पूरे देश में 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पावन पर्व उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस खास मौके पर देहरादून में ग्रामीण अंचलों की महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही हस्तशिल्प राखियों की मांग बाजार में काफी तेजी से ऊपर उठ रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ मिलकर प्रदेश के विभिन्न विकासखंडों की महिलाएं राखी बनाने के इस काम को अपने स्वरोजगार का मुख्य साधन बना रही हैं। इसके जरिए वे अपनी कमाई में लगातार इजाफा करते हुए पूरी तरह आत्मनिर्भर बन रही हैं। देहरादून और आसपास के कई अन्य जिलों की महिलाओं ने मिलकर अत्यंत मनमोहक और नए डिजाइनों वाली राखियों का निर्माण किया है। इस कड़ी में 27 अगस्त तक देहरादून स्थित सचिवालय परिसर में एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है, जहां राज्य की हुनरमंद महिलाएं अपने हाथों से बनी विभिन्न प्रकार की राखियां प्रदर्शित करने के लिए लाई हैं।
भोजपत्र और चीड़ के पत्तों से बन रहा है नया आकर्षण
देहरादून की उद्यमी नमिता रावत ने बातचीत के दौरान साझा किया कि उनकी संस्था से बीस से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो पूरी लगन के साथ राखियां बनाने में जुटी हैं। प्रदर्शनियों में उनके स्टॉल पर प्रदर्शित इन राखियों को खरीदारों द्वारा बेहद पसंद किया जा रहा है। उनकी ये राखियां पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल और हानिकारक रसायनों से मुक्त होती हैं। खासतौर पर चीड़ की पत्तियों यानी पिरूल और प्राचीन भोजपत्र से बनाई जा रही राखियों की बाजार में भारी मांग देखी जा रही है। भारतीय संस्कृति में भोजपत्र को अत्यंत पवित्र दर्जा प्राप्त है और प्राचीन समय से ही इसका उपयोग तमाम शुभ कार्यों में किया जाता रहा है। इसके अलावा, जंगलों में आग यानी वनाग्नि का मुख्य कारण बनने वाली पिरूल की इन पत्तियों से अब महिलाएं टोकरियां, मंदिर, आभूषण और सुंदर राखियां गढ़ रही हैं। नमिता ने यह भी बताया कि इस बार वे बाजार में पहली बार पूरी तरह क्रोशिया से बुनी हुई अनूठी राखियां लेकर आई हैं, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं।
सचिवालय में सजी प्रदर्शनी और सरकारी मदद का विस्तार
देहरादून की सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार के अनुसार, मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के अंतर्गत 24 अगस्त से 27 अगस्त तक उत्तराखंड सचिवालय के भीतर विशेष स्टॉल सजाए गए हैं। इन काउंटरों पर विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपनी कलात्मक राखियों के साथ-साथ कई तरह के पारंपरिक पहाड़ी और स्थानीय उत्पादों की नुमाइश और बिक्री कर रही हैं। इस पहल के तहत अब तक लगभग डेढ़ हजार राखियां इन स्टॉलों तक पहुंच चुकी हैं। ये मेहनती महिलाएं इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों से मिलने वाले ऑर्डरों को समय पर तैयार करके सीधे ग्राहकों के घरों तक पहुंचा रही हैं। इस आधुनिक व्यवस्था से उनके इस छोटे कारोबार को न केवल स्थानीय बाजार का दायरा मिल रहा है, बल्कि डिजिटल बाजार तक भी शानदार पहुंच हासिल हो रही है।
सहसपुर से डोईवाला तक फैला स्वरोजगार का जाल
जिले के सहसपुर और डोईवाला विकासखंडों के अंतर्गत आने वाले स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं भी बड़े पैमाने पर इन खास राखियों के निर्माण में अपना योगदान दे रही हैं। जिला प्रशासन की ओर से इस दिशा में लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह का कहना है कि मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार के बेहतरीन और टिकाऊ अवसर मुहैया कराने के लिए लगातार ठोस प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।



















