साइबर ठगी की रकम वापस पाने के लिए डॉ रक्षित टंडन ने दिए 5 मूलमंत्र, रायपुर में 300 पुलिस अधिकारियों को दी गई स्पेशल ट्रेनिंगवर्कआउट के अनुसार जिम वियर का सही चुनाव जानिए कब ढीले और कब टाइट कपड़े पहनना होता है फायदेमंदबैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि की उम्मीदों और मजबूत आर्थिक आंकड़ों से जापानी येन सात महीने के उच्च स्तर के करीब पहुंचायूरोपीय फुटबॉल के सबसे महान दबदबों से पेरिस सेंट-जर्मेन की तुलना और महाद्वीपीय प्रभुत्व का इतिहासघर पर बनाएं बाजार से बेहतर आम का मीठा अचार, सालों-साल नहीं होगा खराबबोगनवेलिया के रंग-बिरंगे फूलों से सजाएं अपना घर, सितंबर में पौधा रोपने के 7 असरदार नियममध्य पूर्व में सैन्य तनाव से कच्चे तेल में उबाल, ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के करीब पहुंचामिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, कच्चे तेल में तेजी से कैनेडियन डॉलर को मिला सहारासोशल मीडिया पर छाया गेमैक्सिंग का खुमार, जानिए क्यों सिर चढ़कर बोल रहा है चमक-धमक का यह नया ट्रेंडअमेरिकी डॉलर में गिरावट से यूरो 12 दिन के उच्च स्तर 1.1600 के पार, ईसीबी फैसले और खाड़ी तनाव पर टिकी नजरें
सितंबर में अपने घर पर उगाएं पौष्टिक ऑर्गेनिक सब्जियां, उद्यान विशेषज्ञ डॉ पुनीत कुमार पाठक ने दिए आसान टिप्सजीवनशैली
9 सित॰ 2026, 11:44 am (1 घंटे पहले)· 2

सितंबर में अपने घर पर उगाएं पौष्टिक ऑर्गेनिक सब्जियां, उद्यान विशेषज्ञ डॉ पुनीत कुमार पाठक ने दिए आसान टिप्स

सितंबर के मौसम में नमी और सही तापमान के कारण घरेलू बगिया में पालक, गाजर और टमाटर जैसी सब्जियां उगाना आसान होता है। जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक के अनुसार थोड़ी सी सही देखभाल और जैविक खाद से घर पर ही रसायन-मुक्त पैदावार ली जा सकती है।

सितंबर की शुरुआत के साथ ही मौसम का मिजाज बदलने लगता है और हवा में नमी के साथ तापमान पौधों की बढ़त के अनुकूल हो जाता है। घर के आंगन, छत या बालकनी में ताजी सब्जियां उगाने का मन बना रहे लोगों के लिए यह समय सबसे मुफीद साबित होता है। जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक के अनुसार, जो लोग पहली बार गार्डनिंग की दुनिया में कदम रख रहे हैं, वे इस अनुकूल मौसम का पूरा फायदा उठा सकते हैं। थोड़ी सी समझदारी और नियमित प्रयास से कोई भी अपने परिवार के लिए पौष्टिक, रसायन-मुक्त और ताजी सब्जियों की नियमित आपूर्ति घर पर ही सुनिश्चित कर सकता है।

पत्तेदार सब्जियों से करें शुरुआत

किचन गार्डन की शुरुआत करने वालों के लिए पालक, मेथी, धनिया और सरसों बोना सबसे आसान और फायदेमंद माना जाता है। इन पत्तेदार फसलों की खास बात यह है कि इनके बीज बहुत तेजी से अंकुरित होते हैं और इन्हें फलने-फूलने के लिए बहुत गहरे गमलों की आवश्यकता नहीं होती। साधारण उथले बर्तनों या कम गहराई वाले ट्रे में भी इनकी बुवाई की जा सकती है। बुवाई के कुछ ही हफ्तों के भीतर हरी-भरी पत्तियां कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं, जिन्हें सीधे रसोई में इस्तेमाल किया जा सकता है।

ये भी पढ़ें

कंदमूल और जड़ वाली फसलों की रोपाई

जमीन के भीतर तैयार होने वाली सब्जियों के उत्पादन के लिए भी सितंबर की जलवायु अत्यंत उपयुक्त रहती है। यदि आप मूली, गाजर या शलजम उगाने की योजना बना रहे हैं, तो बड़े गमलों या ग्रो बैग का इस्तेमाल करना चाहिए। चूंकि इन सब्जियों का मुख्य भाग मिट्टी के नीचे विकसित होता है, इसलिए गमले की मिट्टी काफी भुरभुरी और गहरी होनी चाहिए ताकि जड़ें बिना किसी रुकावट के फैल सकें। सही समय पर संतुलित सिंचाई करने से इन कंदमूल फसलों का आकार बेहतर होता है और उनका प्राकृतिक स्वाद भी बरकरार रहता है।

टमाटर, मिर्च और बैंगन के पौधे लगाने का सही तरीका

यदि आपके पास गमले उपलब्ध हैं, तो आप फल देने वाली सब्जियों जैसे कि टमाटर, हरी मिर्च और बैंगन की खेती भी आसानी से कर सकते हैं। इसके लिए सीधे बीज बोने के बजाय स्थानीय नर्सरी या बाजार से स्वस्थ छोटे पौधे खरीदकर गमलों में रोपना अधिक व्यावहारिक होता है। इन पौधों को पत्तेदार सब्जियों की तुलना में थोड़ी अधिक देखभाल, पोषण और निरंतर धूप की जरूरत पड़ती है। जब पौधों में फूल खिलने के बाद रंग-बिरंगे फल दिखाई देने लगते हैं, तो आपकी मेहनत का फल स्पष्ट रूप से दिखने लगता है।

जैविक खाद से तैयार करें उपजाऊ मिट्टी

सब्जियों के स्वस्थ विकास और भरपूर पैदावार की असली नींव सही मिट्टी के मिश्रण पर निर्भर करती है। गमले में सामान्य मिट्टी भरने के बजाय उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद या केंचुआ खाद मिलाना बहुत जरूरी होता है। यह जैविक खाद मिट्टी की संरचना को सुधारती है और पौधों को सभी आवश्यक पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से प्रदान करती है। रासायनिक उर्वरकों से परहेज करके आप अपने घर में पूरी तरह से सुरक्षित, शुद्ध और सेहतमंद सब्जियां पैदा कर सकते हैं।

पर्याप्त धूप और सही स्थान का चयन

किसी भी पौधे के जीवित रहने और तेजी से बढ़ने के लिए सूर्य का प्रकाश अनिवार्य घटक है। अपने पौधों के गमलों को घर के किसी ऐसे कोने में रखें जहां हर दिन कम से कम 4 से 5 घंटे सीधी धूप पड़ती रहे। पर्याप्त प्रकाश मिलने से पौधे भीतर से मजबूत बनते हैं, उनमें कीटों या फंगल बीमारियों का खतरा कम होता है और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया तेजी से होती है। इससे पौधों में फल और फूल आने की गति भी बेहतर बनी रहती है।

सिंचाई के नियम और पानी का संतुलन

पौधों में पानी डालते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि अत्यधिक पानी देना पौधों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। गमले में पानी रुकने या जलभराव होने से जड़ों के सड़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए हमेशा मिट्टी की ऊपरी सतह की नमी जांच लें और उसके सूखने पर ही पानी दें। सुबह या शाम के समय पौधों की सिंचाई करना सबसे उत्तम रहता है। सही मात्रा में पानी देने से पौधे हमेशा तरोताजा और हरे-भरे बने रहते हैं।

कीट नियंत्रण और नियमित रखरखाव

घरेलू सब्जियों की देखभाल करना कोई कठिन काम नहीं है, बस थोड़ा सा नियमित ध्यान देने की आवश्यकता होती है। पौधों को हानिकारक कीड़ों और मक्खियों से बचाने के लिए नीम के तेल का हल्का छिड़काव करना एक सुरक्षित और जैविक उपाय है। इसके अलावा, समय-समय पर पौधों की पीली या सूखी पत्तियों को काटकर हटाते रहना चाहिए और गमले की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करते रहना चाहिए। इस तरह की छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपनी घरेलू बगिया को हमेशा हरा-भरा रख सकते हैं।

सवाल-जवाब

सितंबर के महीने में कौन-कौन सी सब्जियां आसानी से उगाई जा सकती हैं?
सितंबर में पालक, मेथी, धनिया, सरसों जैसी पत्तेदार सब्जियां और मूली, गाजर, शलजम जैसी कंदमूल फसलें आसानी से बोई जा सकती हैं।
टमाटर, मिर्च और बैंगन उगाने के लिए क्या करना चाहिए?
इन फसलों के लिए सीधे बीज बोने के बजाय स्थानीय नर्सरी से तैयार छोटे पौधे लाकर गमलों में रोपना अधिक फायदेमंद होता है।
गमले की मिट्टी तैयार करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
सामान्य मिट्टी में सड़ी हुई गोबर की खाद या केंचुआ खाद मिलाएं और रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से बचें।
पौधों को रोजाना कितने घंटे की धूप मिलनी चाहिए?
पौधों को मजबूत बनाने और अच्छी उपज के लिए प्रतिदिन कम से कम 4 से 5 घंटे की सीधी धूप मिलना जरूरी है।
गमले में पानी डालते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
गमले में जरूरत से ज्यादा पानी न भरें। मिट्टी की ऊपरी सतह सूखने पर ही सुबह या शाम के समय सिंचाई करें।
पौधों को कीड़ों से बचाने के लिए क्या उपाय करें?
कीटों से बचाव के लिए नीम के तेल का हल्का छिड़काव करें, सूखी पत्तियां हटाएं और समय-समय पर मिट्टी की हल्की गुड़ाई करें।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR