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छात्रों के बुलावे से मिली पहचान, ग्रेटर नोएडा में संजय अरोड़ा के 40 स्वादों वाले पेटीज का 20 साल का सफरजीवनशैली
5 अक्तू॰ 2026, 1:07 pm (2 घंटे पहले)· 0

छात्रों के बुलावे से मिली पहचान, ग्रेटर नोएडा में संजय अरोड़ा के 40 स्वादों वाले पेटीज का 20 साल का सफर

ग्रेटर नोएडा के अल्फा-1 कमर्शियल बेल्ट में पढ़ाई के साथ शुरू हुआ संजय अरोड़ा का छोटा सा काम आज 35 से 40 तरह की कस्टमाइज्ड पेटीज के मशहूर ठिकाने में तब्दील हो चुका है।

ग्रेटर नोएडा के अल्फा-1 कमर्शियल बेल्ट के चहल-पहल भरे बाजार में कई खान-पान की दुकानें मौजूद हैं, लेकिन पिछले दो दशकों से एक खास दुकान ने शहरवासियों के दिल में मजबूत जगह बनाई है। यह कहानी संजय अरोड़ा की है, जिन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ पेटीज का एक बेहद साधारण स्टॉल लगाया था। आज वही साधारण शुरुआत करीब 35 से 40 किस्मों की वेज और नॉनवेज पेटीज परोसने वाले एक चर्चित फूड स्पॉट के रूप में स्थापित हो चुकी है, जहां ग्राहकों की फरमाइश पर स्वाद को कस्टमाइज भी किया जाता है।

छात्रों के संबोधन से बना दुकान का नाम

दुकान संचालक संजय अरोड़ा अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि जब उन्होंने काम शुरू किया था, तब इलाके में कॉलेज और कोचिंग संस्थानों के छात्र बड़ी तादाद में आते थे। खरीदारी करते समय युवा छात्र अक्सर उन्हें 'अंकल' कहकर आवाज लगाते थे। कोई कहता था कि अंकल यह पेटीज दे दो, तो कोई दूसरी चीज मांगते हुए अंकल शब्द का ही इस्तेमाल करता था। लगातार बोले जाने वाले इसी आत्मीय संबोधन को उन्होंने अपनी दुकान की पहचान बना लिया और कारोबार का नाम आधिकारिक तौर पर अंकल पेटीज रख दिया।

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शुरुआती सीमित मेन्यू से 40 किस्मों तक का विस्तार

शुरुआती दौर में संजय अरोड़ा की दुकान पर सिर्फ गिनी-चुनी सामान्य पेटीज ही बिका करती थीं। जैसे-जैसे वक्त बीता, ग्राहकों ने नए स्वाद और खास सामग्रियों की मांग शुरू की। संजय ने भी बाजार की नब्ज पहचानी और मेन्यू में लगातार नए प्रयोग जोड़े। आज इस दुकान के काउंटर पर 35 से 40 प्रकार के विकल्प तैयार मिलते हैं, जिनमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों वर्ग शामिल हैं। यही विस्तृत मेन्यू अब इस फूड जॉइंट की सबसे बड़ी यूएसपी बन चुका है।

कस्टमाइजेशन की सुविधा और मेन्यू की खासियतें

इस दुकान की लोकप्रियता केवल लंबी मेन्यू लिस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां आने वाले खरीदार अपनी मनपसंद स्टफिंग, सॉस और मसालों के आधार पर पेटीज को कस्टमाइज भी करवा सकते हैं। शाकाहारी विकल्पों में पनीर से लेकर कई खास फ्लेवर उपलब्ध हैं। वहीं मांसाहारी शौकीनों के लिए चिकन एग पेटीज, क्लासिक चिकन पेटीज, मखनी पेटीज और तीखी चिकन पेरी-पेरी जैसी वैरायटी लगातार तैयार की जाती हैं। ग्राहकों की नई पसंद के मुताबिक मेन्यू में नए स्वाद जोड़ने का सिलसिला आज भी जारी है।

15 साल पुराने खरीदार और प्रोफेसरों की पसंद

अल्फा-1 कमर्शियल बेल्ट का प्रमुख व्यापारिक केंद्र होने के कारण यहां आसपास के संस्थानों, दफ्तरों के कर्मचारियों और विद्यार्थियों की लगातार आवाजाही रहती है। स्थानीय खरीदार और प्रोफेसर आरबी सिंह बताते हैं कि वे पिछले 15 साल से नियमित रूप से यहां पेटीज खाने आ रहे हैं। एक शिक्षक के तौर पर वे कई मौकों पर अपने छात्रों को भी साथ लेकर पहुंचते हैं, क्योंकि जब भी कुछ नया या अलग खाने की इच्छा होती है, तो वे सीधे इसी ठिकाने का रुख करते हैं।

स्थानीय निवासियों का भरोसा और दो दशक की यात्रा

इलाके के स्थानीय निवासी जोगिंदर खारी भी इस दुकान के पुराने और नियमित ग्राहकों में शामिल हैं। उनका मानना है कि पेटीज का बेहतरीन स्वाद और विकल्पों की भरमार ग्राहकों को बार-बार खींच लाती है। करीब 20 साल पहले कॉलेज की पढ़ाई के दौरान शुरू किया गया यह काम आज संजय अरोड़ा के लिए सिर्फ रोजी-रोटी का जरिया नहीं, बल्कि शहर के लोगों के प्यार और अटूट भरोसे की एक मुकम्मल दास्तान बन चुका है।

सवाल-जवाब

ग्रेटर नोएडा में अंकल पेटीज की दुकान कहां स्थित है?
यह दुकान ग्रेटर नोएडा के अल्फा-1 कमर्शियल बेल्ट में स्थित है।
संजय अरोड़ा ने इस दुकान की शुरुआत कब और कैसे की थी?
उन्होंने करीब 20 साल पहले अपनी पढ़ाई जारी रखने के दौरान एक छोटी सी पेटीज की दुकान के रूप में इसकी शुरुआत की थी।
इस दुकान का नाम अंकल पेटीज कैसे पड़ा?
शुरुआती दौर में आने वाले कॉलेज छात्र संचालक संजय अरोड़ा को प्यार से 'अंकल' कहकर बुलाते थे, जिससे धीरे-धीरे इस दुकान का नाम 'अंकल पेटीज' पड़ गया।
दुकान पर पेटीज की कितनी किस्में उपलब्ध हैं?
दुकान पर वर्तमान में लगभग 35 से 40 तरह की वेज और नॉनवेज पेटीज उपलब्ध हैं।
नॉनवेज पेटीज में कौन-कौन से प्रमुख विकल्प मिलते हैं?
नॉनवेज विकल्पों में चिकन एग पेटीज, चिकन पेटीज, मखनी पेटीज और चिकन पेरी-पेरी पेटीज शामिल हैं।
प्रोफेसर आरबी सिंह इस दुकान से कितने समय से जुड़े हैं?
प्रोफेसर आरबी सिंह पिछले करीब 15 साल से नियमित रूप से यहां पेटीज खाने आ रहे हैं।
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