दीपावली का पावन पर्व केवल दीपों की जगमगाहट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वच्छता, पवित्रता और घर में नई ऊर्जा के संचार का भी उत्सव माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर पूरी तरह स्वच्छता और शुद्धि का वातावरण होता है, वहां सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी का वास होता है। इसी वजह से त्योहार से पहले घरों के कोने-कोने को चमकाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। अगर आप भी इस त्योहारी मौसम में घर की सफाई का काम शुरू करने जा रहे हैं, तो कुछ ऐसी चीजों की पहचान करना बेहद आवश्यक है जो वास्तु और स्वास्थ्य की दृष्टि से घर में रुकावट पैदा करती हैं।
टूटे बर्तन, कांच और बंद घड़ियों का वास्तु प्रभाव
घर में मौजूद टूटे हुए कांच, दरार पड़े कप, प्लेट या क्षतिग्रस्त बर्तनों को रखना वास्तु नियमों के अनुसार शुभ नहीं माना जाता। ऐसी चीजें घर के परिवेश में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती हैं, इसलिए सफाई के पहले चरण में ही इन्हें बाहर कर देना चाहिए। इसके साथ ही, कई घरों में दीवार पर या दराजों में बंद अथवा खराब घड़ियां पड़ी रहती हैं। वास्तु विज्ञान में बंद घड़ी को समय के ठहर जाने और प्रगति में बाधा का संकेत माना गया है। दीपावली की पूजा से पहले या तो इन घड़ियों में नई बैटरी लगाकर ठीक करा लें, अन्यथा इन्हें घर से हटा दें ताकि जीवन में सकारात्मक समय का प्रवाह बना रहे।
फटे जूते-चप्पल और सूखे कांटेदार पौधों से दूरी
मुख्य दरवाजे के बाहर या कमरों में बिखरे पुराने, घिसे और फटे जूते-चप्पल दरिद्रता को आमंत्रित करने वाले माने जाते हैं। त्योहारी स्वच्छता के दौरान ऐसे किसी भी अनुपयोगी फुटवियर को तुरंत हटा देना चाहिए। इसी तरह पेड़-पौधों के मामले में भी सजगता जरूरी है। घर में सूखे, मुरझाए या कैक्टस जैसे कांटेदार पौधे रखना अशांति और तनाव का कारक माना जाता है। ऐसे पौधों के स्थान पर वातावरण को शुद्ध और मनमोहक बनाने के लिए तुलसी अथवा मनी प्लांट जैसे शुभ और हरियाली बढ़ाने वाले पौधे लगाने की सलाह दी जाती है।
रद्दी, पुराने अखबार और खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
सालों से अलमारियों या छतों पर जमा पुराने अखबार, पुरानी मैगजीन और रद्दी कागजात सिर्फ धूल और कीट-पतंगों को ही न्योता नहीं देते, बल्कि वे घर में भारीपन और नकारात्मकता भी बढ़ाते हैं। इन्हें कबाड़ी को सौंपकर घर को व्यवस्थित और हल्का बनाया जा सकता है। इसके अलावा, घरों में अक्सर खराब टोस्टर, बिना काम के पड़े पुराने चार्जर, फ्यूज बल्ब और खराब ट्यूबलाइट जमा हो जाते हैं। ऐसे अप्रचलित और खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जीवन की गति में अवरोध माने जाते हैं, इसलिए इन्हें भी घर में जगह नहीं देनी चाहिए।
खंडित मूर्तियां, एक्सपायर्ड दवाइयां और जंग लगा लोहा
वास्तु शास्त्र और धार्मिक मर्यादा के अनुसार घर के मंदिर या किसी भी कमरे में टूटे हुए फोटो फ्रेम और खंडित मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। दीपावली की विशेष पूजा से पहले ऐसी मूर्तियों को पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ किसी पवित्र जलाशय में विसर्जित कर देना चाहिए। इसके साथ ही, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स में पड़ी एक्सपायर दवाइयां और प्रसाधन कक्ष में रखे पुराने क्रीम व पाउडर सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं, जिनकी छंटाई सबसे पहले करनी चाहिए। अंत में, घर के कोनों में पड़े जंग लगे लोहे के औजार या कबाड़ शनि के प्रभाव और ऊर्जा में भारीपन का कारण बनते हैं। इसके अतिरिक्त दुख या तनाव देने वाली पुरानी यादों से जुड़ी वस्तुओं को भी विदा कर घर में केवल उल्लास और सौहार्द का माहौल तैयार करना चाहिए।


















