नजर कमजोर होने पर या धूप से बचाव के लिए लोग अक्सर महंगे फ्रेम और उन्नत तकनीक वाले ग्लास पर भारी रकम खर्च करते हैं। इसके बावजूद अधिकांश लोग चश्मे की रोजमर्रा की देखभाल और उसे साफ रखने के बुनियादी तौर-तरीकों से पूरी तरह अनजान रहते हैं। गलत ढंग से सफाई करने के चलते कुछ ही दिनों में चश्मे की सतह पर बारीक लकीरें और खरोंचें उभर आती हैं, जिससे सामने का दृश्य धुंधला दिखाई पड़ने लगता है। दृष्टि बाधित होने पर कई बार लोगों को असमय ही नया चश्मा बनवाने पर मजबूर होना पड़ता है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ता है। इंटरनेट पर मौजूद अप्रमाणिक सुझावों के चक्कर में लोग शीशे पर घरेलू उत्पाद रगड़कर समस्या को और ज्यादा बढ़ा लेते हैं।
रूमाल या कपड़ों से पोंछना क्यों बन जाता है नुकसानदेह
दैनिक जीवन में चश्मा पहनने वाले अधिकांश व्यक्ति सफाई को लेकर बेहद लापरवाह रवैया अपनाते हैं। रास्ते में चलते समय, दफ्तर में या घर पर जब भी लेंस पर धुंध जमती है, तो लोग अक्सर अपनी कमीज के छोर, जेब में रखे रूमाल, तौलिये अथवा साधारण टिश्यू पेपर से शीशे को तेजी से रगड़ देते हैं। यह आदत चश्मे के जीवन को गंभीर नुकसान पहुंचाती है। चश्मे के शीशों पर दिनभर वातावरण में मौजूद महीन धूल और मिट्टी के कण आकर चिपकते रहते हैं। जब किसी खुरदुरे कपड़े या रूमाल से शीशे को दबाकर पोंछा जाता है, तो वे बारीक धूल कण लेंस की सतह पर सैंडपेपर की तरह घिसते हैं। इस लगातार घर्षण के परिणामस्वरूप चश्मे पर पक्के खरोंच के निशान बन जाते हैं। चश्मे की सतह को सुरक्षित रखने के लिए सूखे कपड़े के बजाय विशेष तरल स्प्रे का उपयोग करना अनिवार्य है।
घरेलू नुस्खों से स्क्रैच मिटाने का दावा कितना सच
अक्सर विभिन्न वीडियो और इंटरनेट मंचों पर यह दावा किया जाता है कि टूथपेस्ट, बेकिंग सोडा अथवा नींबू के रस की मदद से चश्मे के शीशों पर पड़े खरोंच आसानी से मिटाए जा सकते हैं। इस भ्रम में आकर कई लोग टूथपेस्ट को शीशे पर लगाकर दो-तीन मिनट छोड़ देते हैं और फिर पानी से धोते हैं। सच्चाई यह है कि टूथपेस्ट, नींबू रस या बेकिंग सोडा जैसी चीजें खरोंचों को मिटाने में कतई सक्षम नहीं हैं। इन रासायनिक और दानेदार चीजों का इस्तेमाल करने से चश्मे के ग्लास पर चढ़ी विशेष सुरक्षात्मक परत स्थायी रूप से छिल जाती है। इससे लेंस की स्पष्टता हमेशा के लिए खराब हो सकती है, इसलिए ऐसे अनर्गल प्रयोगों से पूरी तरह बचना चाहिए।
ऑप्टिशियन से रीकोट कराने का सबसे कारगर विकल्प
शीशे पर पहले से आ चुके खरोंचों को दुरुस्त कराने का सबसे सुरक्षित और पेशेवर तरीका ऑप्टिशियन की मदद लेना है। चश्मे के ग्लास की बनावट को समझें तो मुख्य लेंस के ऊपर सबसे पहले एक हार्ड कोट की परत लगाई जाती है। इस हार्ड कोट के ठीक ऊपर एक इंटर फ्लेक्शन कोटिंग चढ़ाई जाती है। इस तरह लेंस पर मुख्य रूप से दोहरी कोटिंग की सुरक्षा होती है। जब तक खरोंचें केवल इन बाहरी परतों तक सीमित रहती हैं, संबंधित कंपनी पुराने लेप को डीकोट करके उस पर फिर से नई कोटिंग चढ़ा सकती है। इस प्रक्रिया में करीब 200-300 रुपये का मामूली खर्च आता है। अगर चश्मा काफी कीमती है, तो 200-300 रुपये खर्च करके उसे दोबारा नया जैसा बनाया जा सकता है। हालांकि, यदि खरोंच बहुत गहरी होकर मूल लेंस के भीतर तक उतर चुकी हो, तो वह कोटिंग के जरिए भी ठीक नहीं हो सकती।
घर पर चश्मा धोने और चमकाने की सही कार्यविधि
चश्मे को खरोंचों से बचाए रखने का सबसे सीधा और सुरक्षित माध्यम लेंस क्लीनर स्प्रे है। सामान्यतः किसी प्रतिष्ठित ब्रांड का चश्मा खरीदने पर क्लीनर स्प्रे साथ में मुफ्त मिल जाता है। सफाई के लिए स्प्रे को शीशों पर छिड़कें, फिर अपनी उंगलियों से तरल को लेंस के दोनों तरफ समान रूप से फैला लें। इसके बाद किसी साफ माइक्रो फाइबर कपड़े की सहायता से शीशे को हल्के हाथों से साफ करें। यदि किसी समय माइक्रो फाइबर कपड़ा उपलब्ध न हो, तो केवल तात्कालिक विकल्प के रूप में टिश्यू पेपर का सहारा लिया जा सकता है। क्लीनर स्प्रे समाप्त हो जाने की स्थिति में घर पर आधा लीटर गुनगुना पानी लें। चश्मे को उस पानी में डुबोएं और डिश वॉशर क्लीनर की कुछ बूंदों से हल्के से धोएं। इसके पश्चात चश्मे को नल के बहते पानी के नीचे रखकर खंगालें और अंत में माइक्रो फाइबर कपड़े से सुखाकर पोंछ लें।
















