दीपावली का पावन पर्व करीब आते ही अपनों के पास घर लौटने वाले मुसाफिरों की भारी तादाद से जयपुर के बस अड्डे खचाखच भर चुके हैं. अपने परिजनों संग रोशनी का यह उत्सव मनाने की आस लिए लोग सड़कों और अड्डों पर पहुंच रहे हैं, मगर दुर्गापुरा बस स्टैंड पर हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बन चुके हैं. विशेष रूप से टोंक, देवली और कोटा की दिशा में जाने वाले मुसाफिरों को यात्रा का कोई साधन जुटाने के लिए भारी मशक्कत से गुजरना पड़ रहा है. घंटों कतारों और अड्डों पर खड़े रहने के बावजूद वाहनों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही है, जिससे लोगों का त्योहारी उत्साह फीका पड़ता दिखाई दे रहा है.
सीटों की भारी किल्लत और सफर की मजबूरी
दुर्गापुरा बस स्टैंड पर दीपावली के मद्देनजर यात्रियों की लगातार बढ़ती तादाद ने पूरी व्यवस्था को दबाव में ला दिया है. कोटा, देवली और टोंक रूट पर चलने वाली लगभग हर बस पूरी तरह भरी हुई पहुंच रही है. छोटे-छोटे बच्चों, बुजुर्गों और भारी सामान के साथ सफर कर रहे परिवारों को कई-कई घंटे सिर्फ इस इंतजार में गुजारने पड़ रहे हैं कि शायद अगली गाड़ी में बैठने की कोई जगह मिल सके. जब लगातार कई बसें फुल निकल जाती हैं, तो कई लोग त्योहार पर किसी भी तरह घर पहुंचने की मजबूरी में खड़े-खड़े ही लंबा सफर तय करने का जोखिम उठाने पर विवश हैं.
त्योहारी सीजन में निजी बस ऑपरेटरों की मनमानी
यात्रियों के लिए केवल बसों का अभाव और सीट न मिल पाना ही अकेली चुनौती नहीं है, बल्कि निजी बस ऑपरेटरों की मनमानी ने उनकी आर्थिक परेशानी भी बढ़ा दी है. यात्रा कर रहे लोगों की शिकायत है कि त्योहार के इस दौर में उनके घर पहुंचने की लाचारी का खुला लाभ उठाया जा रहा है. आम दिनों में जिन रूटों पर बेहद कम किराया लगता था, उन्हीं रूटों के लिए अब निजी संचालक सामान्य दर से कहीं ज्यादा रकम वसूल रहे हैं. खासकर वे लोग जो पूरे परिवार के साथ यात्रा की तैयारी में हैं, उन पर इस बढ़े हुए किराये का बहुत गहरा वित्तीय असर पड़ रहा है.
परिवहन तंत्र और प्रशासन से ठोस कदमों की आस
दीपावली जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर हर व्यक्ति समय से अपने पैतृक घर पहुंचकर उत्सव में शामिल होना चाहता है. ऐसे में बस स्टैंड पर मची अफरातफरी और किराये के नाम पर हो रही मनमानी वसूली से आम जनता में गहरा असंतोष है. मुसाफिरों का मानना है कि परिवहन विभाग तथा स्थानीय प्रशासन को तुरंत सक्रिय होकर इस स्थिति पर काबू पाना चाहिए. यात्रियों को राहत दिलाने के लिए सबसे पहले व्यस्त रूटों पर अतिरिक्त सरकारी बसों के संचालन की दरकार है. इसके साथ ही निजी ट्रैवल ऑपरेटरों द्वारा वसूले जा रहे अनाप-शनाप किराये की जांच के लिए निगरानी तंत्र बनाना भी बेहद आवश्यक है, ताकि त्योहारी सीजन में आम नागरिक बिना किसी शोषण के अपने घरों तक सुरक्षित पहुंच सकें.


















