अपने सपनों का आशियाना तैयार करना हर किसी के जीवन का एक बड़ा पड़ाव होता है। जब निर्माण कार्य शुरू होता है तो दीवारों और छत के साथ-साथ खिड़कियों और दरवाजों के चयन पर भी खास ध्यान देना जरूरी हो जाता है। लंबे समय से भारतीय घरों में चौखट, खिड़कियों और दरवाजों के लिए पारंपरिक रूप से लकड़ी का प्रयोग होता आया है। हालांकि समय बीतने के साथ लकड़ी के अपने कई नुकसान भी सामने आते हैं। बारिश का पानी लगने पर लकड़ी के ढांचे फूल जाते हैं, उनमें सड़न पैदा होने लगती है और अक्सर दीमक लगने की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है। इसके चलते लोगों को बार-बार मेंटेनेंस और रिपेयरिंग पर भारी खर्च करना पड़ता है।
धातु के विकल्पों की सीमाएं और बढ़ती परेशानियां
लकड़ी के झंझटों से बचने के लिए पिछले कुछ दशकों में लोगों ने धातु यानी लोहे और एल्यूमीनियम से बनी खिड़कियों का रुख किया। लेकिन धातु से बने इन ढांचों की भी अपनी अलग कमजोरियां हैं। लोहे की खिड़कियों और दरवाजों पर नमी लगते ही जंग पकड़ने का खतरा बना रहता है, जिसके चलते उन पर नियमित रूप से प्राइमर और पेंट करना मजबूरी बन जाता है। इसके अतिरिक्त लोहा सूरज की किरणों से निकलने वाली गर्मी को तेजी से सोखता है। इसका सीधा असर यह होता है कि गर्मियों के मौसम में घर के अंदर का तापमान बढ़ जाता है और कमरों में अतिरिक्त गर्माहट महसूस होने लगती है। इन्हीं कमियों के कारण गृहस्वामी अब एक ऐसे टिकाऊ विकल्प की तलाश में रहते हैं जो हर मौसम में बिना परेशानी के टिक सके।
UPVC फ्रेम की खूबियां और आधुनिक घरों में उपयोग
पारंपरिक सामग्रियों की इन्हीं दिक्कतों के समाधान के रूप में अब UPVC सामग्री से बने खिड़की और दरवाजे तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में करीब 15 वर्षों से खिड़की-दरवाजे तैयार करने के काम से जुड़े कारीगर सुशील कुमार के अनुसार, UPVC खिड़कियों की बनावट बेहद खास होती है। इनमें सबसे बड़ा गुण साउंड प्रूफिंग का होता है, यानी ये बाहर के अनचाहे शोर को कमरे के भीतर आने से प्रभावी ढंग से रोकती हैं। यही कारण है कि घर में शांत स्टडी रूम तैयार करना हो या फिर वर्क फ्रॉम होम के लिए ऑफिस स्पेस बनाना हो, UPVC के फ्रेम बेहद उपयोगी साबित होते हैं। इसके साथ ही यह सूरज की तीखी धूप और ताप को भी अंदर आने से रोकता है, जिससे गर्मियों के दौरान घर के भीतर ठंडक बनी रहती है।
दीर्घकालिक बचत और शून्य मेंटेनेंस का फायदा
UPVC खिड़कियों की एक और बड़ी विशेषता यह है कि इन पर पानी का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। तेज बारिश या नमी के संपर्क में आने के बावजूद इनमें न तो सड़न होती है और न ही ढांचा टेढ़ा-मेढ़ा होता है। सुशील कुमार स्पष्ट करते हैं कि इन्हें खोलने और बंद करने पर किसी तरह की कर्कश आवाज भी नहीं आती, जो अक्सर पुरानी लोहे या लकड़ी की खिड़कियों में सुनाई देती है। इसके अलावा सबसे बड़ी राहत यह है कि UPVC से बनी खिड़कियों पर कभी भी पेंट कराने की जरूरत नहीं पड़ती। बाजार में यह सादे सफेद रंग के साथ-साथ अलग-अलग रंगीन विकल्पों में भी उपलब्ध है। मौसम की मार झेलने की क्षमता, शून्य मेंटेनेंस और खूबसूरत फिनिशिंग की वजह से ही अब नए मकान बनवाते समय लोग UPVC को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं।



















