गर्मी के मौसम में सूरज की तेज किरणें जब घर की छत पर पड़ती हैं, तो पूरा मकान भट्ठी की तरह तपने लगता है. इसका सीधा असर कमरों के अंदर बैठे लोगों पर पड़ता है और पंखे या एसी की हवा भी नाकाफी लगने लगती है. दूसरी तरफ, बरसात का सीजन आते ही इसी छत पर पानी ठहरने, दीवारों में सीलन उतरने और टपकने जैसी समस्याएं सिर उठाने लगती हैं. इन दोनों ही मौसम की मार से बचने के लिए ज्यादातर लोग अपनी छत पर टाइल्स लगवाने का फैसला लेते हैं. लेकिन क्या सिर्फ टाइल्स बिछा देने मात्र से घर ठंडा रहता है और बारिश के पानी से पक्का बचाव हो जाता है, यह एक बड़ा सवाल है.
छत पर सही तरीके से टाइल्स लगवाई जाएं, तो सूर्य की गर्मी से राहत मिल सकती है. इसमें भी हल्के रंग की टाइल्स सबसे ज्यादा असरदार साबित होती हैं क्योंकि वे धूप को अवशोषित करने के बजाय उसे तेजी से परावर्तित करती हैं. इससे छत की ऊपरी सतह का तापमान काफी हद तक नियंत्रित रहता है और नीचे के कमरों में भी गर्मी का जोर कम महसूस होता है. हालांकि, यह मान लेना गलत होगा कि टाइल्स किसी एयर कंडीशनर की तरह घर को एकदम ठंडा कर देंगी. कमरे का तापमान कई अन्य बातों पर भी निर्भर करता है जैसे कि घर का नक्शा, छत किस दिशा में है, दीवारों में इंसुलेशन कैसा है और बाहर का मौसम कैसा चल रहा है.
वॉटरप्रूफिंग और ढलान का महत्व
बरसात के दिनों में टाइल्स छत को एक सुरक्षा कवच तो देती हैं, लेकिन इसके साथ ही सबसे बुनियादी और जरूरी काम मजबूत वॉटरप्रूफिंग का होता है. अगर टाइल्स लगाने से पहले ही छत की पुरानी दरारों और सीलन को ठीक नहीं कराया गया, तो पानी धीरे-धीरे नीचे रिसने लगेगा. टाइल्स के नीचे अगर नमी फंस जाए, तो वह सड़न, बदबू और गंभीर लीकेज का रूप ले लेती है.
इसलिए टाइल्स का काम शुरू करवाने से पहले पूरी छत का बारीकी से निरीक्षण करवाना चाहिए. पुरानी और चौड़ी दरारों को अच्छी तरह भरवाना, एक मजबूत वॉटरप्रूफिंग परत बिछाना और छत पर पानी के बहाव के लिए सही ढलान बनाना बहुत आवश्यक है. छत पर किसी भी कोने में बारिश का पानी रुकना नहीं चाहिए. इसके लिए जरूरी है कि घर के ड्रेनेज सिस्टम और नालियों की भी समय पर सफाई हो और वे पूरी तरह दुरुस्त रहें.
टाइल्स चुनते वक्त किन बातों का रखें ख्याल
बाजार में टाइल्स की अनगिनत वैरायटी देखकर केवल उनके रंग और डिजाइन पर फैसला ले लेना सही नहीं है. अगर आपका इलाका बहुत गर्म रहता है, तो हमेशा हल्के शेड वाली टाइल्स ही चुनें क्योंकि गहरे रंग की टाइल्स धूप को तेजी से खींचती हैं और बहुत ज्यादा गर्म हो जाती हैं. इसके अलावा, टाइल्स के कुल वजन को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर मकान पुराना है या उसकी छत की बीम कमजोर है, तो अतिरिक्त वजन का बोझ डालने से पहले किसी इंजीनियर या निर्माण विशेषज्ञ से छत की लोड उठाने की क्षमता जरूर जांच लें.
संक्षेप में कहें तो, छत पर टाइल्स लगवाना गर्मी और बरसात दोनों ही ऋतुओं में काफी फायदेमंद साबित हो सकता है, बशर्ते इसे वैज्ञानिक और सही तरीके से इंस्टॉल किया जाए. सिर्फ लुक्स या सुंदरता बढ़ाने के चक्कर में टाइल्स न बिछाएं, बल्कि वॉटरप्रूफिंग, ड्रेनेज, सही ढलान और छत की सहनशक्ति को प्राथमिकता दें. यदि सही सामग्री का चुनाव किया जाए और मिस्त्री का काम बेहतरीन हो, तो यह उपाय आपके आशियाने को चिलचिलाती धूप, सीलन और पानी के रिसाव से मजबूती से महफूज रख सकता है.



















