ग्रामीण क्षेत्रों में खपरैल और मिट्टी की दीवारों से बने कच्चे मकानों में अक्सर सांपों का प्रवेश हो जाता है। ऐसे आवासों में छतों पर लगी बल्लियां, बांस की लकड़ियां और कच्ची मिट्टी के कोने सांपों को छिपने के लिए उपयुक्त ठिकाना प्रदान करते हैं। एक बार इन संकरे कोनों में सुरक्षित जगह मिलने के बाद सांप वहां लंबे समय तक छिपे रहते हैं और जल्दी बाहर निकलने का नाम नहीं लेते। लोग उन्हें देखकर भयभीत हो जाते हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में जीव को नुकसान पहुंचाए बिना शांत रहकर बाहर निकालने के कई पारंपरिक तरीके मौजूद हैं।
सांप को छेड़े बिना धैर्य रखने की सलाह
जब भी घर की छत, पंखे या किसी कोने में सांप लटका हुआ दिखाई दे अथवा किसी के आते ही वह तुरंत बिल में छिप जाए, तो उसके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ करने या उसे मारने का प्रयास करने से बचना चाहिए। मधुबनी की निवासी सोनी देवी के अनुसार, अचानक सांप सामने आ जाने पर घबराने अथवा उत्तेजित होने की आवश्यकता नहीं होती। अत्यधिक शोर मचाने या डंडे से हमला करने की बजाय धैर्यपूर्वक स्थिति को संभालना चाहिए, जिससे किसी भी व्यक्ति को कोई शारीरिक नुकसान न पहुंचे।
लाह की लहठी के धुएं का देसी उपाय
घर में घुसे सांप को बिना मारे कुछ ही मिनटों में दूर भगाने के लिए पारंपरिक उपायों का सहारा लिया जा सकता है। सोनी देवी बताती हैं कि इस देसी नुस्खे में लोग लाह से बनी लहठी (लाह की चूड़ियां) को सांप के छिपने वाले स्थान के आसपास जलाते हैं। लाह के सुलगने से उत्पन्न होने वाला विशिष्ट धुआं और उसकी तीखी गंध सांपों को बिल्कुल रास नहीं आती। इस भारी गंध और धुएं के असर से सांप तुरंत असहज होकर उस सुरक्षित समझे जाने वाले ठिकाने को छोड़कर खुद ही भागने लगता है।
सरसों, कपड़ा और लाल मिर्च का मिश्रण
लाह की लहठी के अतिरिक्त घरों में सुलभ अन्य सामग्रियों से भी असरदार उपाय तैयार किया जाता है। सरसों के दाने, कागज, पुराना कपड़ा और सूखी लाल मिर्च को एक साथ सुलगाने से निकलने वाला धुआं अत्यंत तीखा होता है। इस धुएं का प्रभाव बिलों के भीतर तक पहुंच जाता है, जिसके कारण बिल में दुबका सांप भी कुछ ही पलों में बाहर निकलकर खुले स्थान की ओर भाग जाता है। इन घरेलू तरीकों को अपनाने से मकान में मौजूद लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित रहती है और जीव को बिना मारे प्राकृतिक रूप से परिसर से बाहर कर दिया जाता है।


















