हैं। उस रात एक नाका पॉइंट पर चेकिंग के दौरान प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक ओवर ग्राउंड वर्कर को दबोचा गया था। सुरक्षा बलों ने उसके पास से एक हैंड ग्रेनेड के अलावा जिंदा कारतूस भी बरामद किए थे। इसी गिरफ्तारी के बाद से इस पूरी आतंकी साजिश की परतें एक-एक करके खुलने लगीं और जांच का दायरा लगातार बढ़ता चला गया।

पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स की भूमिका

अब तक की जांच में यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर स्थानीय सहयोगियों के साथ मिलकर नापाक मंसूबों को अंजाम दे रहे थे। इन स्थानीय चेहरों का इस्तेमाल मुख्य रूप से बातचीत करने, साजो-सामान मुहैया कराने, आतंकवादियों की आवाजाही को सुगम बनाने और उन्हें छिपाने के लिए किया जा रहा था। इसके अलावा उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने, रेकी करने और अन्य प्रकार की सहायता पहुंचाने के काम में भी इनका इस्तेमाल हो रहा था।

फंडिंग और हथियारों के स्रोतों की जांच

जांच एजेंसी इस पूरे आतंकी तंत्र के दायरे को पूरी तरह से बेनकाब करने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रही है। इसमें पैसों के लेन-देन के स्रोतों, बातचीत के डिजिटल तरीकों, आरोपियों के आने-जाने के रास्तों और हथियारों तथा विस्फोटकों की सप्लाई चेन की गहराई से पड़ताल की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि रेड के दौरान कई नए साक्ष्य हाथ लगे हैं, जिनका मिलान पहले से एकत्र किए गए डेटा के साथ किया जा रहा है।

जमात-ए-इस्लामी और अन्य हालिया कार्रवाई

इस बड़ी कार्रवाई से कुछ समय पहले ही यह जानकारी भी सामने आई थी कि जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी को दोबारा सक्रिय करने की कोशिशें की जा रही हैं, जिसके चलते पहले भी कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ रेड डाली गई थीं। इसके अलावा, हाल ही में बारामूला जिले में भी आतंकी नेटवर्क से जुड़े विभिन्न आरोपियों की जमीनों को कुर्क करने जैसी सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया गया था।

सवाल-जवाब

एनआईए ने जम्मू-कश्मीर में कुल कितने ठिकानों पर छापेमारी की?
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने सीमा पार आतंकी साजिश के मामले में जम्मू-कश्मीर के पांच जिलों में कुल 10 जगहों पर छापेमारी की।
यह छापेमारी किन-किन जिलों में की गई है?
यह तलाशी अभियान श्रीनगर, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम जिलों में चलाया गया है।
यह पूरा मामला सबसे पहले कहां और कब सामने आया था?
यह मामला 31 मार्च, 2026 की देर रात एक नाका पॉइंट पर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ओजीडब्ल्यू की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुआ था, जिसकी एफआईआर श्रीनगर के जकूरा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी।
इस मामले में किन प्रतिबंधित संगठनों का नाम आया है?
इस मामले की जांच के दौरान प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और ओवर ग्राउंड वर्कर्स के नेटवर्क का नाम सामने आया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·52 मिनट पहले

राष्ट्रीय जांच एजेंसी की यह कार्रवाई दर्शाती है कि पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स अब घाटी में केवल हथियारों के बल पर नहीं, बल्कि स्थानीय ओवर ग्राउंड वर्कर्स के नेटवर्क के सहारे अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। एनआईए द्वारा यूएपीए और शस्त्र अधिनियम के तहत की जा रही यह व्यापक जांच इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में इस आतंकी तंत्र को वित्तीय और रसद सहायता पहुँचाने वाले अन्य स्थानीय चेहरों पर भी कानूनी शिकंजा कस सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·52 मिनट पहले

यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि सुरक्षा बलों और केंद्रीय जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस अब केवल सक्रिय आतंकवादियों को ढेर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस पूरे साजो-सामान और वित्तीय तंत्र को तहस-नहस करना है जो सीमा पार के हैंडलर्स को स्थानीय स्तर पर जीवनदान देता है। जब तक इन ओवर ग्राउंड वर्कर्स के संपूर्ण नेटवर्क और मनी ट्रेल को पूरी तरह से ध्वस्त नहीं किया जाता, तब तक इस तरह की आतंकी साजिशों के दुष्चक्र को रोकना और जमीनी स्तर पर स्थाई शांति स्थापित करना संभव नहीं होगा।

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